10 मिनट डिलीवरी का दबाव खत्म! Gig Workers डिलीवरी बॉय की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार का फैसला
गिग वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब डिलीवरी एग्रीगेटर्स 10 मिनट में सामान पहुंचाने का दबाव नहीं बना पाएंगे। जानें केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया के दखल के बाद क्या बदले नियम। अब आपकी डिलीवरी के लिए किसी की जान जोखिम में नहीं पड़ेगी! 🛑 10 मिनट की ‘अंधी दौड़’ पर लगा ब्रेक। गिग वर्कर्स की सुरक्षा के लिए सरकार का सराहनीय कदम।
अब 10 मिनट की ‘अंधी दौड़’ से मिलेगी मुक्ति, डिलीवरी बॉय की सुरक्षा सर्वोपरि
भारत में ‘क्विक कॉमर्स’ (Quick Commerce) के बढ़ते चलन ने जहाँ ग्राहकों के लिए सुविधा बढ़ाई थी, वहीं डिलीवरी बॉय यानी गिग वर्कर्स के लिए यह एक जानलेवा चुनौती बन गया था। लेकिन अब सरकार ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया के हस्तक्षेप के बाद, देश के प्रमुख डिलीवरी एग्रीगेटर्स ने 10 मिनट के भीतर सामान पहुंचाने की समय सीमा को खत्म करने का फैसला किया है।


क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
पिछले कुछ वर्षों में 10 से 15 मिनट के भीतर डिलीवरी देने का एक कॉम्पिटिशन शुरू हो गया था। इस ‘डेडलाइन’ को पूरा करने के चक्कर में डिलीवरी पार्टनर्स यातायात नियमों का उल्लंघन करने, तेज गाड़ी चलाने और मानसिक तनाव के शिकार हो रहे थे। कई बार इन 10 मिनटों की होड़ में सड़क दुर्घटनाएं भी हुईं, जिनमें युवाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी।
Gig Workers केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया की भूमिका
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया पिछले काफी समय से गिग वर्कर्स की कार्य स्थितियों और उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। उन्होंने जोमैटो, स्विगी और जेप्टो जैसे प्लेटफार्मों के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। सरकार का स्पष्ट स्टैंड था कि “सुविधा के नाम पर किसी की जान से समझौता नहीं किया जा सकता।” इसी दखल के बाद कंपनियां अब डिलीवरी समय को लेकर लचीला रुख अपनाने पर राजी हुई हैं।
Gig Workers अब क्या बदलेगा?
- समय सीमा का अंत: अब ग्राहकों को 10 मिनट वाली अनिवार्य डिलीवरी का वादा नहीं किया जाएगा। यह समय बढ़कर व्यावहारिक (Realistic) बनाया जाएगा।
- सुरक्षा पर ध्यान: डिलीवरी पार्टनर्स पर समय पर न पहुंचने पर लगने वाला जुर्माना या उनके रेटिंग पॉइंट्स कटने का दबाव कम होगा।
- यातायात नियमों का पालन: समय का दबाव कम होने से डिलीवरी बॉय सड़कों पर शांति और सुरक्षा के साथ चल सकेंगे।
- बीमा और सामाजिक सुरक्षा: सरकार अब गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं (Social Security Schemes) से जोड़ने पर भी काम कर रही है।
सरकार का यह फैसला न केवल मानवीय आधार पर सही है, बल्कि यह एक स्वस्थ कार्य संस्कृति (Work Culture) को बढ़ावा देने वाला भी है। हम एक समाज के तौर पर इतनी जल्दी में नहीं हो सकते कि हमारे 2 किलो चीनी या स्नैक्स के पैकेट के लिए कोई अपनी जान हथेली पर रखकर सड़क पर दौड़े। यह फैसला गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों युवाओं के हक में एक बड़ी जीत है।
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