51 शक्तिपीठों की दिव्य यात्रा (51 Shakti Peethas of India): जानें माता सती के अंगों से बने इन पावन धामों की सूची और उनके राज्य
51 Shakti Peethas of India : भारत के 51 शक्तिपीठ कहाँ-कहाँ स्थित हैं? सती के अंगों के गिरने से बने इन पावन तीर्थों की पूरी सूची और उनके राज्यों के बारे में जानें। एक आध्यात्मिक मार्गदर्शिका। चैत्र नवरात्रि 2026 के इस पावन समय में, इन स्थानों के बारे में जानना ही पुण्यकारी माना जाता है।
शक्तिपीठों की उत्पत्ति: एक पौराणिक कथा 51 Shakti Peethas of India

शक्तिपीठों का निर्माण एक महान त्याग और क्रोध की घटना से जुड़ा है। शिव पुराण के अनुसार, राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने सभी देवी-देवताओं को बुलाया, लेकिन अपने दामाद भगवान शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया।
जब माता सती बिना बुलाए वहां पहुँचीं, तो दक्ष ने शिव का भारी अपमान किया। अपने पति का अपमान सहन न कर पाने के कारण सती ने यज्ञ की अग्नि में स्वयं को स्वाहा कर दिया। वियोग और क्रोध में डूबे भगवान शिव सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करने लगे। ब्रह्मांड को प्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 टुकड़ों में विभाजित कर दिया। वे अंग जहाँ-जहाँ गिरे, वे स्थान ‘शक्तिपीठ’ कहलाए।

डिवाइन जर्नी: भारत के 51 शक्तिपीठ और उनकी महिमा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के पार्थिव शरीर को विभाजित किया था, तो उनके अंग जहाँ-जहाँ गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ बन गए। यहाँ 51 मुख्य शक्तिपीठों की सूची दी गई है, जिनमें से अधिकांश भारत में हैं और कुछ पड़ोसी देशों (नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, तिब्बत) में स्थित हैं।

प्रमुख शक्तिपीठ और उनके राज्य/स्थान
| क्रमांक | शक्तिपीठ का नाम | गिरा हुआ अंग/आभूषण | स्थान / राज्य |
| 1 | अमरनाथ | गला | जम्मू और कश्मीर (पहलगाम) |
| 2 | ज्वालामुखी | जीभ | हिमाचल प्रदेश (कांगड़ा) |
| 3 | बज्रेश्वरी देवी | बायां स्तन | हिमाचल प्रदेश (कांगड़ा) |
| 4 | कुरुक्षेत्र (भद्रकाली) | टखना | हरियाणा |
| 5 | मानसा (दाक्षायणी) | दायां हाथ | तिब्बत (मानसरोवर झील के पास) |
| 6 | प्रयाग (ललिता) | हाथ की उंगलियां | उत्तर प्रदेश (प्रयागराज) |
| 7 | विशालाक्षी | कान के कुंडल | उत्तर प्रदेश (वाराणसी) |
| 8 | ललिता (वाराणसी) | निचला होंठ | उत्तर प्रदेश (वाराणसी) |
| 9 | रामगिरी | दायां स्तन | उत्तर प्रदेश (चित्रकूट) |
| 10 | बृजेश्वरी (मथुरा) | केश | उत्तर प्रदेश (मथुरा) |
| 11 | अम्बाजी | हृदय | गुजरात (बनासकांठा) |
| 12 | पावागढ़ (कालिका) | दाएं पैर की उंगलियां | गुजरात (पंचमहल) |
| 13 | कामाख्या | योनि | असम (गुवाहाटी) |
| 14 | कालीघाट (काली) | दाएं पैर की उंगलियां | पश्चिम बंगाल (कोलकाता) |
| 15 | बकरेश्वर | मन (भ्रूमध्य) | पश्चिम बंगाल (बीरभूम) |
| 16 | नलहाटी | पैर की हड्डी | पश्चिम बंगाल (बीरभूम) |
| 17 | किरीटेश्वरी | मुकुट | पश्चिम बंगाल (मुर्शिदाबाद) |
| 18 | बहुला | बायां हाथ | पश्चिम बंगाल (बर्धमान) |
| 19 | युगाद्या | दाएं पैर का अंगूठा | पश्चिम बंगाल (बर्धमान) |
| 20 | नंदीपुर | गले का हार | पश्चिम बंगाल (बीरभूम) |
| 21 | विभाश | बायां टखना | पश्चिम बंगाल (मिदनापुर) |
| 22 | त्रिस्त्रोता | बायां पैर | पश्चिम बंगाल (जलपाईगुड़ी) |
| 23 | तारापीठ | नेत्र गोलक | पश्चिम बंगाल (बीरभूम) |
| 24 | मैहर (शारदा) | हार | मध्य प्रदेश (सतना) |
| 25 | हरसिद्धि (महाकाली) | कोहनी | मध्य प्रदेश (उज्जैन) |
| 26 | शोणदेश | दायां नितंब | मध्य प्रदेश (अमरकंटक) |
| 27 | कालीपीठ | बायां नितंब | मध्य प्रदेश |
| 28 | कामाक्षी | नाभि | तमिलनाडु (कांचीपुरम) |
| 29 | कन्याकुमारी | पीठ | तमिलनाडु (कन्याकुमारी) |
| 30 | सुचिन्द्रम | ऊपरी दांत | तमिलनाडु |
| 31 | मल्लिकार्जुन | ऊपरी होंठ | आंध्र प्रदेश (श्रीशैलम) |
| 32 | गंडकी | मस्तक | नेपाल (मुक्तिनाथ के पास) |
| 33 | गुह्येश्वरी | दोनों घुटने | नेपाल (काठमांडू) |
| 34 | चंद्रनाथ | दायां हाथ | बांग्लादेश (चटगाँव) |
| 35 | सुगंधा | नासिका | बांग्लादेश (बरिसाल) |
| 36 | करतोया | बायां तलवा | बांग्लादेश (बोगरा) |
| 37 | श्रीशैल | गला | बांग्लादेश (सिलहट) |
| 38 | जैसोर | हथेलियां | बांग्लादेश (खुलना) |
| 39 | हिंगलाज | ब्रह्मरंध्र (मस्तिष्क) | पाकिस्तान (बलूचिस्तान) |
| 40 | इंद्राक्षी | पायल | श्रीलंका (जाफना) |
| 41 | त्रिपुरा सुंदरी | दायां पैर | त्रिपुरा |
| 42 | पशुपतिनाथ (जयंती) | बाईं जंघा | मेघालय (जयंतिया हिल्स) |
| 43 | कामाख्या (देवघर) | हृदय (कुछ मतों में) | झारखंड (देवघर) |
| 44 | बिरजा | नाभि | ओडिशा (जाजपुर) |
| 45 | विमला | नाभि | ओडिशा (पुरी) |
| 46 | कोल्हापुर (महालक्ष्मी) | त्रिनेत्र | महाराष्ट्र (कोल्हापुर) |
| 47 | तुलजा भवानी | बायां कंधा | महाराष्ट्र (उस्मानाबाद) |
| 48 | सप्तश्रृंगी | ठोड़ी | महाराष्ट्र (नासिक) |
| 49 | दंतेश्वरी | दांत | छत्तीसगढ़ (दंतेवाड़ा) |
| 50 | चंद्रभागा | पेट | गुजरात (सोमनाथ के पास) |
| 51 | सुचिन्द्रम (नारायणी) | ऊपरी दांत | कन्याकुमारी के पास |
51 Shakti Peethas of India इन 51 शक्तिपीठों की यात्रा करना हर सनातनी का स्वप्न होता है। प्रत्येक पीठ की अपनी ऊर्जा और अपना इतिहास है। चैत्र नवरात्रि के इन पावन दिनों में, माँ के इन स्वरूपों का स्मरण मात्र ही सुख और शांति प्रदान करने वाला है। विशेष रूप से गुजरात में स्थित अंबाजी और पावागढ़ जैसे धाम इस समय पूरी दुनिया के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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