1 December 2025 World AIDS Day: एड्स के खिलाफ लड़ाई सिर्फ दवाई की नहीं — इंसानियत, समझदारी और साथ की है
1 December 2025 World AIDS Day: 1 दिसंबर 2025 को विश्व एड्स दिवस की थीम “Overcoming disruption, transforming the AIDS response” है। इस दिन हम HIV/AIDS की उत्पत्ति, इतिहास और संक्रमण के बारे में जागरूकता बढ़ाते हैं — ताकि कल के लिए सहानुभूति, समर्थन और सामूहिक जवाबदेही को मजबूत करें।
एड्स — तब शुरू हुआ जब जंगल की दहाड़ में बंदर-मानव की दूरी टूट गई। जानो कैसे HIV बना, और कैसे हम सुरक्षित रह सकते हैं
AIDS की शुरुआत — इतिहास और उत्पत्ति
- AIDS (Acquired Immunodeficiency Syndrome) का कारण HIV (Human Immunodeficiency Virus) है।
- वैज्ञानिकों के अनुसार, HIV की उत्पत्ति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह वायरस उस प्रकार के लेंटिवायरस (lentivirus) से जुड़ा है जो पश्चिमी अफ्रीका में पाए जाने वाले बंदरों और चिनपांज़ियों (chimpanzees) में पाया जाता है — जिसे SIV (Simian Immunodeficiency Virus) कहते हैं।
- ऐसा माना जाता है कि मनुष्य और इन जानवरों के बीच संपर्क (जैसे शिकार, मांस के सेवन, या खून के संपर्क) के दौरान SIV मनुष्य में गया — और अंततः HIV बन गया।
- आनुवंशिक (genetic) अध्ययनों से पता चलता है कि महामारीकारक HIV-1 समूह M (group M) का पहला संक्रमण संभवतः 1884 और 1924 के बीच हुआ था, और संक्रमण धीरे-धीरे अफ्रीका के अलग-अलग हिस्सों में फैला।
- बाद में, 1950s में HIV बड़े इलाके में फैलना शुरू हुआ; फिर 1960s के दशक में यह अफ्रीका से अन्य महाद्वीपों — जैसे हवाईटी और फिर अमेरिका — पहुंचा।
- 1980s की शुरुआत में, जब ऑब्स-पल्स हो रहे रोग (जिनमें दुर्लभ कैंसर और संक्रमण शामिल थे) यूरोप और अमेरिका में देखे गए, तब पहली बार इस नई बीमारी को समझा गया। 1982 में “AIDS” नाम पहली बार इस्तेमाल हुआ।

1 December 2025 World AIDS Day थीम — क्या है और क्यों जरूरी
- इस साल की थीम “Overcoming disruption, transforming the AIDS response.” है।
- इसका उद्देश्य है उन बाधाओं और विघ्नों को पहचानना जो HIV/AIDS से लड़ने की वैश्विक कोशिशों में आई हैं — जैसे कि फंडिंग में कमी, स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान, सामाजिक असमानताएँ, भेदभाव और कलंक।
- साथ ही, यह दिन हमें याद दिलाता है कि जबकि चुनौतियाँ बढ़ी हैं, समुदायों की दृढ़ता, नवाचार और सहानुभूति के ज़रिए हम एड्स से लड़ाई को आगे बढ़ा सकते हैं।
कैप्शन (इंस्टा / सोशल मीडिया के लिए):
1 December 2025 World AIDS Day disruptions को पार करें, AIDS response को बदलें1 दिसंबर 2025, हम सब साथ हैं
1 December 2025 World AIDS Day 1 दिसंबर 2025 को मनाया जाने वाला विश्व एड्स दिवस इस वर्ष “Overcoming disruption, transforming the AIDS response” थीम के साथ आ रहा है। इस दिन हम न सिर्फ उन चुनौतियों को याद करते हैं जो HIV/AIDS से लड़ने में आई हैं, बल्कि यह भी मनाते हैं कि कैसे समुदाय, चिकित्सा और इंसानियत मिलकर बदलाव ला सकती है।
एड्स की शुरुआत की कहानी हमारे पूर्वजों से शुरू होती है — पश्चिमी और मध्य अफ्रीका के घने जंगलों में। वहाँ के वन्य जीवों, विशेष रूप से चिनपांज़ियों और बंदरों में पाया जाने वाला वायरस SIV (Simian Immunodeficiency Virus) धीरे-धीरे मानव में आ गया। शायद किसी शिकारी ने संक्रमित जानवर का मांस खाया, या खून-पानी के संपर्क में आया — और SIV ने इंसानी शरीर में जगह बना ली। समय के साथ, यह वायरस म्यूटेट करके HIV बन गया।

आनुवंशिक अध्ययनों से पता चलता है कि HIV-1 समूह M — जो आज अधिकतर मामलों के लिए ज़िम्मेदार है — संभवतः 1880–1920 के दशक में मानव में आया। धीरे-धीरे अफ्रीका के गांवों और शहरों तक फैला। 1950s में आबादी वृद्धि और जनसंक्रमण फैलने की वजह से यह वायरस और तेज़ी से फैलने लगा। 1960s में यह अफ्रीका से बाहर फैलने लगा — पहले हवाईटी और फिर अमेरिका व अन्य देशों तक।
1981 में, अमेरिका में कुछ पुरुषों में दुर्लभ प्रकार का कैंसर (कपोसी सारकोमा) और अन्य घातक संक्रमण देखे गए। तब तक लोगों को समझ नहीं था कि ये सब कैसे जुड़े हैं। 1982 में वैज्ञानिकों ने पहली बार इस स्थिति को “AIDS” — अधिग्रहीत प्रतिरक्षा अभाव सिंड्रोम — नाम दिया। आगे 1984-85 में वायरस (HIV) पहचान में आया और रक्त परीक्षण भी विकसित हुआ।
आज, AIDS सिर्फ एक बीमारी नहीं — बल्कि इंसानियत, समझदारी और वैश्विक एकता की लड़ाई बन चुकी है। लेकिन 2025 तक, हम फिर से एक मोड़ पर हैं — जहाँ कई देशों में फंडिंग में कटौती, स्वास्थ सुविधाओं में व्यवधान, भेदभाव और सामाजिक असमानता HIV प्रतिक्रिया को कमजोर कर रही है। इसलिए इस विश्व एड्स दिवस पर — आइए हम न सिर्फ एड्स की मौतों को याद करें, बल्कि जिंदगी, सहानुभूति, समझदारी और देखभाल के लिए एक नया संकल्प लें।
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