Anna Hazare ने BJP-नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ किया बड़ा ऐलान 30 जनवरी से अनशन!
Anna Hazare समाजवादी अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ आमरण अनशन का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि लोकायुक्त कानून को लागू न करने पर 30 जनवरी 2026 से वह अंतिम आंदोलन करेंगे।
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने आज एक बड़ा ऐलान करते हुए 30 जनवरी 2026 से महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ आमरण अनशन (हंगर स्ट्राइक) शुरू करने की घोषणा की है। यह ऐलान उन्होंने लोकायुक्त कानून (Lokayukta Act) को लागू न किए जाने पर किया है—जिसे राज्य में भ्रष्टाचार रोकने और सरकारी जवाबदेही बढ़ाने के लिए पारित किया गया था, लेकिन अब तक प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया है।
8 दशक से अधिक उम्र के अन्ना हजारे ने यह चेतावनी साफ़ शब्दों में दी कि यह उनका “अंतिम आंदोलन” होगा और अगर सरकार ने जनता के हित के इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो वह जनता के समर्थन के साथ संघर्ष करेंगे और अपनी अंतिम सांस तक अनशन पर बैठेंगे।


Anna Hazare क्या है लोकायुक्त कानून और क्यों विवाद?
अन्ना हजारे का बड़ा ऐलान: महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ आमरण अनशन की घोषणा
लोकायुक्त कानून का उद्देश्य है कि राज्य के सभी सरकारी कर्मियों, मंत्रियों और अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच एक स्वतंत्र संस्था द्वारा की जाए, ताकि रिश्वतखोरी, धन उगाही, और प्रशासनिक गड़बड़ियों पर रोक लगाई जा सके। महाराष्ट्र विधानसभा ने यह विधेयक 28 दिसंबर 2022 को पास किया था और विधान परिषद ने 15 दिसंबर 2023 को मंजूरी दी थी, उसके बाद राष्ट्रपति की मंज़ूरी के लिए भेजा गया। हालांकि अब तक यह कानून पूरी तरह लागू नहीं हुआ है, और यही अन्ना हजारे की चिंता का मुख्य कारण है।
अन्ना ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को कई पत्र भेजकर लोकायुक्त के क्रियान्वयन के प्रति सरकार की उदासीनता पर कई बार सवाल उठाए हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से वे बेहद निराश दिखे हैं। उन्होंने कहा है कि जनता की भलाई, भ्रष्टाचार का नियंत्रण और सिस्टम में जवाबदेही स्थापित करना सरकार की ज़िम्मेदारी है न कि सिर्फ़ घोषणाओं तक सीमित रहना।
अनशन की घोषणा और चेतावनी
BJP सरकार पर भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन तेज़
Anna Hazare ने यह स्पष्ट कर दिया कि 30 जनवरी 2026 से वे रालेगण सिद्धि (महाराष्ट्र) में आमरण अनशन पर बैठेंगे, और इसे अपने अंतिम आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है। उनका यह निर्णय पिछले कई वर्षों से लोकायुक्त कानून लागू कराने की कोशिशों का नतीजा है। इसके साथ ही हजारे ने कहा कि वे सरकार के प्रति किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत रोष नहीं रखते, बल्कि यह संघर्ष जनहित के लिए आवश्यक है।
विश्लेषकों का मानना है कि अन्ना का यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा प्रभाव पैदा करेगा, क्योंकि लोकायुक्त जैसे मुद्दे पर जोरदार आंदोलन लोगों की सरकार के साथ अपेक्षाओं और भरोसे को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। विपक्षी दलों ने भी अन्ना हजारे के इस ऐलान का समर्थन किया है और कहा है कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई में युवाओं और आम लोगों को जागरूक रहना चाहिए।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और भविष्य
अब तक मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ़ से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक चर्चाएँ और मीडिया रिपोर्टें बता रही हैं कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। आलोचक कहते हैं कि चुनावी मौसम और सामाजिक दबाव के बीच सरकार को लॉकायुक्त कानून के क्रियान्वयन पर विचार करना पड़ेगा। समर्थक कह रहे हैं कि अन्ना का आंदोलन महाराष्ट्र के लोकतंत्र के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है।
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