Wednesday, January 28, 2026
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13 December 2001 Parliament Attack: देश की लोकतांत्रिक आत्मा पर आतंकी वार, शहीदों की वीरता को नमन

13 December 2001 Parliament Attack: देश की लोकतांत्रिक आत्मा पर आतंकी वार, शहीदों की वीरता को नमन

13 December 2001—जब आतंक के खिलाफ संसद के भीतर सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस दिखाया और लोकतंत्र की रक्षा की। 13 दिसंबर 2001 को हुए भारतीय संसद हमले की बरसी पर शहीद सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि। जानिए उस दिन की पूरी कहानी, शहादत और देश की एकजुट प्रतिक्रिया। आज भारत की संसद पर हुए हमले की 24वीं बरसी है, इस दिन पर श्रद्धांजलि देने देश के सभी नेता सामिल हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, पीएम मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी

आज 13 दिसंबर है—भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह दिन, जब देश की संसद पर कायरतापूर्ण आतंकी हमला हुआ था। वर्ष 2001 में इसी दिन आतंकियों ने संसद भवन को निशाना बनाकर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश की। इस हमले में देश के बहादुर सुरक्षाकर्मियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर संसद और जनप्रतिनिधियों की रक्षा की और आतंकियों के मंसूबों को नाकाम कर दिया।

पीएम नरेन्द्र मोदी ने श्रद्धांजलि

13 December 2001 की सुबह संसद परिसर में पांच सशस्त्र आतंकी एक कार में सवार होकर घुसे। उनके पास अत्याधुनिक हथियार और विस्फोटक थे। आतंकियों ने फर्जी सरकारी स्टिकर और पहचान का इस्तेमाल कर सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की, लेकिन सतर्क सुरक्षाबलों ने तुरंत खतरे को भांप लिया। कुछ ही पलों में संसद परिसर गोलियों की आवाज़ से गूंज उठा।

इस मुठभेड़ में दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ और संसद सुरक्षा सेवा के जांबाज जवानों ने अद्भुत साहस का परिचय दिया। उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए आतंकियों का सामना किया और सभी पांचों आतंकियों को मार गिराया। इस दौरान आठ सुरक्षाकर्मी और एक माली शहीद हो गए। उनकी शहादत ने यह सुनिश्चित किया कि संसद के भीतर मौजूद सांसद और मंत्री सुरक्षित रहें।

यह हमला केवल एक इमारत पर नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला था। पूरे देश में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश और शोक व्याप्त हो गया। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर पूरा देश एकजुट नजर आया। संसद के दोनों सदनों में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

प्रेसिडेंट द्रौपदी मुर्मू ने शहीदों को याद कर पोस्ट किया x पर

इस हमले के बाद भारत ने आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया। संसद परिसर सहित देश के सभी संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा बढ़ाई गई। आतंकवाद के खिलाफ कानूनों और खुफिया तंत्र को और सशक्त किया गया ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

13 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि बलिदान, साहस और कर्तव्य की याद है। शहीद जवानों की वीरता आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि देश की रक्षा सर्वोपरि है। आज, संसद हमले की बरसी पर पूरा राष्ट्र उन वीर सपूतों को नमन करता है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर लोकतंत्र की रक्षा की।

उनकी कुर्बानी हमें यह भी याद दिलाती है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा बलों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। एकजुटता, सतर्कता और देशप्रेम ही आतंक के खिलाफ हमारी सबसे बड़ी ताकत है।



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