Makar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति पर करें ये 5 अचूक उपाय, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति और घर में आएगी सुख-समृद्धिमकर संक्रांति पर करें ये 5 अचूक उपाय, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति और घर में आएगी सुख-समृद्धि
मकर संक्रांति का दिन पितरों को प्रसन्न करने और पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत शुभ है। जानें इस दिन काले तिल, जल और दान के कौन से विशेष उपाय आपके जीवन से बाधाओं को दूर कर सकते हैं। मकर संक्रांति पर सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर मकर राशि में प्रवेश करते हैं।

🌞 यह मिलन न केवल मौसम बदलता है, बल्कि आपकी किस्मत भी बदल सकता है। अगर कुंडली में पितृ दोष है या कार्यों में अड़चनें आ रही हैं, तो इस संक्रांति पर ये सरल उपाय जरूर करें। पूर्वजों के आशीर्वाद से जीवन खुशहाल बनेगा।


Makar Sankranti 2026: पितृ दोष से मुक्ति और पूर्वजों के आशीर्वाद का महापर्व
हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर अपने पुत्र शनि की राशि ‘मकर’ में प्रवेश करते हैं, तो इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, उत्तरायण का यह समय देवताओं का दिन माना जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह दिन पितरों (पूर्वजों) की आत्मा की शांति और ‘पितृ दोष’ के निवारण के लिए भी अमावस्या जितना ही शक्तिशाली होता है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी देह त्यागने के लिए उत्तरायण (मकर संक्रांति) के सूर्य की ही प्रतीक्षा की थी।
पितृ दोष और मकर संक्रांति का संबंध

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ‘पिता’ और ‘आत्मा’ का कारक माना जाता है। जब कुंडली में सूर्य कमजोर हो या राहु-केतु के साथ पीड़ित हो, तो पितृ दोष का निर्माण होता है। मकर संक्रांति पर सूर्य की उपासना और पितरों के निमित्त किया गया दान सीधे उन तक पहुँचता है। इस दिन किए गए उपायों से न केवल पितृ दोष शांत होता है, बल्कि परिवार में चल रही कलह, धन हानि और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी दूर होती हैं।
पितृ दोष निवारण के 5 अचूक उपाय
1. पवित्र नदी में स्नान और तर्पण मकर संक्रांति के दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान का बहुत महत्व है। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल और काले तिल मिला लें। स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पूर्वजों का स्मरण करें और जल में काले तिल मिलाकर उन्हें अर्घ्य (तर्पण) दें। ऐसा करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है।
2. काले तिल का दान मकर संक्रांति को ‘तिल संक्रांति’ भी कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के शरीर से मानी गई है। इस दिन काले तिल और गुड़ का दान करना पितृ दोष का सबसे बड़ा काट है। आप ब्राह्मणों को या जरूरतमंदों को तिल के लड्डू या कच्चा तिल दान कर सकते हैं।
3. खिचड़ी और ऊनी वस्त्रों का दान इस दिन चावल और उड़द की दाल की खिचड़ी बनाकर दान करने की परंपरा है। उड़द की दाल का संबंध शनि से है और चावल का चंद्रमा से। यह दान शनि और चंद्र दोनों के दोषों को दूर करता है। साथ ही, क्योंकि यह सर्दी का समय होता है, इसलिए पितरों के नाम पर गरीबों को कंबल या गर्म कपड़े दान करने से पितृ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं।

4. पीपल के वृक्ष की सेवा शास्त्रों के अनुसार, पीपल के वृक्ष में पितरों का वास होता है। मकर संक्रांति के दिन सुबह पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं और शाम के समय पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। यह उपाय पितृ दोष के कारण हो रही नौकरी और व्यापार की समस्याओं को खत्म करने में बहुत कारगर है।
5. सूर्य देव को अर्घ्य पितृ दोष मूल रूप से सूर्य के पीड़ित होने से जुड़ा है। मकर संक्रांति के दिन तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, रोली और थोड़े से काले तिल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और पिता-पुत्र के संबंधों में सुधार आता है।
Makar Sankranti 2026 का पर्व हमें यह सिखाता है कि हमें अपने वर्तमान (देवता) और भूतकाल (पितृ) दोनों का सम्मान करना चाहिए। पितृ दोष कोई डरने की बात नहीं है, बल्कि यह एक संकेत है कि हमारे पूर्वज हमसे कुछ सेवा या स्मरण चाहते हैं। इस मकर संक्रांति पर इन सरल उपायों को अपनाएं और अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का स्वागत करें। याद रखें, जिस घर पर पितरों का आशीर्वाद होता है, वहां कोई भी संकट टिक नहीं सकता।
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