Most Wanted : बस ड्राइवर से राष्ट्रपति और अब अमेरिकी कैदी कौन हैं Nicolas Maduro? जिसके बेडरूम तक जा पहुंची ट्रंप की सेना!
अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है। जानिए आखिर क्यों डोनाल्ड ट्रंप 2020 से मादुरो के पीछे पड़े थे, क्या है ‘नार्को-टेररिज्म’ का आरोप और कैसे एक बस ड्राइवर बना था वेनेजुएला का तानाशाह।
Most Wanted Nicolas Maduro घर में घुसकर गिरफ्तारी: दुनिया हैरान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ऐलान ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है। ट्रंप ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने एक विशेष अभियान के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई वेनेजुएला की राजधानी काराकास में हुए भीषण हवाई हमलों के बाद की गई। लेकिन सवाल यह है कि आखिर अमेरिका एक देश के राष्ट्रपति के पीछे हाथ धोकर क्यों पड़ा था?
कौन हैं निकोलस मादुरो? (बस ड्राइवर से सत्ता के शिखर तक)

निकोलस मादुरो का सफर बहुत ही दिलचस्प रहा है।
- बस ड्राइवर: राजनीति में आने से पहले मादुरो काराकास मेट्रो सिस्टम में एक बस ड्राइवर थे। वे ट्रेड यूनियन के नेता बने और यहीं से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ।
- ह्यूगो शावेज के खास: वेनेजुएला के पूर्व दिग्गज नेता ह्यूगो शावेज के वे सबसे वफादार थे। 2013 में शावेज की मृत्यु के बाद मादुरो ने सत्ता संभाली।
- तानाशाही का आरोप: राष्ट्रपति बनते ही मादुरो ने सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। उन पर विपक्ष को खत्म करने, चुनाव में धांधली करने और मानवाधिकारों के हनन के गंभीर आरोप लगे।
अमेरिका मादुरो के पीछे क्यों पड़ा था? (2020 का कनेक्शन)
यह दुश्मनी आज की नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी एजेंसियां साल 2020 से ही मादुरो की तलाश में थीं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. नार्को-टेररिज्म (नशीली दवाओं का आतंकवाद)
मार्च 2020 में, अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice) ने मादुरो और उनके कई सहयोगियों पर ‘नार्को-टेररिज्म’ का आरोप लगाया था। अमेरिका का दावा है कि मादुरो वेनेजुएला की सरकार नहीं, बल्कि “Cartel of the Suns” नामक एक ड्रग कार्टेल चलाते हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने कोलंबियाई विद्रोहियों (FARC) के साथ मिलकर टन के हिसाब से कोकीन अमेरिका भेजी।
2. 15 मिलियन डॉलर का इनाम
2020 में ही ट्रंप प्रशासन ने मादुरो की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने वाले को 1.5 करोड़ डॉलर (करीब 110-125 करोड़ रुपये) का इनाम देने की घोषणा की थी। किसी देश के राष्ट्रपति पर ऐसा इनाम रखना अपने आप में ऐतिहासिक था।
3. वेनेजुएला की बर्बादी
दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद, मादुरो के शासन में वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो गई। वहां महंगाई इतनी बढ़ी कि लोगों को एक ब्रेड खरीदने के लिए भी नोटों के बंडल ले जाने पड़ते थे। लाखों लोग भूख से बचने के लिए देश छोड़कर भाग गए। अमेरिका इसे मानवीय संकट मानता था।
क्यों हुआ ‘घर में घुसकर’ हमला?
मादुरो को पता था कि अमेरिका उनके पीछे है, इसलिए वे बहुत कम सार्वजनिक रूप से बाहर निकलते थे और भारी सुरक्षा में रहते थे। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद अमेरिकी नीति आक्रामक हो गई।

- चेतावनी: ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि मादुरो सरेंडर कर दें।
- कार्रवाई: जब मादुरो नहीं माने, तो अमेरिकी सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक के अंदाज में हवाई हमले किए और अराजकता के बीच मादुरो को उनके सुरक्षित ठिकाने (बेडरूम/बंकर) से गिरफ्तार कर लिया।
निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से दक्षिण अमेरिका की राजनीति में भूचाल आ गया है। जहाँ मादुरो समर्थक इसे ‘साम्राज्यवाद का हमला’ बता रहे हैं, वहीं उनके विरोधी इसे ‘आजादी का दिन’ मान रहे हैं। अब देखना यह है कि मादुरो पर अमेरिका में मुकदमा कैसे चलता है और वेनेजुएला का भविष्य किस करवट बैठता है।
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