Vasant Panchami 2026: इस बार नहीं बजेंगी शहनाइयां, विवाह और गृह प्रवेश पर क्यों लगी है ‘ग्रहों’ की रोक?
वसंत पंचमी को विवाह का ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, लेकिन 2026 में इस दिन शादी और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। जानिए ज्योतिषीय कारण और शुक्र-गुरु की स्थिति का प्रभाव। अक्सर लोग शादी-ब्याह या कोई शुभ काम करने जाते हैं, तो पहले मुहूर्त देखते हैं, लेकिन साल में कुछ ऐसे दिन होते हैं, जिसमें बिना शुभ मुहूर्त देखे ही मांगलिक कार्य किया जाता है। वहीं वसंत पंचमी पर भी शादी-ब्याह होते थे, लेकिन इस बार मांगलिक कार्यों पर रोक है।
वसंत पंचमी पर शादी की प्लानिंग कर रहे हैं? तो रुक जाइए! इस साल 2026 में वसंत पंचमी पर नहीं गूंजेंगी शहनाइयां। जानिए क्यों इस ‘अबूझ मुहूर्त’ पर लगा है ग्रहण।
Vasant Panchami 2026 और शुभ कार्यों पर रोक
साल 2026 में बसंत पंचमी 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
पंचांग के अनुसार इसकी विस्तृत जानकारी इस प्रकार है:
- तिथि: 23 जनवरी 2026
- दिन: शुक्रवार
- पंचमी तिथि प्रारंभ: 23 जनवरी को सुबह 02:28 बजे से
- पंचमी तिथि समाप्त: 24 जनवरी को देर रात 01:46 बजे तक
- सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 07:15 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक
Vasant Panchami 2026: अबूझ मुहूर्त होने के बावजूद क्यों सूनी रहेगी शहनाई? जानिए विवाह और गृह प्रवेश पर रोक की असली वजह
हिंदू धर्म में माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि, यानी वसंत पंचमी (Basant Panchami) का विशेष महत्व है। यह दिन विद्या की देवी माँ सरस्वती को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र में वसंत पंचमी को ‘अबूझ मुहूर्त’ (Abujh Muhurat) की संज्ञा दी गई है। इसका अर्थ है कि इस दिन पंचांग देखे बिना कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी, सगाई, या गृह प्रवेश किया जा सकता है।
लेकिन साल 2026 में यह परंपरा टूटने वाली है। इस साल वसंत पंचमी पर विवाह और गृह प्रवेश जैसे बड़े मांगलिक कार्यों पर ज्योतिषीय रोक लगी है। यह खबर उन लोगों के लिए झटका हो सकती है जो इस शुभ दिन का इंतजार कर रहे थे।
क्यों नहीं होंगी शादियां? (ज्योतिषीय कारण)
इस साल वसंत पंचमी पर शुभ कार्यों के वर्जित होने का मुख्य कारण ग्रहों की स्थिति (Planetary Positions) है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, किसी भी विवाह के सफल होने के लिए दो मुख्य ग्रहों का उदित (Visible/Rising) होना अनिवार्य है:
- शुक्र (Venus): पुरुषों और विवाह के सुख का कारक।
- गुरु (Jupiter): कन्या के सुख और वैवाहिक स्थिरता का कारक।
तारा अस्त (Tara Asta) का प्रभाव: पंचांग गणना के अनुसार, वसंत पंचमी 2026 के आसपास शुक्र तारा (Venus) या बृहस्पति (Jupiter) के अस्त होने की संभावना या उनकी स्थिति कमजोर होने के कारण शुभ लग्नों का अभाव है। जब आकाश में शुक्र या गुरु सूर्य के बहुत करीब आ जाते हैं, तो वे ‘अस्त’ (Combust) हो जाते हैं। शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि ‘तारा डूबे’ होने पर विवाह, मुंडन, या गृह प्रवेश करने से उस कार्य का शुभ फल नहीं मिलता और दांपत्य जीवन में कष्ट आते हैं।
यही कारण है कि अबूझ मुहूर्त होने के बावजूद, ग्रह दोष के चलते आचार्यों ने इस दिन को विवाह के लिए निषेध बताया है।


गृह प्रवेश पर भी ग्रहण
सिर्फ शादियां ही नहीं, इस बार वसंत पंचमी पर नए घर में प्रवेश (Griha Pravesh) करना भी वर्जित माना जा रहा है। गृह प्रवेश के लिए सूर्य का उत्तरायण होना और शुभ ग्रहों की दृष्टि आवश्यक होती है। इस वर्ष ग्रहों के अशुभ योग और ‘खरमास’ के बाद की स्थितियों के कारण, वास्तु के अनुसार यह समय नए घर में शिफ्ट होने के लिए अनुकूल नहीं है।
तो वसंत पंचमी पर क्या करें?
भले ही विवाह और गृह प्रवेश न हो, लेकिन वसंत पंचमी का धार्मिक महत्व कम नहीं होता। यह दिन विद्यारंभ (अक्षर अभ्यास) के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
- सरस्वती पूजा: विद्यार्थी और कलाकार इस दिन माँ सरस्वती की विशेष पूजा कर सकते हैं।
- पीले वस्त्र और दान: इस दिन पीले कपड़े पहनना और पीली मिठाई का भोग लगाना बहुत शुभ होता है।
- नए व्यापार की शुरुआत: बही-खाता पूजन या छोटी दुकान का उद्घाटन किया जा सकता है, लेकिन बड़े निर्माण कार्यों से बचना चाहिए।
- बच्चों का नामकरण: कुछ पंचांगों के अनुसार, नामकरण संस्कार के लिए मुहूर्त देखा जा सकता है (स्थानीय पंडित से सलाह अनिवार्य)।

फिर कब शुरू होंगी शादियां?
जो लोग वसंत पंचमी पर शादी नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रहों के उदय होने के बाद, यानी फाल्गुन और वैशाख माह में विवाह के कई शुद्ध और शक्तिशाली मुहूर्त उपलब्ध होंगे। तब तक इंतजार करना ही दांपत्य सुख के लिए श्रेष्ठ है।
परंपराएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में ‘काल और पात्र’ (समय और ग्रह) का स्थान सबसे ऊपर है। 2026 की वसंत पंचमी हमें यह सिखाती है कि हर बार सामान्य नियम लागू नहीं होते। इस बार माँ सरस्वती की आराधना करें और विवाह के लिए ग्रहों के शुभ होने का इंतजार करें, ताकि आपका जीवन सुखमय रहे।
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