Saturday, January 17, 2026
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अमेरिकी संसद में गूंजा सवाल- ‘क्या पुरुष प्रेग्नेंट हो सकते हैं?’ Can Men Get Pregnant भारतीय मूल की डॉ. निशा वर्मा के जवाब ने बंद की बोलती, जानें पूरा सच!

अमेरिकी संसद में गूंजा सवाल- ‘क्या पुरुष प्रेग्नेंट हो सकते हैं?’ Can Men Get Pregnant भारतीय मूल की डॉ. निशा वर्मा के जवाब ने बंद की बोलती, जानें पूरा सच!

Can Men Get Pregnant US Congress में गर्भपात (Abortion) अधिकारों पर बहस के दौरान रिपब्लिकन सीनेटर ने पूछा अजीब सवाल। जानें कौन हैं भारतीय मूल की डॉ. निशा वर्मा और ‘पुरुषों की प्रेग्नेंसी’ के पीछे का मेडिकल विज्ञान क्या कहता है।

अमेरिकी संसद में एक तीखी बहस वायरल हो रही है! जब सीनेटर ने पूछा- “क्या पुरुष भी प्रेग्नेंट हो सकते हैं?”, तो भारतीय मूल की डॉ. निशा वर्मा ने दिया ऐसा जवाब जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। क्या है पूरा मामला? लिंक पर क्लिक करके पढ़ें!

क्या पुरुष भी प्रेग्नेंट हो सकते हैं? डॉ. निशा वर्मा और अमेरिकी संसद की वो वायरल बहस

Can Men Get Pregnant

अमेरिका की संसद (सीनेट) में अक्सर गंभीर मुद्दों पर बहस होती है, लेकिन हाल ही में गर्भपात (Abortion) अधिकारों पर हुई एक सुनवाई के दौरान जो हुआ, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉली और भारतीय मूल की डॉक्टर निशा वर्मा के बीच “क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं?” को लेकर तीखी नोकझोंक हुई।

यह बहस न केवल वायरल हुई है, बल्कि इसने ‘जेंडर’, ‘बायोलॉजी’ और ‘मेडिकल केयर’ को लेकर एक नई चर्चा छेड़ दी है। आइए जानते हैं कौन हैं डॉ. निशा वर्मा और इस सवाल का वैज्ञानिक सच क्या है।

Can Men Get Pregnant
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Can Men Get Pregnant क्या था पूरा मामला?

अमेरिका में रो वी. वेड (Roe v. Wade) का फैसला पलटने के बाद गर्भपात कानूनों पर चर्चा चल रही थी। सुनवाई के दौरान, ‘फिजिशियन फॉर रिप्रोडक्टिव हेल्थ’ की फेलो डॉ. निशा वर्मा अपनी गवाही दे रही थीं। उन्होंने अपनी बात रखते हुए “गर्भधारण करने की क्षमता रखने वाले लोग” (People with capacity for pregnancy) शब्द का इस्तेमाल किया।

इस पर रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉली ने उन्हें टोकते हुए पूछा, “आप बार-बार ‘लोग’ कह रही हैं, क्या आपका मतलब महिलाओं से है?” डॉ. निशा ने जवाब दिया, “सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि ट्रांस-मेन (Trans Men) और नॉन-बाइनरी (Non-binary) लोग भी गर्भधारण कर सकते हैं।”

इसके बाद सीनेटर ने सीधा सवाल दाग दिया: “तो क्या पुरुष प्रेग्नेंट हो सकते हैं?” डॉ. निशा ने इसका जवाब वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देते हुए कहा कि इस सवाल को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं एक डॉक्टर हूं, और जीव विज्ञान (Biology) के आधार पर मैं यह कह रही हूं। जब हम यह कहते हैं कि सिर्फ महिलाएं प्रेग्नेंट होती हैं, तो हम उन ट्रांस लोगों की अस्तित्व को नकारते हैं जिन्हें स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत है।”

कौन हैं डॉ. निशा वर्मा?

Can Men Get Pregnant एक प्रमुख प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ (OB-GYN) हैं।

  • शिक्षा: उन्होंने हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से एमडी (MD) और हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ से मास्टर्स की डिग्री हासिल की है।
  • पहचान: वे वर्तमान में अमेरिका में जटिल परिवार नियोजन और प्रजनन स्वास्थ्य देखभाल (Reproductive Health Care) की विशेषज्ञ मानी जाती हैं।
  • विचार: डॉ. वर्मा का मानना है कि चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच हर इंसान का अधिकार है, चाहे उसकी लैंगिक पहचान (Gender Identity) कुछ भी हो।

क्या सच में पुरुष प्रेग्नेंट हो सकते हैं? (मेडिकल फैक्ट चेक)

इस सवाल का जवाब ‘जैविक’ (Biological) और ‘लैंगिक’ (Gender) पहचान के बीच के अंतर को समझने में है।

  1. सिसजेंडर पुरुष (Cisgender Men): वे लोग जो जैविक रूप से पुरुष पैदा हुए (XY क्रोमोसोम, पुरुष जननांग), वे गर्भधारण नहीं कर सकते। उनके पास गर्भाशय (Uterus) और अंडाशय (Ovaries) नहीं होते, जो गर्भधारण के लिए अनिवार्य हैं।
  2. ट्रांसजेंडर पुरुष (Transgender Men): ये वे लोग होते हैं जो जन्म के समय जैविक रूप से ‘लड़की’ (Female) थे और उनके पास गर्भाशय और अंडाशय होते हैं। लेकिन बाद में उन्होंने अपनी पहचान ‘पुरुष’ के रूप में बदल ली। अगर इन्होंने सर्जरी से अपना गर्भाशय नहीं हटवाया है, तो ये पुरुष गर्भधारण कर सकते हैं और बच्चे को जन्म दे सकते हैं।
  3. नॉन-बाइनरी लोग: वे लोग जो खुद को न पूरी तरह पुरुष मानते हैं न महिला, अगर उनके पास जैविक रूप से गर्भाशय है, तो वे भी प्रेग्नेंट हो सकते हैं।

डॉ. निशा वर्मा का तर्क यही था कि जब हम कहते हैं कि “सिर्फ महिलाएं प्रेग्नेंट होती हैं”, तो हम उन ‘ट्रांस पुरुषों’ को नजरअंदाज कर देते हैं जिन्हें गर्भावस्था के दौरान मेडिकल हेल्प की जरूरत होती है।

राजनीति बनाम विज्ञान

सीनेटर हॉली का सवाल राजनीति से प्रेरित था, जिसका उद्देश्य यह साबित करना था कि डेमोक्रेट्स और डॉ. वर्मा जैसे विशेषज्ञ ‘महिला’ शब्द को मिटाना चाहते हैं। वहीं, डॉ. निशा का जवाब पूरी तरह से समावेशी चिकित्सा (Inclusive Medicine) पर आधारित था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाषा का सही इस्तेमाल करना जरूरी है ताकि किसी भी मरीज के साथ भेदभाव न हो, चाहे वह महिला हो या ट्रांस पुरुष।

निष्कर्ष

यह घटना बताती है कि आज के दौर में विज्ञान और समाज कितनी तेजी से बदल रहे हैं। डॉ. निशा वर्मा ने अपनी बेबाकी से यह साबित कर दिया कि एक डॉक्टर का धर्म मरीज का इलाज करना है, चाहे वह किसी भी जेंडर का हो। यह बहस हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि चिकित्सा के क्षेत्र में शब्दों का चयन कितना मायने रखता है।



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