Penguin Awareness Day 2026: जानिए इन ‘कोट-पैंट’ वाले प्यारे पक्षियों के बारे में सब कुछ, आखिर 20 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है यह दिन?
Penguin Awareness Day 2026: 20 जनवरी को पूरी दुनिया में पेंगुइन जागरूकता दिवस मनाया जाता है। जानिए इस दिन का इतिहास, इसे किसने शुरू किया और यह किन देशों में मनाया जाता है। पेंगुइन से जुड़े रोचक तथ्य और उनके अस्तित्व पर मंडराते खतरे के बारे में विस्तार से पढ़ें।


Penguin Awareness Day 2026: एक कोशिश, इन अनोखे पक्षियों को बचाने की
हर साल 20 जनवरी को दुनिया भर में ‘पेंगुइन अवेयरनेस डे’ (Penguin Awareness Day) मनाया जाता है। साल 2026 में भी यह दिन इन काले-सफेद, बिना उड़ने वाले लेकिन बेहतरीन तैराक पक्षियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए समर्पित है। अक्सर हम पेंगुइन को कार्टून्स या फिल्मों में ‘हैप्पी फीट’ थिरकाते हुए देखते हैं, लेकिन असल जिंदगी में यह प्रजाति जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण गंभीर संकट का सामना कर रही है।

क्या है पेंगुइन अवेयरनेस डे? (What is this day?)
यह दिन मुख्य रूप से शिक्षा और जागरूकता का दिन है। इसका उद्देश्य आम लोगों को पेंगुइन के जीवन, उनके आवास (Habitats) और उनकी घटती संख्या के बारे में बताना है। यह दिन ‘विश्व पेंगुइन दिवस’ (World Penguin Day – जो 25 अप्रैल को होता है) से अलग है। 20 जनवरी का यह दिन विशेष रूप से पेंगुइन की आबादी पर नजर रखने और पर्यावरण में आ रहे बदलावों का उन पर क्या असर हो रहा है, इस पर चर्चा करने के लिए चुना गया है।

यह दिन किसने शुरू किया? (Who started this day?)
Penguin Awareness Day 2026 दिलचस्प बात यह है कि ‘पेंगुइन अवेयरनेस डे’ की शुरुआत किसने की, इसका कोई लिखित प्रमाण या किसी एक व्यक्ति/संस्था का नाम दर्ज नहीं है।
- यह एक Community-driven (समुदाय आधारित) पहल मानी जाती है।
- समय के साथ-साथ दुनिया भर के चिड़ियाघरों (Zoos), एक्वेरियम, वन्यजीव संरक्षण संस्थाओं और पर्यावरण प्रेमियों ने इस तारीख को अपना लिया।
- माना जाता है कि इसकी शुरुआत अमेरिका या यूरोप के किसी चिड़ियाघर से हुई होगी ताकि सर्दियों के मौसम में लोगों का ध्यान इन पक्षियों की ओर खींचा जा सके। आज यह एक वैश्विक अभियान बन चुका है।
अगर आप पेंगुइन (Penguin) देखना चाहते हैं, तो आप उन्हें भारत में और विदेश में कई जगहों पर देख सकते हैं।
भारत में पेंगुइन देखने के लिए मुख्य रूप से दो जगहें हैं:
- मुंबई (Mumbai):
- वीरमाता जीजाबाई भोसले उद्यान (Byculla Zoo): यह भारत का सबसे मशहूर चिड़ियाघर है जहाँ ‘हंबोल्ट पेंगुइन’ (Humboldt Penguins) रखे गए हैं। यहाँ पेंगुइन के लिए एक खास ठंडा एनक्लोजर (घर) बनाया गया है।
- अहमदाबाद (Ahmedabad):
- गुजरात साइंस सिटी (Aquatic Gallery): यहाँ की एक्वाटिक गैलरी में ‘अफ्रीकन पेंगुइन’ (African Penguins) मौजूद हैं। यहाँ आप उन्हें पानी में तैरते और खेलते हुए बहुत करीब से देख सकते हैं।
अगर आप विदेश में पेंगुइन को उनके प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) में देखना चाहते हैं, तो ये जगहें सबसे मशहूर हैं:
- अंटार्कटिका (Antarctica): यहाँ आपको ‘एम्परर पेंगुइन’ (Emperor Penguins) और बर्फ में रहने वाले अन्य पेंगुइन देखने को मिलेंगे।
- दक्षिण अफ्रीका (South Africa): केप टाउन के पास बोल्डर्स बीच (Boulders Beach) पर आप खुले समुद्र तट पर अफ्रीकन पेंगुइन को चलते हुए देख सकते हैं।
- ऑस्ट्रेलिया (Australia): मेलबर्न के पास फिलिप आइलैंड (Phillip Island) पर हर शाम ‘पेंगुइन परेड’ होती है, जहाँ छोटे पेंगुइन समुद्र से निकलकर अपने घरों की ओर जाते हैं।
- न्यूजीलैंड (New Zealand): यहाँ आपको दुनिया के सबसे छोटे पेंगुइन (Little Blue Penguins) और दुर्लभ येलो-आईड पेंगुइन (Yellow-eyed penguins) देखने को मिल सकते हैं।

यह किस देश में मनाया जाता है?
(Where is it celebrated?) यह किसी एक देश का राष्ट्रीय अवकाश नहीं है, बल्कि इसे ग्लोबल लेवल (Global Level) पर मनाया जाता है। हालाँकि, उन देशों में इसका महत्त्व ज्यादा है जो अंटार्कटिका के करीब हैं या जहाँ पेंगुइन की प्रजातियाँ पाई जाती हैं:
- न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया: यहाँ ‘लिटिल ब्लू पेंगुइन’ और अन्य प्रजातियाँ पाई जाती हैं, इसलिए यहाँ बड़े स्तर पर कार्यक्रम होते हैं।
- साउथ अफ्रीका: यहाँ के केप टाउन में ‘अफ्रीकन पेंगुइन’ पाए जाते हैं।
- चिली और अर्जेंटीना (दक्षिण अमेरिका): यहाँ भी पेंगुइन की बड़ी कॉलोनियां हैं।
- अमेरिका और यूरोप: यहाँ के बड़े-बड़े ज़ू और एक्वेरियम इस दिन बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
पेंगुइन से जुड़ी भ्रांतियां और सच्चाई
बहुत से लोग मानते हैं कि पेंगुइन सिर्फ अंटार्कटिका (बर्फ) में रहते हैं और उन्हें पोलर बियर (ध्रुवीय भालू) खा जाते हैं।
- सच्चाई 1: पेंगुइन केवल दक्षिणी गोलार्ध (Southern Hemisphere) में पाए जाते हैं, जबकि पोलर बियर उत्तरी गोलार्ध (North Pole) में। इसलिए ये कभी एक-दूसरे से नहीं मिलते।
- सच्चाई 2: सभी पेंगुइन बर्फ में नहीं रहते। गैलापागोस पेंगुइन (Galapagos Penguin) भूमध्य रेखा (Equator) के पास रहते हैं, जहाँ काफी गर्मी होती है।
क्यों खतरे में हैं पेंगुइन?
वैज्ञानिकों के अनुसार, पेंगुइन की 18 ज्ञात प्रजातियों में से 10 से अधिक प्रजातियाँ ‘खतरे’ (Endangered या Vulnerable) की सूची में हैं।
- क्लाइमेट चेंज: पृथ्वी का तापमान बढ़ने से अंटार्कटिका की बर्फ पिघल रही है, जिससे ‘एम्परर पेंगुइन’ (Emperor Penguin) के प्रजनन और रहने की जगह खत्म हो रही है।
- ओवरफिशिंग (Overfishing): समुद्र में इंसानों द्वारा बहुत ज्यादा मछलियाँ पकड़ने के कारण पेंगुइन के लिए भोजन की कमी हो गई है।
- प्रदूषण: समुद्र में प्लास्टिक और तेल का रिसाव इनकी जान ले रहा है।
निष्कर्ष ‘पेंगुइन अवेयरनेस डे 2026’ हमें यह याद दिलाने का मौका है कि हमारी छोटी-छोटी आदतें (जैसे प्लास्टिक का कम इस्तेमाल, कार्बन फुटप्रिंट घटाना) हजारों मील दूर बैठे इन बेजुबान पक्षियों की जान बचा सकती हैं। अगर हमने अभी ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ियां पेंगुइन को सिर्फ किताबों या वीडियो में ही देख पाएंगी।
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