Monday, January 19, 2026
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Magh Vinayak Chaturthi 2026 : शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व—जानें क्यों रखा जाता है यह व्रत!

Magh Vinayak Chaturthi 2026 माघ विनायक चतुर्थी 2026 में कब है? जानें भगवान गणेश को समर्पित इस पावन व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और विशेष महत्व। बाधाओं को दूर करने और सुख-समृद्धि पाने के लिए कैसे करें पूजा।

माघ विनायक चतुर्थी – विघ्नहर्ता की कृपा पाने का पावन दिन

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को ‘प्रथम पूज्य’ माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनके नाम से ही होती है। हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है। माघ मास (जनवरी-फरवरी) में आने वाली विनायक चतुर्थी का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि माघ का महीना दान-पुण्य और पवित्रता का महीना माना जाता है।

Magh Vinayak Chaturthi 2026
Magh Vinayak Chaturthi 2026

Magh Vinayak Chaturthi 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 22 जनवरी, 2026 (गुरुवार) को पड़ रही है।

  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 21 जनवरी 2026 को रात 10:15 बजे से।
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 22 जनवरी 2026 को रात 08:30 बजे तक।
  • पूजा का शुभ समय: दोपहर 11:30 से 01:45 के बीच (विनायक चतुर्थी की पूजा दोपहर के समय करना सबसे उत्तम माना जाता है)।

क्यों रखा जाता है यह व्रत?

विनायक चतुर्थी का व्रत मुख्य रूप से ‘विघ्न निवारण’ (बाधाओं को दूर करने) के लिए रखा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक बाधाएं दूर हो जाती हैं। भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और ज्ञान-बुद्धि की प्राप्ति के लिए बप्पा का उपवास रखते हैं।

Magh Vinayak Chaturthi 2026
Magh Vinayak Chaturthi 2026

विनायक चतुर्थी का महत्व (Significance)

  1. ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति: भगवान गणेश बुद्धि के देवता हैं। इस दिन व्रत रखने से छात्रों और बौद्धिक कार्य करने वालों को विशेष लाभ मिलता है।
  2. सुख-समृद्धि: माना जाता है कि माघ विनायक चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा करने से घर में रिद्धि-सिद्धि का वास होता है और दरिद्रता दूर होती है।
  3. कार्यों में सफलता: यदि आपका कोई काम लंबे समय से अटका हुआ है, तो इस दिन गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने से मार्ग की बाधाएं समाप्त होती हैं।

पूजा विधि: कैसे करें बप्पा को प्रसन्न?

  • स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें। व्रत का संकल्प लें।
  • स्थापना: दोपहर के शुभ मुहूर्त में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
  • प्रिय वस्तुएं अर्पित करें: भगवान को सिंदूर का तिलक लगाएं। उन्हें 21 दूर्वा (घास) की गांठे अर्पित करें, क्योंकि यह बप्पा को अत्यंत प्रिय है।
  • भोग: गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
  • कथा और आरती: विनायक चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें और ‘जय गणेश जय गणेश देवा’ आरती के साथ पूजा संपन्न करें।

ये त्यौहार कहाँ मनाया जाता है?

विनायक चतुर्थी किसी एक विशेष शहर या राज्य का नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत में मनाया जाने वाला त्योहार है। हालांकि, भगवान गणेश की उपासना महाराष्ट्र में सबसे भव्य रूप में की जाती है, लेकिन उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान) और दक्षिण भारत (कर्नाटक, तमिलनाडु) में भी इसे पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। विनायक चतुर्थी हर महीने आती है, इसलिए देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग अपनी क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार भगवान गणेश का पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

ध्यान दें: विनायक चतुर्थी पर रात में चंद्रमा के दर्शन वर्जित माने जाते हैं, क्योंकि ऐसा करने से ‘कलंक’ लगने का दोष होता है।



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