UGC समानता नियम 2026: कानून या केवल गाइडलाइंस? जानें क्यों सुप्रीम कोर्ट पहुंचा यह मामला और क्या है संवैधानिक विवाद (UGC Guidelines)
UGC Guidelines यूजीसी के नए समानता नियमों (2026) को लेकर देशभर में विरोध क्यों हो रहा है? जानें यूजीसी गाइडलाइंस और संसद के कानून के बीच का अंतर, और क्या यह नियम मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

यूजीसी समानता नियम 2026: कानून की कसौटी पर विवाद
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को समानता और भेदभाव विरोधी नियमों को अधिसूचित किया और 15 जनवरी से इसे प्रभावी कर दिया। हालांकि, इसे ‘कानून’ समझकर जो विरोध शुरू हुआ, उसके पीछे की कानूनी बारीकियों को समझना जरूरी है।
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गाइडलाइंस और संसद के कानून में अंतर
सबसे बड़ा भ्रम यहीं है। संसद से पारित कानून (Act) वह होता है जिसे लोकसभा और राज्यसभा में बहस के बाद पारित किया जाता है और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलती है। यह देश का ‘सर्वोच्च कानून’ होता है। दूसरी ओर, यूजीसी गाइडलाइंस या नियम ‘डेलीगेटेड लेजिस्लेशन’ (Delegated Legislation) के तहत आते हैं। यूजीसी एक्ट, 1956 की शक्तियों का उपयोग करके आयोग केवल शिक्षा के मानक तय करने के लिए नियम बना सकता है। इसे संसद में बिल के रूप में पेश नहीं किया गया, यही इसके विरोध का सबसे बड़ा कारण है।
UGC Guidelines क्या यूजीसी को दंड देने का अधिकार है?
एक गाइडलाइन और कानून में सबसे बड़ा अंतर दंड की शक्ति (Penal Powers) का होता है। संसद द्वारा बनाए गए कानून में जेल या भारी जुर्माने का प्रावधान हो सकता है। लेकिन यूजीसी के पास किसी व्यक्ति को जेल भेजने की शक्ति नहीं है। वह केवल संस्थानों की मान्यता रद्द कर सकता है या ग्रांट (अनुदान) रोक सकता है। आलोचकों का तर्क है कि बिना संसदीय मंजूरी के ऐसे नियम लागू करना, जो दंडात्मक प्रकृति के हों, असंवैधानिक है।

क्या यह मूल अधिकारों पर चोट करता है?
सुप्रीम कोर्ट में दायर पीआईएल (PIL) में मुख्य रूप से दो संवैधानिक तर्कों को उठाया गया है:
- अनुच्छेद 14 और 19: संस्थानों का तर्क है कि यूजीसी के ये नियम उनके प्रशासनिक कामकाज और स्वायत्तता (Autonomy) में हस्तक्षेप करते हैं।
- शक्ति का पृथक्करण (Separation of Powers): याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भेदभाव और समानता जैसे गंभीर सामाजिक विषयों पर नियम बनाने का अधिकार केवल विधायिका (संसद) को है, किसी वैधानिक संस्था (यूजीसी) को नहीं।
UGC Guidelines सुप्रीम कोर्ट की भूमिका क्या होगी?
मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में है। सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना होगा कि:
- क्या यूजीसी ने अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया है?
- क्या ये नियम वास्तव में भेदभाव मिटाने के लिए हैं या संस्थानों पर नियंत्रण करने का एक नया जरिया?
- क्या बिना विधायी प्रक्रिया के इसे ‘कानून’ की तरह थोपा जा सकता है?

