Panchmukhi Hanuman हनुमान जी का यह 21 दिवसीय विशेष प्रयोग: जीवन की हर बाधा होगी दूर, बरसेगी असीम कृपा!
Panchmukhi Hanuman पंचमुखी हनुमान जी की पूजा का क्या महत्व है? जानिए कैसे उनके पांच मुख जीवन की दिशाओं और बाधाओं को नियंत्रित करते हैं और तस्वीर में दिए गए विशेष 21 दिवसीय मंत्र जाप की विधि।
“क्या आप जानते हैं कि पंचमुखी हनुमान जी के हर मुख का एक विशेष अर्थ और शक्ति है? 🚩 आज ही जानिए पंचमुखी स्वरूप की महिमा और अपने जीवन में सुख-शांति लाने का वह 21 दिवसीय प्रयोग जो आपकी हर बाधा को दूर कर सकता है। जय श्री राम! जय हनुमान!
हनुमान जी की कृपा पाने का दिव्य मार्ग: 21 दिनों की विशेष साधना Panchmukhi Hanuman

कलियुग में हनुमान जी को ‘जागृत देव’ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी एक ऐसे देवता हैं जो अपने भक्तों की पुकार बहुत जल्दी सुनते हैं। यदि आपके काम बनते-बनते बिगड़ रहे हैं या जीवन में मानसिक अशांति बनी हुई है, तो आपकी इमेज में बताए गए 21 दिवसीय हनुमान प्रयोग को पूर्ण श्रद्धा के साथ करना अत्यंत फलदायी हो सकता है।
साधना की शुरुआत कैसे करें?
इस प्रयोग की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे किसी भी शनिवार से शुरू किया जा सकता है। शनिवार का दिन शनिदेव और हनुमान जी, दोनों की कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।


साधना की विधि:
- समय का चयन: यह प्रयोग प्रतिदिन संध्या समय (शाम के वक्त) करना चाहिए।
- दीपक प्रज्वलन: पूजा के स्थान पर सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं। सरसों का तेल शनि दोषों को शांत करता है और हनुमान जी को प्रिय है।
- चित्र स्थापना: अपने सामने पंचमुखी हनुमान जी की फोटो रखें। पंचमुखी स्वरूप शक्ति, सुरक्षा और दिशाओं के रक्षण का प्रतीक है।
- मंत्र जप: फोटो के सामने बैठकर नीचे दिए गए मंत्र का 108 बार (एक माला) जाप करें:
ॐ नमो हनुमंते भयभंजनाय सुख-कुरु कुरु फट स्वाहा

इस प्रयोग का प्रभाव
यह मंत्र ‘भयभंजनाय’ है, जिसका अर्थ है डरों और बाधाओं का नाश करने वाला। जब आप 21 दिनों तक निरंतर इस मंत्र का जप करते हैं, तो आपके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार होता है।
- कार्य सिद्धि: इमेज के अनुसार, इस प्रयोग को करने से आपके जीवन में सोचे हुए कार्य पूरे होने लगते हैं।
- मानसिक शांति: हनुमान जी की कृपा से चित्त शांत होता है और घर में क्लेश दूर होकर सुख-शांति का वास होता है।
- भय से मुक्ति: यदि आपको अज्ञात भय या शत्रुओं का डर सताता है, तो यह साधना आपके चारों ओर एक सुरक्षा कवच का निर्माण करती है।
नियम और सावधानी
किसी भी साधना की सफलता उसकी निरंतरता और शुद्धता में छिपी होती है। इन 21 दिनों के दौरान साधक को सात्विक भोजन करना चाहिए, ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और अपने मन में किसी के प्रति द्वेष नहीं रखना चाहिए।
भक्ति में अटूट विश्वास ही चमत्कार का आधार है। यह प्रयोग न केवल आपकी मनोकामनाएं पूरी करने में सहायक है, बल्कि यह आपको अध्यात्म के करीब भी लाता है। जैसा कि आपकी इमेज में भी कहा गया है—इस पुण्यकारी जानकारी को दूसरों के साथ साझा करना भी सेवा का एक रूप है।
Panchmukhi Hanuman जी: पांच मुखों में समाया है ब्रह्मांड का सुरक्षा कवच
सनातन धर्म में हनुमान जी को ‘अष्टसिद्धि और नवनिधि’ के दाता के रूप में पूजा जाता है। उनके कई स्वरूपों में से पंचमुखी हनुमान स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली और कल्याणकारी माना गया है। रामायण की कथाओं के अनुसार, जब पाताल लोक में अहिरावण ने भगवान राम और लक्ष्मण को बंदी बना लिया था, तब हनुमान जी ने पांच मुख धारण कर पांच दीपकों को एक साथ बुझाया था और प्रभु को मुक्त कराया था।
पंचमुखी स्वरूप के पांच मुखों का रहस्य
हनुमान जी के इस विग्रह में पांच अलग-अलग मुख होते हैं, जो दसों दिशाओं और मानवीय जीवन के विभिन्न पहलुओं की रक्षा करते हैं:
- पूर्व दिशा (हनुमान मुख): यह मुख वानर का है जो इष्ट सिद्धि प्रदान करता है और शत्रुओं पर विजय दिलाता है।
- पश्चिम दिशा (गरुड़ मुख): यह मुख पक्षीराज गरुड़ का है। यह संकटों, विष बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
- उत्तर दिशा (वराह मुख): सूअर के इस मुख की पूजा से यश, वैभव और लंबी आयु प्राप्त होती है।
- दक्षिण दिशा (नृसिंह मुख): भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार का यह मुख भय, तनाव और मानसिक पीड़ा का नाश करता है।
- आकाश की ओर (हयग्रीव मुख): घोड़े का यह मुख ज्ञान, विद्या और बुद्धि की प्राप्ति के लिए पूजा जाता है।
मान्यता है कि इस मंत्र के प्रभाव से जीवन में रुके हुए काम पूरे होने लगते हैं और हनुमान जी की कृपा से घर में सुख-शांति का वास होता है।
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