Saturday, February 14, 2026
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Chhatrapati Shivaji Maharaj 19 फरवरी 1630: कौन थे छत्रपति शिवाजी महाराज और क्यों मनाई जाती है शिवाजी जयंती?

Chhatrapati Shivaji Maharaj 19 फरवरी 1630 को छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था। जानिए उनका जीवन परिचय, उपलब्धियां और क्यों हर साल 19 फरवरी को शिवाजी जयंती मनाई जाती है।

19 फरवरी 1630: छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म और शिवाजी जयंती का ऐतिहासिक महत्व (Chhatrapati Shivaji Maharaj)

19 फरवरी 1630 को क्या हुआ था?

19 फरवरी 1630 को भारत के महान योद्धा और मराठा साम्राज्य के संस्थापक Chhatrapati Shivaji Maharaj का जन्म हुआ था। यही कारण है कि हर वर्ष 19 फरवरी को शिवाजी जयंती मनाई जाती है।

Chhatrapati Shivaji Maharaj
Chhatrapati Shivaji Maharaj

हालांकि कुछ ऐतिहासिक अभिलेखों में उनकी जन्मतिथि 6 अप्रैल 1627 भी बताई गई है, लेकिन महाराष्ट्र सरकार और आधिकारिक मान्यता के अनुसार 19 फरवरी 1630 को ही उनका जन्म माना जाता है।

कौन थे छत्रपति शिवाजी महाराज?

Chhatrapati Shivaji Maharaj मराठा साम्राज्य के संस्थापक और एक दूरदर्शी, साहसी व कुशल रणनीतिकार थे। उनका जन्म शिवनेरी किले में हुआ था। उनके पिता Shahaji Bhonsle बीजापुर सल्तनत के अधीन पुणे और सुपे के जागीरदार थे, जबकि उनकी माता Jijabai अत्यंत धार्मिक और वीरता की प्रेरणा देने वाली महिला थीं।

माता जीजाबाई ने बचपन से ही शिवाजी को रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाकर उनमें धर्म, नीति और साहस के संस्कार डाले। यही संस्कार आगे चलकर उनके जीवन की नींव बने।

शिवाजी महाराज ने अपने परिवार के साथ-साथ राज्य प्रशासन और सैन्य शक्ति को भी संतुलित रखा। उनके पुत्र संभाजी महाराज ने मुगलों के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। राजाराम महाराज ने भी मराठा साम्राज्य को आगे बढ़ाया।

छत्रपति शिवाजी महाराज की शादी और संतान

Chhatrapati Shivaji Maharaj का विवाह उस समय की परंपरा के अनुसार एक से अधिक रानियों से हुआ था। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार उनकी 8 प्रमुख पत्नियाँ थीं।

शिवाजी महाराज की प्रमुख रानियाँ: सईबाई, सोयराबाई, पुतलाबाई, सकवारबाई, काशीबाई, सगुनाबाई, लक्ष्मीबाई, गुणवंताबाई थी इनमें से सईबाई को उनकी सबसे प्रिय पत्नी माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार शिवाजी महाराज की 6 से 8 संताने थीं (अलग-अलग स्रोतों में थोड़ा अंतर मिलता है)।

Chhatrapati Shivaji Maharaj
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हिंदवी स्वराज का सपना

शिवाजी महाराज का सबसे बड़ा लक्ष्य था – “हिंदवी स्वराज” की स्थापना। उस समय भारत में मुगल और दक्कन सल्तनतों का प्रभाव था। शिवाजी ने कम उम्र में ही तोरणा किला जीतकर अपनी स्वतंत्र सत्ता की शुरुआत की।

उनकी युद्ध नीति “गनिमी कावा” यानी गुरिल्ला युद्ध प्रणाली पर आधारित थी। उन्होंने पहाड़ी इलाकों और किलों का रणनीतिक उपयोग किया।

मुगल सम्राट Aurangzeb के साथ उनका संघर्ष इतिहास में प्रसिद्ध है। उन्होंने आगरा में नजरबंदी से साहसिक तरीके से भागकर अपनी सूझबूझ का परिचय दिया।

राज्याभिषेक और मराठा साम्राज्य

6 जून 1674 को रायगढ़ किले में शिवाजी महाराज का भव्य राज्याभिषेक हुआ और वे “छत्रपति” बने। यह केवल एक राजा का राज्याभिषेक नहीं था, बल्कि भारतीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता की घोषणा थी।

उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया, आठ मंत्रियों की “अष्टप्रधान परिषद” बनाई और नौसेना का विकास किया। उस समय भारतीय शासकों में मजबूत नौसेना रखना एक बड़ी उपलब्धि थी।

19 फरवरी को क्यों मनाते हैं शिवाजी जयंती?

19 फरवरी को शिवाजी जयंती इसलिए मनाई जाती है क्योंकि यही उनकी आधिकारिक जन्मतिथि मानी जाती है। महाराष्ट्र समेत पूरे भारत में इस दिन:

  • भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं
  • किलों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं
  • स्कूलों और कॉलेजों में भाषण व सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं
  • शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जाता है

यह दिन केवल एक जन्मदिन नहीं, बल्कि साहस, राष्ट्रभक्ति और नेतृत्व की प्रेरणा का दिन है।

शिवाजी महाराज की विशेषताएं

  1. धार्मिक सहिष्णुता: उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान किया।
  2. महिला सम्मान: युद्ध के दौरान महिलाओं और बच्चों को नुकसान न पहुंचाने का आदेश दिया।
  3. कुशल प्रशासन: कर प्रणाली और न्याय व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया।
  4. रणनीतिक सोच: सीमित संसाधनों में बड़ी शक्तियों को चुनौती दी।

इतिहास में अमर नाम

शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा नहीं थे, बल्कि एक आदर्श शासक भी थे। उन्होंने अपने शासनकाल में जनता के कल्याण को प्राथमिकता दी। उनकी नीतियां आज भी नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा देती हैं। वे भारतीय इतिहास के उन नायकों में से हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी स्वतंत्रता का मार्ग चुना। 19 फरवरी 1630 का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। इस दिन जन्मे छत्रपति शिवाजी महाराज ने न केवल मराठा साम्राज्य की स्थापना की, बल्कि स्वराज और स्वाभिमान की भावना को जन-जन तक पहुंचाया।

शिवाजी जयंती हमें याद दिलाती है कि साहस, संकल्प और नेतृत्व से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।

उनका जीवन हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा है —
“स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।”



K-Pop ट्रेनी से इंटरनेशनल सॉन्गराइटर बनी EJAE की प्रेरक कहानी

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