Somnath Mandir का वह गौरवशाली इतिहास जिसे मिटाने की कोशिश महमूद गजनवी और औरंगजेब ने की, लेकिन सरदार पटेल के संकल्प ने इसे पुनर्जीवित किया।
Somnath Mandir का इतिहास केवल पत्थरों और नक्काशी की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारतीय अस्मिता के बार-बार टूटने और फिर से उठ खड़े होने की जीवंत गाथा है। इसे ‘प्रभास पाटन’ (गुजरात) में स्थित भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है।
यहाँ आपके लिए पूर्ण विवरण के साथ लेख तैयार है:
जब गजनवी ने तोड़ा था ‘प्रथम ज्योतिर्लिंग‘
Somnath Mandir: विनाश और विजय की अमर गाथा
भारतीय इतिहास में सोमनाथ मंदिर एक ऐसा नाम है जो श्रद्धा और साहस का प्रतीक है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह पर स्थित यह मंदिर सदियों से विदेशी आक्रमणकारियों के निशाने पर रहा, लेकिन इसकी नींव में दबी आस्था कभी कम नहीं हुई।

पौराणिक उत्पत्ति: सोने, चांदी और लकड़ी का मंदिर Somnath Mandir
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण स्वयं चंद्रदेव (सोम) ने किया था। कहा जाता है कि दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रमा ने यहाँ शिव की तपस्या की थी।
- सबसे पहले चंद्रदेव ने सोने का मंदिर बनाया।
- त्रेता युग में रावण ने इसे चांदी से बनवाया।
- द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने इसे चंदन की लकड़ी से तैयार किया।
- बाद में भीमदेव ने इसे पत्थरों से निर्मित करवाया।
सोमनाथ मंदिर का निर्माण किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसका प्रथम निर्माण स्वयं चंद्रदेव (सोमराज) ने करवाया था। इसके बाद, कई राजाओं और शासकों ने इसे बनवाया, जिसमें श्री कृष्ण (चंदन), रावण (चांदी), भीमदेव (पत्थर), और कुमारपाल प्रमुख हैं। वर्तमान मंदिर (सातवीं बार पुनर्निर्माण) की नींव सरदार वल्लभभाई पटेल ने रखी थी, जिसे 1951 में पूरा किया गया।

सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का इतिहास:
- प्राचीन/पौराणिक काल: मान्यता के अनुसार सोमराज (चंद्र देव) ने सोने का, रावण ने चांदी का, और श्री कृष्ण ने लकड़ी का मंदिर बनवाया।
- ऐतिहासिक काल: 7वीं सदी में मैत्रक राजाओं, 815 ईस्वी में गुर्जर-प्रतिहार राजा नागभट्ट, और 11वीं सदी में राजा भीमदेव ने पुनर्निर्माण करवाया।
- वर्तमान मंदिर: 13 नवंबर 1947 को सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसके पुनर्निर्माण का संकल्प लिया और 11 मई 1951 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्राण प्रतिष्ठा की गई है।
आक्रमणों का काला अध्याय: जब मंदिर लहूलुहान हुआ
सोमनाथ की अकूत संपत्ति और धार्मिक वैभव ने कई मुस्लिम आक्रांताओं को आकर्षित किया।
- महमूद गजनवी (1024-1025 ई.): सोमनाथ के इतिहास का सबसे भीषण हमला गजनवी ने किया। वह भारत पर अपने 16वें आक्रमण के दौरान सोमनाथ पहुँचा। कहा जाता है कि मंदिर की रक्षा के लिए 50,000 निहत्थे पुजारियों और भक्तों ने घेरा बना लिया था, लेकिन गजनवी की सेना ने सबका कत्लेआम कर दिया। उसने ज्योतिर्लिंग को तोड़ दिया और मंदिर से करीब 20 लाख दीनार की संपत्ति, सोने के दरवाजे और रत्न लूटकर ले गया।
- अलाउद्दीन खिलजी (1299 ई.): दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति उलुग खान ने गुजरात पर हमला कर मंदिर को दोबारा खंडित किया।
- औरंगजेब (1706 ई.): मुगल बादशाह औरंगजेब ने अपने शासनकाल में आदेश दिया था कि मंदिर को इस तरह तोड़ा जाए कि वहाँ दोबारा पूजा न हो सके। उसने मंदिर के स्थान पर मस्जिद बनाने की भी कोशिश की।
सरदार पटेल का संकल्प और आधुनिक पुनरुद्धार
सैकड़ों वर्षों के अपमान के बाद, भारत की आजादी के समय सोमनाथ का भाग्य बदला। 13 नवंबर 1947 को भारत के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल जूनागढ़ पहुँचे। खंडहर हो चुके सोमनाथ को देखकर उनका हृदय भर आया।
समुद्र का जल हाथ में लेकर उन्होंने संकल्प लिया: “जब तक इस मंदिर का पुनरुद्धार नहीं हो जाता, मैं चैन से नहीं बैठूँगा।”
यद्यपि उस समय के कुछ नेताओं ने इसे ‘सरकारी’ काम बनाने का विरोध किया, लेकिन महात्मा गांधी के सुझाव पर एक ट्रस्ट बनाया गया और जनता के दान से इस भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। 11 मई 1951 को भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने नए मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की।
बाण स्तंभ का रहस्य
सोमनाथ मंदिर के प्रांगण में एक ‘बाण स्तंभ’ है, जो प्राचीन भारतीय विज्ञान का प्रमाण है। इस स्तंभ पर लगे बाण का मुख दक्षिण ध्रुव (Antarctica) की ओर है। इस पर लिखा है कि उस बिंदु से लेकर दक्षिण ध्रुव तक बीच में जमीन का कोई भी टुकड़ा (टापू या पहाड़) नहीं आता। यह आज के वैज्ञानिकों के लिए भी हैरानी का विषय है कि प्राचीन काल में भारतीयों को समुद्र का इतना सटीक ज्ञान कैसे था। सोमनाथ मंदिर हमें सिखाता है कि सत्य और आस्था को कभी मिटाया नहीं जा सकता। आज यह मंदिर न केवल करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि भारत के पुनरुत्थान का सबसे बड़ा प्रतीक भी है।
Table of Contents
औरंगजेब और काशी विश्वनाथ Kashi Vishwanath History जब शिवलिंग को बचाने के लिए कूप में कूदे थे पुजारी
शोर्ट वीडियोज देखने के लिए VR लाइव से जुड़िये
हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए इस लींक पर क्लीक कीजिए VR LIVE

