Parenting in India vs USA भारत और अमेरिका में बच्चों की परवरिश में क्या अंतर है? एक अमेरिकी महिला के अनुभवों के जरिए जानिए दोनों देशों की शिक्षा, अनुशासन और पारिवारिक मूल्यों के बीच का बड़ा फर्क। भारत में दादा-दादी का प्यार और अमेरिका में आत्मनिर्भरता! बच्चों की परवरिश के दो अलग तरीके। एक अमेरिकी माँ की जुबानी सुनिए कि उसे भारत में क्या सबसे अच्छा लगा।
Parenting in India vs USA भारत बनाम अमेरिका: एक अमेरिकी माँ का बच्चों की परवरिश पर अनोखा अनुभव


अक्सर कहा जाता है कि “एक बच्चे को पालने के लिए पूरे गाँव की जरूरत होती है” (It takes a village to raise a child)। यह कहावत आज के आधुनिक युग में भले ही पश्चिम में धुंधली पड़ गई हो, लेकिन भारत में यह आज भी जीवित है। हाल ही में एक अमेरिकी महिला ने सोशल मीडिया पर भारत और अमेरिका में बच्चों की परवरिश (Parenting) के बीच के बड़े अंतर को साझा किया है, जिसने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है।
1. ‘विलेज कल्चर’ बनाम ‘आइसोलेशन’ Parenting in India vs USA
उस महिला के अनुसार, अमेरिका में पेरेंटिंग अक्सर बहुत “अकेली” (Isolating) महसूस होती है। वहां ‘न्यूक्लियर फैमिली’ का चलन है, जहाँ माता-पिता को ही सारा काम खुद करना पड़ता है—चाहे वह घर की सफाई हो, खाना बनाना हो या बच्चों की देखभाल।
इसके विपरीत, भारत में उन्होंने ‘विलेज कल्चर’ का अनुभव किया। यहाँ भले ही आप शहर में रह रहे हों, लेकिन आपके पास पड़ोसी, रिश्तेदार और अक्सर घर में मदद करने वाले लोग होते हैं। भारत में बच्चों को अकेले नहीं संभाला जाता; यहाँ दादा-दादी, नाना-नानी और बुआ-चाची का एक बड़ा नेटवर्क होता है जो बच्चे के विकास में सक्रिय भूमिका निभाता है।
2. सुरक्षा और स्वतंत्रता का नजरिया
महिला ने एक दिलचस्प बात यह कही कि अमेरिका में सुरक्षा को लेकर चिंताएं अलग हैं। वहां बच्चे घर के बाहर अकेले खेलने में डरते हैं, जबकि भारत में (विशेषकर हाउसिंग सोसायटियों में) बच्चे शाम को घंटों तक नीचे पार्क में अकेले खेलते हैं।
भारत में “सामुदायिक सुरक्षा” की एक भावना है। अगर कोई बच्चा गिर जाता है या उसे चोट लगती है, तो कोई न कोई अनजान व्यक्ति भी उसकी मदद के लिए दौड़ पड़ता है। यह सामाजिक जुड़ाव अमेरिका के कई हिस्सों में अब गायब हो चुका है।

3. अनुशासन और सम्मान Parenting in India vs USA
अमेरिकी माँ ने बताया कि भारतीय परवरिश में बड़ों के प्रति ‘सम्मान’ (Respect for Elders) की नींव बहुत गहरी है। भारत में बच्चे अपने से बड़ों के पैर छूते हैं और उन्हें ‘जी’ कहकर संबोधित करते हैं। अमेरिका में समानता पर ज्यादा जोर दिया जाता है, जहाँ बच्चे अपने माता-पिता को उनके नाम से भी पुकार सकते हैं, लेकिन भारत में मर्यादा और अनुशासन के अलग मायने हैं।
4. पढ़ाई और प्रतिस्पर्धा का दबाव
जहाँ भारतीय परवरिश के सकारात्मक पक्ष हैं, वहीं महिला ने एक चुनौती का भी जिक्र किया: शिक्षा का दबाव। भारत में बच्चों पर बचपन से ही पढ़ाई और प्रतियोगिता में अव्वल आने का भारी बोझ होता है। अमेरिका में बच्चों के खेल-कूद, रचनात्मकता और उनके व्यक्तिगत शौक (Hobbies) पर अधिक ध्यान दिया जाता है। भारत में ‘करियर’ की चिंता बहुत कम उम्र से ही शुरू हो जाती है।
5. खान-पान और जीवनशैली
एक और बड़ा अंतर भोजन की आदतों में देखा गया। भारत में ताजा बना हुआ खाना (Freshly cooked meals) जीवन का अनिवार्य हिस्सा है। महिला ने अनुभव किया कि भारतीय माता-पिता बच्चों के खाने को लेकर बहुत संवेदनशील होते हैं और उन्हें घर का बना पौष्टिक खाना देने की कोशिश करते हैं। वहीं, अमेरिका में भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण प्रोसेस्ड फूड या ‘रेडी-टू-ईट’ मील्स का चलन ज्यादा है।
6. आत्मनिर्भरता बनाम भावनात्मक जुड़ाव
अमेरिका में परवरिश का मुख्य उद्देश्य बच्चे को ‘आत्मनिर्भर’ (Independent) बनाना होता है। 18 साल की उम्र के बाद बच्चों से अपना रास्ता खुद चुनने की उम्मीद की जाती है। लेकिन भारत में, बच्चे वयस्क होने के बाद भी अपने माता-पिता के साथ रहते हैं। यहाँ भावनात्मक जुड़ाव इतना गहरा है कि माता-पिता अपने बच्चों के लिए पूरी जिंदगी निवेश करते हैं और बच्चे बुढ़ापे में माता-पिता का सहारा बनते हैं।
इस अमेरिकी महिला के अनुभव यह सिखाते हैं कि किसी भी एक संस्कृति को ‘बेहतर’ नहीं कहा जा सकता। अमेरिका हमें आजादी और आत्मनिर्भरता सिखाता है, तो भारत हमें जड़ों से जुड़े रहना और अपनों का साथ देना सिखाता है।
आज के दौर में, शायद सबसे अच्छी परवरिश वही है जो भारतीय मूल्यों (संस्कार, परिवार और प्यार) और पश्चिमी मूल्यों (स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और समानता) का मिश्रण हो। भारत का ‘विलेज कल्चर’ वाकई एक वरदान है, जिसे हमें आधुनिकता की दौड़ में खोना नहीं चाहिए।
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