Holashtak 2026 Warnings होलाष्टक 2026 की शुरुआत 23 फरवरी से हो रही है। अगले 9 दिनों तक सभी मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे। जानिए होलाष्टक क्यों लगता है और इन दिनों किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
Holashtak 2026 Warnings 23 फरवरी से शुरू हो रहा है होलाष्टक, 9 दिनों तक शुभ कार्यों पर लगेगा ब्रेक; जानें क्या करें और क्या नहीं क्या, आप भी किसी शुभ कार्य की योजना बना रहे हैं? तो ठहरिए! होलाष्टक लगने वाला है। 23 फरवरी से लेकर होलिका दहन तक के समय को ज्योतिष में शुभ नहीं माना जाता।

होलाष्टक 2026: भक्ति की शक्ति और शुभ कार्यों पर रोक का समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, होली के त्योहार से ठीक आठ दिन पहले का समय ‘होलाष्टक’ कहलाता है। साल 2026 में होलाष्टक 23 फरवरी से शुरू हो रहा है, जो होलिका दहन (3 मार्च) तक चलेगा। ज्योतिष शास्त्र और हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है।

होलाष्टक की तिथि और समय
इस वर्ष फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि यानी 23 फरवरी से होलाष्टक का प्रभाव शुरू हो जाएगा। यह 3 मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त होगा और अगले दिन 4 मार्च को धुलेंडी (रंग वाली होली) मनाई जाएगी। इस बार ग्रहों की गणना के अनुसार यह अवधि लगभग 9 दिनों की हो रही है।

क्यों माना जाता है इसे अशुभ?
होलाष्टक के पीछे पौराणिक और ज्योतिषीय दोनों कारण हैं:
- भक्त प्रह्लाद की कथा: पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति छोड़ने के लिए इन आठ दिनों में कठोर यातनाएं दी थीं। अंतिम दिन (पूर्णिमा) प्रह्लाद को जलाने की कोशिश की गई, लेकिन वह बच गए। इन कष्टकारी दिनों की याद में शुभ कार्य नहीं किए जाते।
- ग्रहों का उग्र स्वभाव: ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, होलाष्टक के दौरान चंद्रमा, सूर्य, शनि, शुक्र, गुरु, बुध, मंगल और राहु जैसे ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं। ग्रहों की इस स्थिति के कारण व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक शांति प्रभावित हो सकती है।

क्या न करें (वर्जित कार्य)
- विवाह संस्कार: इन दिनों में शादी-ब्याह पूरी तरह वर्जित होते हैं।
- गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश या घर की नींव रखना अशुभ माना जाता है।
- नया व्यापार: किसी भी नए व्यवसाय या दुकान की शुरुआत इन दिनों में न करें।
- नामकरण और मुंडन: बच्चों के मुंडन या नामकरण संस्कार भी इस अवधि में नहीं किए जाते।
- बड़ी खरीदारी: नया वाहन, जमीन या कीमती आभूषण खरीदने से भी बचना चाहिए।
क्या करें (साधना का समय)
भले ही होलाष्टक मांगलिक कार्यों के लिए शुभ न हो, लेकिन यह भक्ति, मंत्र साधना और दान के लिए उत्तम माना जाता है।
- भगवान विष्णु और शिव की आराधना करें।
- महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना आरोग्य प्रदान करता है।
- जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र का दान करें।
- होली के रंगों की तैयारी करें और सकारात्मक विचार रखें।
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