Surya Grahan सूर्य ग्रहण के दौरान भोजन में तुलसी का पत्ता और घर में गंगाजल का छिड़काव क्यों किया जाता है? जानें इसके पीछे का वैज्ञानिक और धार्मिक आधार, साथ ही ग्रहण के बाद शुद्धि का सही तरीका।
Surya Grahan आस्था और विज्ञान का मेल
सूर्य ग्रहण एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसे भारतीय संस्कृति में केवल ग्रहों की चाल नहीं, बल्कि ऊर्जा के बड़े बदलाव के रूप में देखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के समय प्रकृति में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। यही कारण है कि सदियों से हमारे घरों में बुजुर्ग ग्रहण के समय भोजन में तुलसी के पत्ते डालने और ग्रहण के बाद गंगाजल से शुद्धि करने की सलाह देते हैं।

आज के इस लेख में हम जानेंगे कि इन परंपराओं के पीछे का असली कारण क्या है और आप अपने घर को ग्रहण के दोषों से कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।
सूतक काल शुरू होने से पहले जरूर कर लें ये काम! तुलसी और गंगाजल के बिना अधूरी है ग्रहण की सावधानी
भोजन में तुलसी ही क्यों?
धार्मिक मान्यताओं में तुलसी को ‘विष्णुप्रिया’ और अत्यंत पवित्र माना गया है। लेकिन इसके पीछे एक गहरा वैज्ञानिक तर्क भी है:

- एंटी-बैक्टीरियल गुण: ग्रहण के दौरान वातावरण में पराबैंगनी किरणों (UV Rays) का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे सूक्ष्म जीव और बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं। तुलसी में प्रचुर मात्रा में पारा (Mercury) और एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं, जो भोजन को दूषित होने से बचाते हैं।
- प्राकृतिक फिल्टर: तुलसी का पत्ता विद्युत चुंबकीय विकिरण (Electromagnetic Radiation) को सोखने की क्षमता रखता है। जब हम इसे दूध, दही या पके हुए भोजन में डालते हैं, तो यह एक रक्षा कवच की तरह काम करता है।
सावधान: ध्यान रहे कि तुलसी के पत्ते ग्रहण शुरू होने से पहले ही तोड़ लेने चाहिए। ग्रहण काल के दौरान तुलसी के पौधे को छूना वर्जित माना जाता है।


गंगाजल: नकारात्मक ऊर्जा का संहारक
गंगाजल को हिंदू धर्म में ‘अमृत’ तुल्य माना गया है। ग्रहण की समाप्ति के बाद गंगाजल का उपयोग शुद्धि के लिए अनिवार्य है:
- सूतक का प्रभाव कम करना: ग्रहण के कारण घर के वातावरण में जो ‘सूतक’ या अशुद्धि आती है, गंगाजल का छिड़काव उसे समाप्त कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
- स्वयं की शुद्धि: ग्रहण खत्म होते ही सबसे पहले स्नान के पानी में कुछ बूंदें गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए। इससे तन और मन दोनों की शुद्धि होती है।

घर और भोजन की शुद्धि का सही तरीका
यदि आप चाहते हैं कि ग्रहण का कोई भी दुष्प्रभाव आपके परिवार पर न पड़े, तो इन चरणों का पालन करें:
ग्रहण से पहले:
- सभी खाने-पीने की चीजों (विशेषकर तरल पदार्थ जैसे दूध, पानी, घी) में तुलसी के पत्ते या कुशा (घास) डाल दें।
- घर के मंदिर के पट बंद कर दें या भगवान की मूर्तियों को पर्दे से ढक दें।
ग्रहण के दौरान:
- इस समय कुछ भी पकाने या खाने से बचें।
- धार्मिक मंत्रों (जैसे महामृत्युंजय मंत्र) का मानसिक जाप करें, जिससे घर का सुरक्षा चक्र मजबूत होता है।
ग्रहण के बाद (सबसे महत्वपूर्ण):
- स्नान: ग्रहण समाप्त होते ही स्नान करें।
- गंगाजल का छिड़काव: पूरे घर में, विशेषकर रसोई और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें।
- ताजा भोजन: ग्रहण से पहले का बना हुआ भोजन (यदि उसमें तुलसी न हो) त्याग देना चाहिए। ग्रहण के बाद ताजा भोजन बनाएं और उसे भगवान को भोग लगाकर ही ग्रहण करें।
- मूर्तियों का अभिषेक: भगवान की मूर्तियों को भी गंगाजल से स्नान कराएं और शुद्ध वस्त्र पहनाएं।
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