भारत की पहली फूड एलर्जी गाइडलाइंस बच्चों को जल्दी खिलाएं मूंगफली, जानें एलर्जी और इनटॉलेरेंस में अंतर | Food Allergy India
भारत ने जारी किए फूड एलर्जी के पहले नियम। विशेषज्ञों का सुझाव—बच्चों को कम उम्र में ही मूंगफली जैसे खाद्य पदार्थ दें। जानें एलर्जी और फूड इनटॉलेरेंस के बीच का महत्वपूर्ण अंतर। | Food Allergy India
भारत के पहले फूड एलर्जी नियम Food Allergy India
बदलता खान-पान और बढ़ती चुनौतियाँ आधुनिक जीवनशैली और बदलते खान-पान के कारण भारत में बच्चों और वयस्कों में खाद्य एलर्जी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी गंभीरता को देखते हुए, भारतीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों और संस्थाओं ने देश की पहली ‘फूड एलर्जी गाइडलाइंस’ Food Allergy India जारी की है। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य माता-पिता, डॉक्टरों और आम जनता को एलर्जी के प्रति जागरूक करना और इसके गंभीर परिणामों (जैसे एनाफिलेक्सिस) से बचाना है।
1. मूंगफली का जल्दी परिचय (Early Introduction of Peanuts)
नए नियमों में सबसे चौंकाने वाली और महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों को कम उम्र में ही मूंगफली जैसे ‘एलर्जिक’ खाद्य पदार्थों से परिचित कराया जाना चाहिए। पहले यह माना जाता था कि बच्चों को 2-3 साल तक मूंगफली नहीं देनी चाहिए, लेकिन नए शोध और भारतीय गाइडलाइंस के अनुसार:
- यदि बच्चे को गंभीर एक्जिमा या अंडे से एलर्जी नहीं है, तो 6 महीने की उम्र के बाद उसे ठोस आहार के रूप में मूंगफली का पाउडर या मक्खन (Butter) दिया जा सकता है।
- जल्दी शुरुआत करने से शरीर का इम्यून सिस्टम उस खाद्य पदार्थ के प्रति सहनशीलता (Tolerance) विकसित कर लेता है, जिससे भविष्य में एलर्जी का खतरा 80% तक कम हो जाता है।

2. एलर्जी (Allergy) बनाम इनटॉलेरेंस (Intolerance):
Food Allergy India अंतर समझना जरूरी अक्सर लोग दूध पीने के बाद पेट खराब होने को ‘एलर्जी’ मान लेते हैं, जबकि वह ‘इनटॉलेरेंस’ हो सकता है। गाइडलाइंस में इसे स्पष्ट किया गया है:
- फूड एलर्जी: यह सीधे हमारे इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) से जुड़ी होती है। इसमें शरीर भोजन के प्रोटीन को ‘दुश्मन’ मान लेता है। इसके लक्षण गंभीर हो सकते हैं, जैसे सांस लेने में तकलीफ, चेहरे पर सूजन, या रक्तचाप गिरना। यह जानलेवा हो सकती है।
- फूड इनटॉलेरेंस (असहिष्णुता): यह मुख्य रूप से पाचन तंत्र की समस्या है। जैसे ‘लैक्टोज इनटॉलेरेंस’ में शरीर दूध की चीनी को पचा नहीं पाता। इसके लक्षणों में गैस, पेट दर्द या दस्त शामिल हैं, जो असुविधाजनक तो हैं लेकिन आमतौर पर जानलेवा नहीं होते।
3. लेबलिंग और स्कूलों की भूमिका
इन नियमों के तहत अब डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों पर ‘एलर्जेन लेबलिंग’ को अधिक सख्त बनाने पर जोर दिया गया है। साथ ही, स्कूलों के लिए भी निर्देश हैं कि वे कैंटीन में एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों का ध्यान रखें और आपातकालीन स्थिति के लिए ‘एपिनेफ्रीन (Epinephrine) ऑटो-इंजेक्टर’ उपलब्ध रखें।
4. निदान और उपचार (Diagnosis & Treatment)
गाइडलाइंस में सलाह दी गई है कि बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह बंद न करें। ‘स्किन प्रिक टेस्ट’ या ब्लड टेस्ट के जरिए सही एलर्जी की पहचान करें। भारत में दूध, अंडा, मूंगफली, सोया, गेहूं, मछली और ट्री नट्स सबसे आम एलर्जेन पाए गए हैं।
5. भारत में सबसे आम फूड एलर्जी
भारतीय संदर्भ में जिन खाद्यों से सबसे ज्यादा एलर्जी देखी गई है, उनमें शामिल हैं:
- दूध (Milk)
- अंडा (Egg)
- मूंगफली (Peanut)
- गेहूं (Wheat/Gluten)
- समुद्री भोजन (Seafood/Fish)
- सोया (Soy)
भारत की ये पहली फूड एलर्जी गाइडलाइंस न केवल डॉक्टरों के लिए, बल्कि आम जनता के लिए भी एक मार्गदर्शिका हैं। भोजन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को समझना और समय रहते बच्चों के आहार में सही बदलाव करना एक स्वस्थ भविष्य की नींव रखेगा। अब ‘हारे का सहारा’ केवल चिकित्सा ही नहीं, बल्कि सही जानकारी भी है।
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