बंगाल का ‘किंग’ कौन? West Bengal CM Selection अमित शाह करेंगे सीएम का फैसला, असम की कमान जेपी नड्डा के हाथ!
West Bengal CM Selection पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव 2026 में जीत के बाद बीजेपी ने पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। अमित शाह और मोहन चरण माझी बंगाल में सीएम का चेहरा तय करेंगे, जबकि जेपी नड्डा असम में विधायक दल के नेता का चुनाव करेंगे।
West Bengal CM Selection पश्चिम बंगाल और असम में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद अब सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। पार्टी आलाकमान ने मुख्यमंत्रियों के चयन के लिए कद्दावर नेताओं को मोर्चे पर तैनात किया है।
बंगाल और असम में भगवा लहराने के बाद अब बारी है ‘राजतिलक’ की! 🚩 अमित शाह और जेपी नड्डा को अहम राज्यों का पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। जल्द होगा नए मुख्यमंत्रियों के नामों का ऐलान।
बंगाल और असम में भाजपा का ‘मिशन सरकार’: अमित शाह और जेपी नड्डा संभालेंगे कमान
West Bengal CM Selection 4 मई 2026 को आए चुनावी नतीजों ने भारतीय राजनीति की तस्वीर बदल दी है। पश्चिम बंगाल के अभेद्य किले को ढहाने और असम में अपनी सत्ता बरकरार रखने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने सबसे बड़ा सवाल है—मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा? इस महत्वपूर्ण निर्णय को लोकतांत्रिक और सुचारू रूप से संपन्न करने के लिए भाजपा संसदीय बोर्ड ने कद्दावर नेताओं को केंद्रीय पर्यवेक्षक (Central Observers) नियुक्त किया है।

बंगाल का सीएम चुनने की जिम्मेदारी ‘चाणक्य’ के पास
पश्चिम बंगाल, जहाँ भाजपा ने ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को उखाड़ फेंका है, वहां मुख्यमंत्री का चयन एक बेहद संवेदनशील और रणनीतिक मामला है। पार्टी ने इसके लिए अपने सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मुख्य पर्यवेक्षक बनाया है।
अमित शाह के साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को सह-पर्यवेक्षक (Co-observer) की जिम्मेदारी दी गई है। यह नियुक्ति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ओडिशा में भाजपा की सफलता के पीछे माझी एक बड़ा चेहरा रहे हैं और उनके अनुभव का लाभ बंगाल के नए नेतृत्व को चुनने में लिया जाएगा। ये दोनों नेता कोलकाता जाकर नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक करेंगे और विधायक दल के नेता का चुनाव करेंगे।

असम में जेपी नड्डा करेंगे नेतृत्व का फैसला
वहीं दूसरी ओर, असम में जहां भाजपा ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है, वहां की कमान केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा को सौंपी गई है। नड्डा के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। असम में पार्टी को मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत मिला है, लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नए विधायक दल के नेता का चयन पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में ही होगा।


पर्यवेक्षकों की भूमिका क्यों है अहम?
भाजपा में मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया काफी संगठित होती है। पर्यवेक्षकों का मुख्य कार्य निम्नलिखित होता है:
- विधायकों की राय जानना: पर्यवेक्षक व्यक्तिगत रूप से और सामूहिक रूप से नए विधायकों से बात करते हैं ताकि यह समझा जा सके कि स्थानीय स्तर पर सबसे लोकप्रिय चेहरा कौन है।
- गुटबाजी रोकना: बंगाल जैसे बड़े राज्य में, जहां कई कद्दावर नेता (जैसे शुभेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार और दिलीप घोष) सक्रिय हैं, वहां किसी एक नाम पर आम सहमति बनाना और आपसी कलह को रोकना अमित शाह की प्राथमिकता होगी।
- हाईकमान को रिपोर्ट सौंपना: विधायकों की राय लेने के बाद ये पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट पीएम मोदी और संसदीय बोर्ड को सौंपेंगे, जिसके बाद नाम की आधिकारिक घोषणा होगी।

बंगाल में सीएम पद के दावेदार
West Bengal CM Selection राजनीतिक गलियारों में बंगाल के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही हैं। सबसे पहला और मजबूत नाम शुभेंदु अधिकारी का है, जिन्होंने न केवल भवानीपुर में ममता बनर्जी को मात दी, बल्कि पूरे राज्य में पार्टी के अभियान का नेतृत्व किया। हालांकि, पार्टी किसी चौंकाने वाले चेहरे या किसी महिला नेतृत्व को भी सामने ला सकती है ताकि 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए एक नया समीकरण तैयार किया जा सके।
शपथ ग्रहण की तैयारी: रबींद्रनाथ टैगोर की जयंती का संयोग
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार 9 मई 2026 को शपथ ले सकती है। यह दिन विशेष है क्योंकि इसी दिन गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर की जयंती है। भाजपा इस दिन को चुनकर बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और ‘सोनार बांग्ला’ के अपने विजन को एक साथ जोड़ना चाहती है। राजभवन में होने वाले इस ऐतिहासिक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हो सकते हैं।
अमित शाह और जेपी नड्डा की नियुक्ति यह दर्शाती है कि भाजपा नेतृत्व इन दोनों राज्यों को कितनी गंभीरता से ले रहा है। बंगाल में ‘परिवर्तन’ के बाद एक स्थिर और मजबूत नेतृत्व देना भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती है। अगले 48 घंटों में दिल्ली से कोलकाता और गुवाहाटी तक बैठकों का दौर चलेगा, जिसके बाद भारत को दो महत्वपूर्ण राज्यों के नए कप्तानों के नाम मिल जाएंगे।
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Modi Conquers Bengal बंगाल में भगवा क्रांति मोदी की ‘अजेय’ रणनीति ने ढहाया ममता का दुर्ग!
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