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Mangalsutra : कश्मीर से कन्याकुमारी तक, जानिए भारत के अलग-अलग राज्यों के अनोखे ‘मंगलसूत्र’ और उनके नाम

Mangalsutra : कश्मीर से कन्याकुमारी तक, जानिए भारत के अलग-अलग राज्यों के अनोखे ‘मंगलसूत्र’ और उनके नाम

Mangalsutra : भारत के अलग-अलग राज्यों और संस्कृतियों में मंगलसूत्र के अनोखे रूप देखने को मिलते हैं। महाराष्ट्र के ‘वटी’, दक्षिण भारत के ‘थाली/मांगल्यम’ से लेकर कश्मीर के ‘देहजूर’ तक, जानिए भारतीय राज्यों के पारंपरिक मंगलसूत्रों का महत्व और इतिहास।

भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग रूपों में पहना जाता है मंगलसूत्र

हमारा भारत देश अपनी 'विविधता में एकता' के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहाँ हर कुछ किलोमीटर पर भाषा, खान-पान और पहनावा बदल जाता है। शादी-ब्याह की रस्में भी हर राज्य में अपनी एक अनोखी सांस्कृतिक पहचान रखती हैं। हिंदू विवाह परंपरा में 'मंगलसूत्र' (Mangalsutra) को केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि वैवाहिक जीवन का सबसे पवित्र प्रतीक माना गया है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि जैसे हमारे देश में अलग-अलग भाषाएं हैं, वैसे ही भारत के अलग-अलग राज्यों में मंगलसूत्र का रूप, नाम और उसे पहनने का तरीका भी पूरी तरह बदल जाता है? कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, आइए जानते हैं भारत के विभिन्न राज्यों के इन खूबसूरत और अनोखे मंगलसूत्रों के बारे में।
Mangalsutra
Mangalsutra

एक सूत्र, अनेक रूप: भारत के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक मंगलसूत्र और उनका सांस्कृतिक महत्व

भारतीय संस्कृति में विवाह को दो आत्माओं का पवित्र मिलन माना गया है। इस मिलन के प्रतीक के रूप में उत्तर भारत में जहां काले मोतियों और सोने के पेंडेंट वाले मंगलसूत्र का चलन सबसे ज्यादा है, वहीं देश के अन्य हिस्सों में इसके कई दिलचस्प, अनोखे और बेहद खूबसूरत रूप देखने को मिलते हैं। ‘मंगलसूत्र’ का शाब्दिक अर्थ है—’मंगल’ यानी पवित्र और ‘सूत्र’ यानी धागा। आइए भारत की सांस्कृतिक यात्रा पर चलते हैं और जानते हैं कि अलग-अलग राज्यों में यह पवित्र धागा किस रूप में नजर आता है।

भारत की विविधता ही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है! हमारे देश में जितने राज्य हैं, उतनी ही अनोखी शादी की परंपराएं हैं। क्या आप जानते हैं कि उत्तर भारत का मंगलसूत्र, दक्षिण भारत की 'थाली' और कश्मीर के 'देहजूर' से कितना अलग है?

1. कश्मीर का ‘देहजूर’ (Dehjoor – Kashmir)

कश्मीर में शादीशुदा हिंदू (कश्मीरी पंडित) महिलाएं जो मंगलसूत्र पहनती हैं, उसे ‘देहजूर’ (Dehjoor) कहा जाता है। यह दिखने में सामान्य मंगलसूत्र जैसा बिल्कुल नहीं होता।

  • बनावट और पहनने का तरीका: यह सोने का एक छोटा पेंडेंट या आभूषण होता है, जिसे एक पवित्र लाल धागे (जिसे ‘अथ’ कहा जाता है) के सहारे कान के ऊपरी हिस्से (Cartilage) में छेद करके लटकाया जाता है।
  • महत्व: शादी के बाद महिला के ससुराल जाने पर इस लाल धागे को सोने की चेन (अथूर) से बदल दिया जाता है। यह दुल्हन के आध्यात्मिक और वैवाहिक जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।

2. महाराष्ट्र की ‘वटी’ (Wati Mangalsutra – Maharashtra) Mangalsutra

महाराष्ट्र और गोवा में मंगलसूत्र को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है। यहाँ का पारंपरिक मंगलसूत्र ‘वटी’ (Wati) कहलाता है।

  • बनावट: इसमें सोने की दो गोल कटोरी जैसी संरचनाएं (काले और सोने के मोतियों की दो लाइनों के बीच) पेंडेंट के रूप में जुड़ी होती हैं।
  • महत्व: ये दोनों ‘वटियां’ (कटोरियां) क्रमशः दुल्हन के मायके और ससुराल के पक्षों का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसके अलावा इन्हें शिव और शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है, जो जीवन में संतुलन बनाए रखते हैं।

3. दक्षिण भारत (तमिलनाडु और केरल) का ‘थाली’ या ‘तिरुमांगल्यम’ (Thaali / Thirumangalyam)

दक्षिण भारत में मंगलसूत्र को ‘थाली’ या ‘मांगल्यम’ कहा जाता है। यहाँ विवाह की सबसे मुख्य रस्म को ‘थाली कट्टू’ (थाली बांधना) कहते हैं।

  • बनावट: पारंपरिक रूप से इसे पीले धागे (जो हल्दी से रंगा होता है) में पिरोकर बांधा जाता है। इस धागे के बीच में एक सोने का पेंडेंट होता है, जिस पर अलग-अलग समुदायों के हिसाब से भगवान शिव के चिन्ह (त्रिशूल), विष्णु के चिन्ह (शंख या चक्र) या देवी मीनाक्षी की आकृति बनी होती है।
  • बदलाव: केरल में ईसाई समुदाय की महिलाएं भी इसे पहनती हैं, जिसे ‘मिन्नू’ (Minnu) कहा जाता है। मिन्नू पर सोने से बना एक क्रॉस (Cross) का चिन्ह होता है, जो सात धागों से पिरोया जाता है।

4. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का ‘पुस्तलू’ (Pustelu / Ramar Thaali)

आंध्र प्रदेश में शादी के इस पवित्र आभूषण को ‘पुस्तलू’ या ‘रामर थाली’ के नाम से जाना जाता है।

  • बनावट: इसमें सोने के दो गोल सिक्के जैसी डिस्क (Discs) या कप होते हैं। विवाह के समय दूल्हा इन दोनों सिक्कों को अलग-अलग धागों में दुल्हन के गले में बांधता है।
  • अनोखी रस्म: शादी के कुछ समय बाद या एक विशेष शुभ दिन पर, इन दोनों सोने के सिक्कों को एक ही धागे या सोने की चेन में पिरो दिया जाता है। यह रस्म दर्शाती है कि अब दोनों परिवार और पति-पत्नी पूरी तरह से एक हो चुके हैं।

5. कर्नाटक का ‘कार्ती मणि’ (Karthamani Pathak – Coorg)

कर्नाटक के कूर्ग (Coorg) या कोडागु क्षेत्र में रहने वाले कोडावा समुदाय की महिलाओं का मंगलसूत्र बेहद अनूठा होता है। इसे ‘कार्ती मणि पाठक’ कहा जाता है।

  • बनावट: ‘कार्ती मणि’ काले मोतियों से बनी एक चेन होती है जिसे सोने के तार में पिरोया जाता है। इसके साथ जो पेंडेंट होता है, उसे ‘पाठक’ (Pathak) कहते हैं। इस पेंडेंट के बीच में एक बड़ा सिक्का होता है जिसके चारों ओर छोटे-छोटे रूबी (लाल रत्न) जड़े होते हैं और इसके ऊपर एक नाचते हुए मोर या नाग (Cobra) की आकृति बनी होती है।

6. गुजरात का ‘तणमनिया’ (Tanmaniya – Gujarat)

गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में पारंपरिक रूप से काले मोतियों की माला के साथ एक भारी सोने का पेंडेंट पहना जाता है, जिसे ‘तणमनिया’ (Tanmaniya) कहते हैं।

  • बनावट: इसमें सोने के पेंडेंट पर बहुत ही खूबसूरत और बारीक नक्काशी या कुंदन-मीनाकारी का काम होता है। हालांकि, आधुनिक समय में गुजराती महिलाएं अब हीरे (Diamond) से बने हल्के पेंडेंट वाले मंगलसूत्र भी खूब पसंद करती हैं।

7. बिहार और झारखंड का ‘तागापाग’ या ‘ढोलना’ (Dholna)

बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में मंगलसूत्र के साथ-साथ ‘बिछिया’ (Toe Ring) और ‘सिंदूर’ को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। लेकिन पारंपरिक गहनों में यहाँ ‘ढोलना’ (Dholna) का चलन है।

  • बनावट: इसका पेंडेंट ढोलक (एक वाद्य यंत्र) के आकार का होता है, जो पूरी तरह सोने से बना होता है। इसे काले और सोने के मोतियों की माला में पिरोया जाता है। इसे बेहद शुभ और वैवाहिक सुख को बढ़ाने वाला माना जाता है।

एक देश, अनेक परंपराएं!

बदलते दौर में आधुनिकता और परंपरा का संगम

आज के आधुनिक दौर में भले ही कामकाजी महिलाएं भारी-भरकम पारंपरिक मंगलसूत्र रोज नहीं पहन पातीं, लेकिन इसकी जगह ‘ब्रेसलेट मंगलसूत्र’ (Wrist Mangalsutra), ‘फिंगर रिंग मंगलसूत्र’ और हल्के डायमंड पेंडेंट वाले डिजाइनों ने ले ली है। इसके बावजूद, शादी के मुख्य दिन आज भी हर दुल्हन अपने राज्य और संस्कृति के पारंपरिक मंगलसूत्र को ही पहनना गर्व की बात मानती है।

अलग-अलग राज्यों के ये अलग-अलग मंगलसूत्र यह साबित करते हैं कि रूप भले ही अनेक हों, लेकिन उनके पीछे की भावना, प्रार्थना और पति-पत्नी का अटूट प्रेम पूरे भारत में एक समान है।


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