नीतीश कुमार के कुर्ते पर कभी दाग नहीं लगा’: अमित शाह ने की बिहार CM की जमकर तारीफ, विपक्षी खेमे में खलबली Amit shah nitish kumar
Amit shah nitish kumar गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ईमानदारी और बेदाग राजनीतिक करियर की सराहना की। जानें अमित शाह ने नीतीश कुमार के बारे में और क्या-क्या कहा और इसके राजनीतिक मायने क्या हैं।
‘बेदाग छवि के धनी’: अमित शाह ने नीतीश कुमार को बताया भ्रष्टाचार का काल
बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर हमेशा चलता रहता है, लेकिन जब देश के गृह मंत्री अमित शाह किसी विपक्षी नेता (जो अब सहयोगी हैं) की तारीफों के पुल बांधते हैं, तो उसके मायने गहरे होते हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दशकों लंबे राजनीतिक सफर पर टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘बेदाग’ करार दिया।

“कुर्ते पर दाग नहीं” – शाह के बयान के मायने
Amit shah nitish kumar अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा, “नीतीश बाबू ने इतने सालों तक बिहार का शासन चलाया, केंद्र में मंत्री रहे, लेकिन आज भी उनके कुर्ते पर भ्रष्टाचार का एक भी दाग नहीं लगा है।” इस एक वाक्य ने बिहार की सियासत में कई निशाने साधे:
- भ्रष्टाचार पर चोट: शाह ने अप्रत्यक्ष रूप से आरजेडी (RJD) और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधा, जिनके कई नेता अदालती मामलों और जांच के घेरे में हैं।
- नीतीश की स्वीकार्यता: बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि वह नीतीश कुमार के नेतृत्व और उनकी ईमानदारी का पूरा सम्मान करती है।
- NDA की मजबूती: सीट बंटवारे और आगामी चुनावों से पहले नीतीश को ‘क्लीन चिट’ देना गठबंधन के भीतर अविश्वास की खबरों को खत्म करने का प्रयास है।


अमित शाह की स्पीच की बड़ी बातें amit shah nitish kumar
अमित शाह ने सिर्फ ईमानदारी ही नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के प्रशासन के अन्य पहलुओं की भी सराहना की:
- विकास का मॉडल: शाह ने कहा कि बिहार को लालटेन युग (अंधेरे और पिछड़ेपन) से निकालकर एलईडी युग (विकास और बिजली) तक लाने का श्रेय नीतीश कुमार की मेहनत को जाता है।
- पिछड़ों और अति-पिछड़ों की आवाज: उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने हमेशा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की चिंता की है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘अंत्योदय’ से मेल खाता है।
- साफ नीयत: शाह के अनुसार, राजनीति में कई लोग आते हैं और सत्ता पाकर बदल जाते हैं, लेकिन नीतीश कुमार ने अपनी सादगी और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और सियासी गर्माहट
अमित शाह के इस बयान के बाद विपक्षी खेमे, विशेषकर तेजस्वी यादव की अगुवाई वाली आरजेडी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष का कहना है कि यह “सुविधा की राजनीति” है। जब नीतीश कुमार महागठबंधन में थे, तब बीजेपी उन पर ‘पलटू राम’ होने का आरोप लगाती थी, और अब जब वह एनडीए में हैं, तो उनका कुर्ता अचानक साफ हो गया है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमित शाह का यह बयान केवल तारीफ नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। बिहार में जेडीयू के कोर वोट बैंक (लव-कुश समीकरण और अति-पिछड़ा वर्ग) को साधे रखने के लिए नीतीश कुमार की छवि को चमकाना बीजेपी की मजबूरी भी है और रणनीति भी।
नीतीश और शाह: बदलते रिश्तों की कहानी
एक समय था जब अमित शाह ने बिहार की रैलियों में कहा था कि “नीतीश कुमार के लिए बीजेपी के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए हैं।” लेकिन राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन या दोस्त नहीं होता। आज वही अमित शाह, नीतीश कुमार को सुशासन का प्रतीक बता रहे हैं। यह बदलाव इस बात का गवाह है कि 2024 के बाद की राजनीति में बिहार कितना महत्वपूर्ण है।
“नीतीश कुमार की सबसे बड़ी ताकत उनकी ‘क्रेडिबिलिटी’ रही है। जब बीजेपी जैसा बड़ा दल इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करता है, तो इसका लाभ सीधे तौर पर आगामी चुनावों में एनडीए को मिलना तय है।”
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