Ash Wednesday से लेंट की शुरुआत: जानें कौन-सा धर्म मनाता है, क्या छोड़ते हैं लोग और कैसे हुई इसकी शुरुआत
Ash Wednesday से 40 दिन के लेंट काल की शुरुआत होती है। जानिए यह किस धर्म का पर्व है, लोग लेंट में क्या छोड़ते हैं, माथे पर राख लगाने की परंपरा क्यों है और इसकी ऐतिहासिक शुरुआत कैसे हुई।
✝️ ऐश वेडनेसडे से लेंट की शुरुआत: जानें कौन-सा धर्म मनाता है, क्या छोड़ते हैं लोग और कैसे हुई इसकी शुरुआत
आज से दुनिया भर में लाखों ईसाई समुदाय के लोग ऐश वेडनेसडे (Ash Wednesday) मना रहे हैं। यह दिन 40 दिनों के पवित्र काल Lent की शुरुआत का प्रतीक है। लेंट का समय आत्मचिंतन, उपवास, प्रार्थना और त्याग का काल माना जाता है।
यह पर्व मुख्य रूप से Christianity धर्म के अनुयायियों द्वारा मनाया जाता है, खासकर कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट और एंग्लिकन चर्च में इसका विशेष महत्व है।

क्या है ऐश वेडनेसडे?
Ash Wednesday ईस्टर से लगभग 46 दिन पहले पड़ता है और इसी दिन से लेंट की शुरुआत होती है। इस दिन चर्च में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती हैं।
सबसे खास परंपरा है—माथे पर राख (Ash) से क्रॉस का चिन्ह बनाना। यह राख पिछले वर्ष के Palm Sunday के दौरान उपयोग की गई खजूर की पत्तियों को जलाकर तैयार की जाती है।
राख का यह चिन्ह विनम्रता, पश्चाताप और जीवन की नश्वरता का प्रतीक है। बाइबिल के अनुसार, मनुष्य मिट्टी से बना है और अंततः मिट्टी में ही मिल जाता है—यह संदेश ऐश वेडनेसडे पर दिया जाता है।
लेंट क्या है और क्यों मनाया जाता है?
लेंट 40 दिनों की अवधि है (रविवार को छोड़कर), जो Easter से पहले आती है। ईस्टर, ईसा मसीह के पुनरुत्थान (Resurrection) का पर्व है।

Ash Wednesday मान्यता है कि प्रभु Jesus Christ ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत से पहले 40 दिन और 40 रात रेगिस्तान में उपवास और प्रार्थना में बिताए थे। उसी की स्मृति में ईसाई समुदाय 40 दिनों का संयम और तप का समय मनाता है।
लेंट में लोग क्या छोड़ते हैं?
लेंट का मुख्य उद्देश्य आत्मसंयम और आत्मशुद्धि है। इस दौरान लोग अपनी किसी प्रिय चीज़ या आदत का त्याग करते हैं, जैसे:
- मांसाहार छोड़ना (खासकर शुक्रवार को)
- मिठाई या जंक फूड से दूरी
- शराब या धूम्रपान छोड़ना
- सोशल मीडिया का सीमित उपयोग
- मनोरंजन के साधनों से परहेज
कुछ लोग केवल भोजन का त्याग ही नहीं, बल्कि बुरी आदतों—जैसे गुस्सा, ईर्ष्या या नकारात्मक सोच—को भी छोड़ने का संकल्प लेते हैं।
लेंट का संदेश केवल त्याग नहीं, बल्कि दूसरों की सेवा और दान (Charity) भी है। इस दौरान जरूरतमंदों की सहायता करना, गरीबों को भोजन कराना और समाजसेवा करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

ऐश वेडनेसडे की शुरुआत कैसे हुई?
ऐश वेडनेसडे की परंपरा प्रारंभिक ईसाई काल से जुड़ी मानी जाती है। चौथी शताब्दी के आसपास चर्च ने लेंट को औपचारिक रूप से मान्यता दी।
राख का उपयोग पश्चाताप और शोक के प्रतीक के रूप में पुराने नियम (Old Testament) में भी मिलता है। धीरे-धीरे यह परंपरा विकसित हुई और चर्च ने इसे आधिकारिक रूप से अपनाया।
मध्यकाल में यह परंपरा यूरोप में व्यापक रूप से प्रचलित हुई और आज दुनिया के लगभग सभी ईसाई देशों में इसे श्रद्धा से मनाया जाता है।

किन देशों में मनाया जाता है?
ऐश वेडनेसडे और लेंट का पालन अमेरिका, इटली, स्पेन, फिलीपींस, जर्मनी और भारत जैसे देशों में भी किया जाता है।
भारत में विशेष रूप से केरल, गोवा और पूर्वोत्तर राज्यों में ईसाई समुदाय के लोग इसे बड़े श्रद्धाभाव से मनाते हैं।
आध्यात्मिक संदेश
ऐश वेडनेसडे हमें यह सिखाता है कि जीवन क्षणभंगुर है। यह समय आत्मविश्लेषण का है—अपने कर्मों पर विचार करने, गलतियों के लिए क्षमा मांगने और बेहतर इंसान बनने का संकल्प लेने का।
लेंट का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक विकास है। यह हमें संयम, धैर्य और सेवा का महत्व समझाता है।
ऐश वेडनेसडे और लेंट मानवता को त्याग, विनम्रता और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। 40 दिनों का यह काल हमें याद दिलाता है कि सच्ची आस्था केवल पूजा में नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने में है।
त्याग, सेवा और प्रार्थना के इस पवित्र समय में हर व्यक्ति अपने भीतर झांककर एक नई शुरुआत कर सकता है।
Table of Contents
Holashtak 2026 Warnings 23 फरवरी से शुरू हो रहा है होलाष्टक, 9 दिनों तक शुभ कार्यों पर लगेगा ब्रेक
शोर्ट वीडियोज देखने के लिए VR लाइव से जुड़िये
हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए इस लींक पर क्लीक कीजिए VR LIVE

