चीन में सार्वजनिक स्थानों पर लोगों का ‘उकड़ू’ (Squat) बैठना एक ऐसी आदत है जिसे पूरी दुनिया बड़ी उत्सुकता से देखती है। इसे अक्सर “Asian Squat” कहा जाता है। लेकिन क्या यह सिर्फ एक थकान मिटाने का तरीका है या इसके पीछे कोई गहरा विज्ञान और संस्कृति छिपी है? और क्या भारत जैसे देशों में यह संभव है?
Asian Squat: चीन में लोग कहीं भी उकड़ू क्यों बैठ जाते हैं? जानें ‘एशियन स्क्वाट’ के पीछे का सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण। क्या भारत के सार्वजनिक स्थानों पर ऐसा बैठना सही है?
Asian Squat: क्या आपने कभी गौर किया है कि चीन में लोग बस स्टैंड हो या पार्क, कहीं भी उकड़ू होकर बैठ जाते हैं? इसे ‘एशियन स्क्वाट’ कहा जाता है। लेकिन पश्चिमी देशों के लोग ऐसा क्यों नहीं कर पाते? और क्या भारत में हम ऐसा कर सकते हैं?
Asian Squat: चीन में कहीं भी उकड़ू बैठने के पीछे का रहस्य और विज्ञान
अगर आप कभी चीन की गलियों, रेलवे स्टेशनों या पार्कों में घूमें, तो आप एक नजारा अक्सर देखेंगे—लोग बिना किसी कुर्सी या बेंच के जमीन पर उकड़ू (Squatting) बैठे हुए आराम कर रहे होते हैं। वे इसी मुद्रा में फोन चलाते हैं, सिगरेट पीते हैं या आपस में गप्पें मारते हैं। पश्चिमी देशों (जैसे अमेरिका या यूरोप) के लोगों के लिए यह मुद्रा लगभग असंभव है, लेकिन एशिया, विशेषकर चीन में, यह जीवन का हिस्सा है।

क्यों बैठते हैं चीनी लोग उकड़ू?
इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
- ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कारण: चीन के ग्रामीण क्षेत्रों में सदियों से लोग खेतों में काम करते समय या भोजन करते समय इसी मुद्रा में बैठते आए हैं। वहां “स्क्वाट टॉयलेट्स” (Squat Toilets) का उपयोग भी काफी अधिक है, जिससे बचपन से ही उनके शरीर की बनावट ऐसी हो जाती है कि वे घंटों इस मुद्रा में रह सकते हैं।
- थकान मिटाने का तरीका: जब सार्वजनिक स्थानों पर बेंच या कुर्सियां उपलब्ध नहीं होतीं, तो जमीन पर पूरी तरह बैठने के बजाय उकड़ू बैठना अधिक सुविधाजनक होता है। इससे कपड़े गंदे नहीं होते और शरीर का भार पैरों पर संतुलित हो जाता है।
- शारीरिक लचीलापन: वैज्ञानिक रूप से इसे ‘एशियन स्क्वाट’ कहा जाता है। चीन और एशियाई देशों के लोगों की ‘एकिलीज़ टेंडन’ (एड़ी की नस) अधिक लचीली होती है, जिससे वे अपनी एड़ियों को जमीन पर सटाकर पूरी तरह बैठ पाते हैं। पश्चिमी देशों के लोग अक्सर अपनी एड़ियां नहीं टिका पाते और गिर जाते हैं।
उकड़ू बैठने के स्वास्थ्य लाभ
चीन में बुजुर्गों को भी आप इस मुद्रा में देख सकते हैं। आयुर्वेद और चीनी चिकित्सा दोनों मानते हैं कि उकड़ू बैठना सेहत के लिए वरदान है:
- पाचन में सुधार: यह मुद्रा पेट के अंगों पर हल्का दबाव डालती है, जिससे पाचन तंत्र सक्रिय होता है।
- पैरों की मजबूती: इससे कूल्हों (Hips) और घुटनों की मांसपेशियों का व्यायाम होता है।
- पोस्चर में सुधार: कुर्सी पर घंटों बैठने से होने वाले पीठ दर्द से यह मुद्रा राहत दिला सकती है।


क्या हम भारत (अपने देश) में सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे बैठ सकते हैं?
भारत में भी उकड़ू बैठना कोई नई बात नहीं है। हमारे यहाँ योग की मुद्राएं और ग्रामीण जीवन में यह बहुत आम है।
- ग्रामीण भारत: गांवों में आज भी लोग चौपालों पर या खेतों में उकड़ू बैठकर बातें करते हैं। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है।
- शहरी भारत की चुनौती: शहरों में ‘पश्चिमी सभ्यता’ के प्रभाव और ‘वेस्टर्न टॉयलेट्स’ के बढ़ते उपयोग के कारण नई पीढ़ी के लिए अब घंटों उकड़ू बैठना मुश्किल होता जा रहा है।
- सामाजिक दृष्टिकोण: चीन में सार्वजनिक स्थानों पर उकड़ू बैठना बहुत सामान्य माना जाता है, वहां इसे ‘अजीब’ नहीं देखा जाता। भारत में भी इसे स्वीकार्यता प्राप्त है, विशेषकर मजदूरों, किसानों और आम जनता के बीच। हालांकि, कॉर्पोरेट या हाई-प्रोफाइल इलाकों में लोग इसे ‘असभ्य’ मान सकते हैं, जो कि केवल एक मानसिक धारणा है।
- भारतीय कल्चर टॉयलेट: वेसे तो ये भारतीय टॉयलेट जाने का बरसो पुराना तरीका है पहले हम भी इसी रीत का उपयोग करते थे। पर पब्लिक एरिया में इस तरह से बैठना चाहिए उसमें शर्म किस बात की।
‘एशियन स्क्वाट’ सिर्फ एक बैठने का तरीका नहीं, बल्कि शरीर के लचीलेपन और सादगी का प्रतीक है। चीन के लोग अपनी इस आदत की वजह से लंबी उम्र तक सक्रिय रहते हैं। हमें भी आधुनिकता की दौड़ में अपनी इन पारंपरिक और सेहतमंद आदतों को नहीं छोड़ना चाहिए।
Table of Contents
शोर्ट वीडियोज देखने के लिए VR लाइव से जुड़िये
हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए इस लींक पर क्लीक

