Friday, February 27, 2026
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नन्हे कदमों की पहली होली: भारतीय संस्कृति में बच्चे की पहली होली पर निभाई जाने वाली खास रस्में और परंपराएं | Baby First Holi

नन्हे कदमों की पहली होली: भारतीय संस्कृति में बच्चे की पहली होली पर निभाई जाने वाली खास रस्में और परंपराएं | Baby First Holi

Baby First Holi क्या आपके घर में भी बच्चे की पहली होली है? जानें भारतीय परंपरा में ‘ढूंढ’ और ‘होलिका दहन’ से जुड़ी उन रस्मों के बारे में जो बच्चे को बुरी नजर से बचाती हैं।

भारतीय संस्कृति में बच्चे की ‘पहली होली’ केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक बड़ा उत्सव और संस्कार माना जाता है। नन्हे कदमों की पहली होली परिवार के लिए खुशियों की सौगात लेकर आती है। इस अवसर पर कई पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं जो बच्चे के सौभाग्य और स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं।

Baby First Holi
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बच्चे की पहली होली और भारतीय परंपराएं

खुशियों के रंगों का स्वागत

होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, लेकिन जब घर में किसी नन्हे मेहमान की पहली होली होती है, तो इसका महत्व दोगुना हो जाता है। भारतीय समाज में माना जाता है कि बच्चे की पहली होली उसके जीवन में रंगों की तरह खुशियाँ और समृद्धि लेकर आती है। अलग-अलग राज्यों में इसे मनाने के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन सबका उद्देश्य एक ही है—बच्चे को आशीर्वाद देना और उसे नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित रखना।

Baby First Holi
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‘ढूंढ’ की रस्म: सबसे महत्वपूर्ण परंपरा

गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बच्चे की पहली होली पर ‘ढूंढ’ की रस्म निभाई जाती है।

  • महत्व: ऐसी मान्यता है कि ‘ढुंढा’ नाम की एक राक्षसी बच्चों को परेशान करती थी। उससे सुरक्षा के लिए यह रस्म शुरू हुई।
  • विधि: इस दिन बच्चे के ननिहाल (मामा के घर) से कपड़े, खिलौने और मिठाइयाँ आती हैं। शाम को होलिका दहन के समय बच्चे को गोद में लेकर होलिका की परिक्रमा करवाई जाती है। परिवार की बड़ी महिलाएं बच्चे की नजर उतारती हैं और उसे लंबी उम्र का आशीर्वाद देती हैं।

Baby First Holi गुजरात में बच्चे की पहली होली को अत्यंत शुभ माना जाता है, जिसमें मुख्य रूप से ‘ढूंढ’ (Dhondh) की रस्म निभाई जाती है। इस अवसर पर बच्चे के ननिहाल (મોસાળ) की ओर से नए कपड़े, मिठाई और उपहार आते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में ‘खाजू-हारडा’ या ‘कोथली’ कहा जाता है। होलिका दहन के बाद, बच्चे के मामा या पिता उसे अपनी गोद में लेकर होली की परिक्रमा करते हैं, जिसे ‘होली की झाल (आंच) दिखाना’ भी कहा जाता है। परिवार के बुजुर्ग और रिश्तेदार बच्चे को शक्कर के हार (हारडा) और बताशे पहनाते हैं और उसे परिवार की ‘नजर’ या बुरी शक्तियों से बचाने के लिए आशीर्वाद देते हैं। यह परंपरा बच्चे के सौभाग्य और अच्छे स्वास्थ्य की कामना का प्रतीक है।

होलिका दहन और आशीर्वाद

पहली होली पर बच्चे को होलिका दहन की अग्नि के दर्शन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  • प्रतीकात्मकता: अग्नि को पवित्र माना जाता है। बच्चे को अग्नि के पास ले जाकर (सुरक्षित दूरी से) उसे बुराइयों से बचाने की प्रार्थना की जाती है।
  • भस्म का टीका: कई समुदायों में होलिका की पवित्र राख (भस्म) का एक छोटा सा टीका बच्चे के माथे पर लगाया जाता है ताकि उसे किसी की नजर न लगे।

ननिहाल का विशेष उपहार (कोथली/बायना)

Baby First Holi
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भारतीय संस्कृति में त्योहारों पर ‘लेन-देन’ का विशेष महत्व है। बच्चे की पहली होली पर मामा का घर (ननिहाल) एक मुख्य भूमिका निभाता है। ननिहाल से बच्चे के लिए ‘कोथली’ या ‘बायना’ भेजा जाता है, जिसमें नए कपड़े, चांदी के सिक्के या जेवर और पारंपरिक पकवान शामिल होते हैं। यह बच्चे के प्रति ननिहाल के प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक है।

फूलों और गुलाल का ‘सुरक्षित’ टीका

चूंकि बच्चों की त्वचा बहुत संवेदनशील होती है, इसलिए पारंपरिक तौर पर उन्हें गहरे रंगों से दूर रखा जाता है।

  • फूलों की होली: ब्रज और कई अन्य क्षेत्रों में बच्चे की पहली होली फूलों के साथ मनाई जाती है। उन पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाई जाती हैं।
  • अबीर का तिलक: परिवार के सबसे बड़े सदस्य (दादा-दादी या नाना-नानी) बच्चे के गाल पर शुद्ध अबीर या केसर का तिलक लगाकर त्योहार की शुरुआत करते हैं।

बुआ और फूफा का विशेष महत्व

कुछ समुदायों में बच्चे की बुआ पहली होली पर विशेष उपहार लाती हैं। बुआ द्वारा बच्चे के लिए हाथ से बनी माला (शक्कर या मखाने की) पहनाई जाती है, जिसे ‘बताशों की माला’ भी कहा जाता है। यह परंपरा मिठास और आपसी प्रेम को दर्शाती है।

पहली होली पर सुरक्षा के नियम (Parenting Tips) Baby First Holi

रस्मों के साथ-साथ बच्चे की सुरक्षा का ध्यान रखना भी एक बड़ी जिम्मेदारी है:

  • प्राकृतिक रंग: केवल घर के बने रंगों या फूलों का उपयोग करें।
  • शोर से बचाव: होलिका दहन के समय ढोल-नगाड़ों की आवाज तेज हो सकती है, जिससे बच्चा डर सकता है। उसे शांत स्थान पर रखें।
  • त्वचा की देखभाल: होली खिलाने से पहले बच्चे के शरीर पर नारियल का तेल या बेबी लोशन लगाएं ताकि रंग त्वचा के अंदर न जाए।

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