Brunfelsia Pauciflora जादुई पौधा: हर दिन रंग बदलते हैं इस पौधे के फूल, जानें ‘कल, आज और कल’ को घर में उगाने का तरीका
क्या आपने ऐसा पौधा देखा है जिसके फूल रोज रंग बदलते हैं? ‘Yesterday, Today, and Tomorrow’ प्लांट की खूबसूरती और इसे घर में उगाने की पूरी जानकारी के लिए यह लेख पढ़ें। यह एक बेहद दिलचस्प और खूबसूरत पौधा है, जिसका वैज्ञानिक नाम Brunfelsia Pauciflora है। इसे ‘यस्टरडे, टुडे, और टुमारो’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके फूल तीन दिनों तक अपना रंग बदलते हैं—पहले दिन बैंगनी (Purple), दूसरे दिन हल्का लैवेंडर और तीसरे दिन सफेद।
एक ही डाल पर तीन रंगों के फूल! कुदरत का यह करिश्मा अपने घर लाएं।

हर दिन रंग बदलते हैं इस पौधे के फूल: जानें इसे घर में उगाने का तरीका
प्रकृति रहस्यों से भरी हुई है। कुछ पौधे अपनी खुशबू के लिए जाने जाते हैं, तो कुछ अपनी पत्तियों की बनावट के लिए। लेकिन ‘Yesterday, Today, and Tomorrow’ (यस्टरडे, टुडे और टुमारो) एक ऐसा अनोखा पौधा है, जिसके फूल समय के साथ अपना चोला बदलते हैं। यह न केवल देखने में आकर्षक है, बल्कि इसकी धीमी और भीनी-भीनी खुशबू आपके पूरे बगीचे को महका देती है।



इस पौधे का नाम ऐसा क्यों है?
इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत इसके फूलों का रंग बदलना है। जब फूल खिलता है, तो वह गहरा बैंगनी (Deep Purple) होता है। अगले दिन इसका रंग बदलकर हल्का नीला या लैवेंडर हो जाता है, और तीसरे दिन यह पूरी तरह से सफेद हो जाता है। एक ही समय पर पौधे पर तीनों रंगों के फूल खिले होने के कारण यह बहुत ही मनमोहक दृश्य पैदा करता है।
घर में कैसे उगाएं ‘कल, आज और कल’ का पौधा?
अगर आप भी इस जादुई पौधे को अपने घर या बालकनी में जगह देना चाहते हैं, तो इन स्टेप्स को फॉलो करें:

सही जगह का चुनाव (Sunlight)
यह पौधा ऐसी जगह पर सबसे अच्छा फलता-फूलता है जहाँ इसे सुबह की 3-4 घंटे की सीधी धूप मिले और दोपहर की तेज धूप से बचाव हो। बहुत अधिक गर्मी इसकी पत्तियों को झुलसा सकती है, इसलिए इसे ‘पार्शियल शेड’ (आंशिक छाया) में रखना सबसे बेहतर है।
मिट्टी तैयार करना (Soil)
इस पौधे को हल्की अम्लीय (Acidic) और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी पसंद है। मिट्टी तैयार करते समय निम्नलिखित अनुपात का उपयोग करें:
- 50% सामान्य बगीचे की मिट्टी
- 30% वर्मीकम्पोस्ट या गोबर की खाद
- 20% कोकोपीट या रेत (पानी निकलने के लिए)
गमले का चुनाव
इसे आप मध्यम से बड़े आकार के गमले (12-14 इंच) में लगा सकते हैं। सुनिश्चित करें कि गमले के नीचे ड्रेनेज होल (निकासी छेद) हो ताकि पानी जमा न हो, क्योंकि जड़ों में पानी रुकने से पौधा खराब हो सकता है।


पानी देने का सही तरीका
इस पौधे को नमी पसंद है, लेकिन इसे कीचड़ जैसा गीला न रखें। जब मिट्टी की ऊपरी सतह सूखी महसूस हो, तभी पानी दें। गर्मियों में इसे रोज पानी की जरूरत हो सकती है, जबकि सर्दियों में पानी कम कर दें।
Brunfelsia Pauciflora खाद और पोषण (Fertilizer)
फूलों के सीजन (वसंत और गर्मी) के दौरान इसे हर 20-25 दिन में ऑर्गेनिक खाद दें। एसिडिक मिट्टी पसंद होने के कारण, आप कभी-कभी इस्तेमाल की हुई चाय की पत्ती (धोकर सुखाई हुई) भी मिट्टी में मिला सकते हैं।
देखभाल के कुछ जरूरी टिप्स
- प्रूनिंग (कटाई-छंटाई): फूल आने का सीजन खत्म होने के बाद इसकी हल्की छंटाई करें। इससे पौधा घना होता है और अगली बार ज्यादा फूल आते हैं।
- कीटों से बचाव: कभी-कभी इस पर एफिड्स या स्पाइडर माइट्स का हमला हो सकता है। इससे बचने के लिए महीने में एक बार नीम के तेल का स्प्रे करें।
- सावधानी: ध्यान रखें कि इस पौधे के सभी हिस्से (खासकर बीज) पालतू जानवरों और बच्चों के लिए जहरीले हो सकते हैं, इसलिए इसे उनकी पहुँच से थोड़ा दूर रखें।
‘Yesterday, Today, and Tomorrow’ सिर्फ एक पौधा नहीं, ये आपके बगीचे की जान बन सकता है। इसकी रंग बदलने की कला और मनमोहक सुगंध किसी का भी दिन बना सकती है। अगर आप गार्डनिंग के शौकीन हैं, तो इस वसंत अपने कलेक्शन में इस ‘कलर चेंजिंग’ ब्यूटी को जरूर शामिल करें।
यह जादुई पौधा जितना दिखने में भारतीय लगता है, इसका मूल निवास विदेशी है। आइए जानते हैं इसके सफर और भारत में इसकी मौजूदगी के बारे में:
यह पौधा मूल रूप से कहाँ का है?
‘यस्टरडे, टुडे, और टुमारो’ (Brunfelsia pauciflora) मूल रूप से ब्राजील (South America) का पौधा है। यह वहां के वर्षावनों (Rainforests) में पाया जाता है। यही कारण है कि इसे नमी वाली हवा और हल्की छाया पसंद है।
भारत में यह कैसे और कहाँ से आया?
भारत में यह पौधा ब्रिटिश काल के दौरान लाया गया था। अंग्रेज अक्सर सजावटी पौधों के शौकीन थे और उन्होंने अपनी बागवानी और बॉटनिकल गार्डन्स की शोभा बढ़ाने के लिए इसे दक्षिण अमेरिका से मंगवाया था। तब से यह भारतीय जलवायु में अच्छी तरह ढल गया है।
भारत में यह कहाँ-कहाँ मिलता है?
चूंकि यह एक उष्णकटिबंधीय (Tropical) पौधा है, इसलिए यह भारत के उन हिस्सों में सबसे ज्यादा मिलता है जहाँ का तापमान मध्यम रहता है और हवा में नमी होती है।
- दक्षिण भारत: यह पौधा कर्नाटक (खासकर बेंगलुरु), केरल और तमिलनाडु के पहाड़ी और तटीय इलाकों में बहुत लोकप्रिय है।
- पश्चिम भारत: महाराष्ट्र (पुणे, महाबलेश्वर) और गुजरात के उन हिस्सों में जहाँ बागवानी का शौक अधिक है, यह नर्सरी में आसानी से मिल जाता है।
- उत्तर और पूर्वी भारत: कोलकाता और पश्चिम बंगाल के इलाकों में यह खूब फलता-फूलता है। उत्तर भारत (दिल्ली, पंजाब) में इसे लोग घरों में गमलों में लगाते हैं, लेकिन यहाँ गर्मियों की तेज लू से इसे बचाकर रखना पड़ता है।
- पहाड़ी इलाके: यह भारत के कम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों (जैसे असम और मेघालय) में भी बहुत सुंदर खिलता है।
एक दिलचस्प बात: भारत में इसे नर्सरी वाले अक्सर इसके वैज्ञानिक नाम के बजाय “कलर चेंजिंग जैस्मिन” या सीधा “यस्टरडे-टुडे-टुमारो” के नाम से ही बेचते हैं।
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