Chaiti Chhath 2026: 22 मार्च से शुरू होगा चार दिवसीय महापर्व, जानें नहाय-खाय से पारण तक की सही तारीख और शुभ मुहूर्त!
Chaiti Chhath 2026 की पूरी जानकारी! 22 मार्च को नहाय-खाय से लेकर 25 मार्च के उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक की सटीक तिथियां, पूजा विधि और इस महापर्व का महत्व जानें।
Chaiti Chhath 2026 – श्रद्धा और विश्वास का चार दिवसीय अनुष्ठान
हिंदू धर्म में छठ पूजा का विशेष महत्व है। साल में दो बार मनाया जाने वाला यह महापर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता को भी दर्शाता है। कार्तिक मास की छठ (बड़ी छठ) के बाद चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक ‘चैती छठ’ मनाई जाती है। वर्ष 2026 में इसकी शुरुआत 22 मार्च से हो रही है। यह पर्व कठिन तपस्या और आत्मिक शुद्धि का मार्ग है, जिसमें व्रती 36 घंटों का निर्जला व्रत रखकर भगवान भास्कर और छठी मइया की आराधना करते हैं।
चैती छठ 2026: चारों दिनों का सटीक कैलेंडर Chaiti Chhath 2026
1. पहला दिन (22 मार्च, रविवार) – नहाय-खाय (Nahaye Khaye): महापर्व का शुभारंभ ‘नहाय-खाय’ के साथ होता है। इस दिन व्रती पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन में अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू (लौकी) की सब्जी बनाई जाती है। इसमें सेंधा नमक का प्रयोग होता है और भोजन करने के बाद ही व्रत का संकल्प लिया जाता है।
2. दूसरा दिन (23 मार्च, सोमवार) – खरना (Kharna): खरना का अर्थ है शुद्धिकरण। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद ‘गुड़ वाली खीर’ और ‘रोटी’ का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद से ही 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू हो जाता है। शांत वातावरण में प्रसाद ग्रहण करना इस दिन की मुख्य परंपरा है।
3. तीसरा दिन (24 मार्च, मंगलवार) – संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya): यह दिन महापर्व का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। छठ व्रती डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। बांस के सूप में ठेकुआ, मौसमी फल (नारियल, केला, गन्ना) और अन्य पकवान सजाए जाते हैं। नदी या तालाब के किनारे खड़े होकर भगवान भास्कर की स्तुति की जाती है और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
4. चौथा दिन (25 मार्च, बुधवार) – उषा अर्घ्य और पारण (Usha Arghya & Paran): अंतिम दिन उगते हुए सूर्य (उषा) को अर्घ्य दिया जाता है। रात भर घाटों पर जागरण और भजन के बाद, सुबह सूर्य की पहली किरण को देखते ही अर्घ्य अर्पण किया जाता है। इसके बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोलते हैं, जिसे ‘पारण’ कहा जाता है।

“उगयहु सुरुज देव भइलो अरघ के बेर…” 🌅
आस्था, शुद्धता और समर्पण के महापर्व ‘चैती छठ’ 2026 की शुरुआत 22 मार्च से हो रही है। आइये जानते हैं नहाय-खाय से पारण तक की पूरी जानकारी। जय छठी मइया!
चैती छठ का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व
छठ पूजा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान सम्मत पद्धति भी है। सूर्य ऊर्जा का मुख्य स्रोत है और उनकी पूजा करने से चर्म रोग और मानसिक विकारों से मुक्ति मिलती है। चैत्र मास में जब ऋतु परिवर्तन होता है, तब इस व्रत को करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
आध्यात्मिक रूप से, चैती छठ ‘माता सीता’ और ‘द्रौपदी’ के संघर्ष और उनकी आस्था से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और परिवार में खुशहाली आती है।

पूजा की आवश्यक सामग्री (Checklist)
- बांस का सूप और टोकरी (दउरा)
- मिट्टी का दीया और घी/तेल
- नए वस्त्र (सूती कपड़े)
- ठेकुआ (प्रसाद के लिए गेहूं का आटा, गुड़ और घी)
- नारियल, सुथनी, शकरकंद, गन्ना और मौसमी फल
- लाल चंदन, अक्षत और अगरबत्ती

चैती छठ हमें धैर्य और अनुशासन सिखाता है। यह पर्व अमीर-गरीब, ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर सबको एक घाट पर खड़ा करता है। यदि आप भी 2026 में चैती छठ करने का विचार कर रहे हैं, तो अभी से इसकी मानसिक और शारीरिक तैयारी शुरू कर दें। छठी मइया आप सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करें।
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