Cigarette Price Hike धुआं उड़ाना अब जेब पर भारी 1 फरवरी से सिगरेट के दाम बढ़े, जानें क्यों सरकार लगा रही है टैक्स का चाबुक?
केंद्र सरकार ने बजट में सिगरेट पर नेशनल कैलेमिटी कन्टिंजेंट ड्यूटी (NCCD) और एक्साइज टैक्स बढ़ा दिया है। जानें कीमतों में इस भारी उछाल के पीछे के आर्थिक और स्वास्थ्य कारण।
Cigarette Price Hike बजट का झटका! 🚬 अब सिगरेट पीना और भी महंगा होने वाला है। सरकार ने टैक्स के जरिए ‘तंबाकू मुक्त भारत’ की ओर एक और कदम बढ़ाया है या यह सिर्फ रेवेन्यू बढ़ाने का जरिया है? पूरी जानकारी के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट।
महंगी हुई सिगरेट: बजट के बाद धुआं उड़ाने की बढ़ी कीमत
भूमिका हर साल 1 फरवरी को देश का आम बजट पेश होता है, और सिगरेट पीने वालों की निगाहें हमेशा टैक्स के कॉलम पर टिकी होती हैं। इस साल भी केंद्र सरकार ने सिगरेट पर लगने वाले टैक्स (NCCD) में बढ़ोतरी का फैसला किया है। इसके चलते विभिन्न ब्रांड्स की सिगरेट की कीमतों में 5% से 12% तक का उछाल देखने को मिल सकता है। लेकिन सवाल यह उठता है कि सरकार हर बार सिगरेट को ही निशाना क्यों बनाती है?

Cigarette Price Hike टैक्स बढ़ने के मुख्य कारण
1. स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं (Sin Tax) सिगरेट और तंबाकू उत्पादों को ‘Sin Goods’ (पाप वस्तुएं) की श्रेणी में रखा जाता है। सरकार का तर्क है कि टैक्स बढ़ाकर कीमतों में वृद्धि करने से युवा और कम आय वर्ग के लोग धूम्रपान से दूर होंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, तंबाकू पर भारी टैक्स लगाना उसे छोड़ने के लिए सबसे प्रभावी उपकरणों में से एक है।
2. राजस्व (Revenue) में बढ़ोतरी सरकार के लिए तंबाकू एक ‘कैश काउ’ की तरह है। सिगरेट पर टैक्स बढ़ाकर सरकार को एक बड़ी धनराशि प्राप्त होती है, जिसका उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं (Infrastructure) में किया जाता है।
3. स्वास्थ्य लागत की भरपाई तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों (जैसे कैंसर और हृदय रोग) के इलाज पर सरकार को हर साल अरबों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। टैक्स में वृद्धि इस वित्तीय बोझ को कम करने का एक तरीका है।
Cigarette Price Hike कीमतों पर क्या होगा असर?
सिगरेट पर लगने वाला टैक्स इसकी लंबाई (Length) और फिल्टर के प्रकार पर निर्भर करता है। 65mm से लेकर 84mm तक की सिगरेट पर अलग-अलग स्लैब में टैक्स बढ़ाया गया है। बड़े ब्रांड्स जैसे Gold Flake और Classic की कीमतों में प्रति स्टिक 1 से 2 रुपये तक की वृद्धि संभव है, जिससे पूरे पैकेट की कीमत काफी बढ़ जाएगी।
क्या टैक्स बढ़ाना काफी है?
केवल टैक्स बढ़ाने से समस्या हल नहीं होती। अत्यधिक टैक्स वृद्धि से कभी-कभी ‘अवैध तस्करी’ (Cigarette Smuggling) बढ़ जाती है। लोग सस्ते और बिना टैक्स वाले अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स की ओर रुख करने लगते हैं, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है और स्वास्थ्य पर खतरा बना रहता है।
सिगरेट पर टैक्स बढ़ाना सरकार की एक दोहरी रणनीति है—राजस्व बढ़ाना और स्वास्थ्य को बढ़ावा देना। हालांकि, एक आम आदमी के लिए यह केवल “महंगाई” का एक और झटका है। यदि आप अपनी जेब और फेफड़ों, दोनों को बचाना चाहते हैं, तो शायद यह “धुआं छोड़ने” का सही समय है।
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