अंधेरे में दबी दुनिया (Electricity Crisis): 2026 में भी बिजली से वंचित करोड़ों लोग
Electricity Crisis क्या आप जानते हैं कि आज भी दुनिया के करोड़ों लोग बिना बिजली के रहते हैं? जानिए किन देशों में स्थिति सबसे खराब है, इसके पीछे के मुख्य कारण क्या हैं और सौर ऊर्जा इस संकट को कैसे बदल रही है।
हम चाँद पर पहुँच गए, लेकिन धरती के करोड़ों घर आज भी सूरज ढलते ही अंधेरे में डूब जाते हैं। आइए जानें ऊर्जा गरीबी की कड़वी हकीकत। Electricity Crisis

रोशनी की दौड़ में पीछे छूटे लोग Electricity Crisis
आज के डिजिटल युग में, जहाँ हाई-स्पीड इंटरनेट और AI हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुके हैं, यह सोचना भी डरावना लगता है कि पृथ्वी पर रहने वाले लगभग 680 से 700 मिलियन लोग ऐसे हैं जिन्होंने कभी अपने घर में एक बल्ब तक नहीं जलते देखा। यह केवल सुविधा की कमी नहीं है, बल्कि यह विकास की दौड़ में एक बहुत बड़ी खाई है।
1. कहाँ है सबसे ज्यादा अंधेरा?
आंकड़ों पर नज़र डालें तो ‘एनर्जी पॉवर्टी’ या ऊर्जा गरीबी का सबसे काला साया सब-सहारा अफ्रीका (Sub-Saharan Africa) पर है। दुनिया के कुल बिना बिजली वाले लोगों में से लगभग 80% इसी क्षेत्र में रहते हैं। नाइजीरिया, इथियोपिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे देशों में ग्रामीण इलाकों की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
एशिया में भी स्थिति पूरी तरह सुधरी नहीं है। हालांकि भारत ने अपने लगभग हर गांव तक बिजली पहुँचाने का दावा किया है, लेकिन आज भी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के कुछ सुदूर क्षेत्रों में ‘विश्वसनीय बिजली’ (Reliable Power) एक सपना है।
2. बिजली न होने का मतलब सिर्फ अंधेरा नहीं
बिजली का न होना किसी समुदाय को कई दशक पीछे धकेल देता है:
- स्वास्थ्य: बिना बिजली के अस्पतालों में टीके (Vaccines) सुरक्षित नहीं रखे जा सकते और जीवन रक्षक मशीनें नहीं चल पातीं।
- शिक्षा: सूर्यास्त के बाद बच्चे पढ़ नहीं पाते, जिससे उनकी शिक्षा और भविष्य की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं।
- अर्थव्यवस्था: बिना बिजली के छोटे उद्योग नहीं लग सकते, जिससे गरीबी का चक्र कभी नहीं टूटता।
3. बाधाएं क्या हैं?
सवाल उठता है कि 21वीं सदी में भी हम सब तक बिजली क्यों नहीं पहुँचा पाए? इसके तीन मुख्य कारण हैं:
- दुर्गम भूगोल: पहाड़ों, घने जंगलों या द्वीपों पर ग्रिड लाइन बिछाना बेहद खर्चीला और कठिन है।
- राजनीतिक अस्थिरता: युद्धग्रस्त देशों में बुनियादी ढांचे का विकास असंभव हो जाता है।
- आर्थिक तंगी: कई गरीब देशों के पास बड़े पावर प्लांट लगाने के लिए निवेश की कमी है।
4. क्या सौर ऊर्जा ही एकमात्र समाधान है?
पारंपरिक कोयला बिजली के बजाय, अब ‘ऑफ-ग्रिड’ सौर समाधान (Solar Solutions) एक वरदान साबित हो रहे हैं। अफ्रीका और एशिया के गांवों में छोटे सोलर पैनल और मिनी-ग्रिड्स ने वह कर दिखाया है जो बड़ी सरकारें दशकों में नहीं कर पाईं। अब एक गरीब किसान को बिजली के लिए हज़ारों किलोमीटर लंबी तार का इंतज़ार नहीं करना पड़ता; उसके घर की छत पर लगा एक छोटा पैनल ही उसका संसार रोशन कर रहा है।
दुनिया के टॉप 20 ‘अंधेरे’ वाले देश (सबसे कम बिजली पहुँच) Electricity Crisis
इन देशों में आज भी एक बड़ी आबादी बिना ग्रिड कनेक्शन के जी रही है। अधिकांश देश सब-सहारा अफ्रीका क्षेत्र में स्थित हैं।
| रैंक | देश का नाम | बिजली की पहुँच (% आबादी) |
| 1 | दक्षिण सूडान (South Sudan) | ~8% – 9% |
| 2 | बुरुंडी (Burundi) | ~10% |
| 3 | चाड (Chad) | ~11% |
| 4 | मलावी (Malawi) | ~14% |
| 5 | मध्य अफ्रीकी गणराज्य (CAR) | ~15% |
| 6 | पापुआ न्यू गिनी (Papua New Guinea) | ~19% |
| 7 | बुर्किना फासो (Burkina Faso) | ~19% |
| 8 | नाइजर (Niger) | ~20% |
| 9 | कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DR Congo) | ~21% |
| 10 | सिएरा लियोन (Sierra Leone) | ~29% |
| 11 | लाइबेरिया (Liberia) | ~30% |
| 12 | मोजाम्बिक (Mozambique) | ~31% |
| 13 | मेडागास्कर (Madagascar) | ~35% |
| 14 | सोमालिया (Somalia) | ~36% |
| 15 | गिनी-बिसाऊ (Guinea-Bissau) | ~40% |
| 16 | युगांडा (Uganda) | ~45% |
| 17 | गिनी (Guinea) | ~51% |
| 18 | हैती (Haiti) | ~51% |
| 19 | इरिट्रिया (Eritrea) | ~54% |
| 20 | इथियोपिया (Ethiopia) | ~55% |
भारत की स्थिति
भारत ने पिछले एक दशक में अभूतपूर्व प्रगति की है। आज भारत की 99% से अधिक आबादी के पास बिजली की पहुँच है, हालांकि कुछ सुदूर ग्रामीण इलाकों में 24 घंटे विश्वसनीय बिजली (24×7 Reliable Power) अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
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