Graneledone Octopus द अल्टीमेट सैक्रिफाइस: गहरे समुद्र की ऑक्टोपस मां की दर्दनाक कहानी
जानिए पशु जगत की सबसे दुखद गर्भावस्था की कहानी। Graneledone Octopus के बारे में जानें—एक ऐसी मां जो अपने बच्चों के जीवित रहने को सुनिश्चित करने के लिए अपनी जान तक दे देती है। एक माँ दूसरी जिंदगी के लिए खुद मौत चुनती है।

प्रकृति का सबसे दुखद बलिदान: एक बेबस माँ की कहानी Graneledone Octopus
प्रकृति जितनी सुंदर है, उतनी ही क्रूर भी हो सकती है। जब हम मातृत्व या माँ के प्यार की बात करते हैं, तो हमारे मन में ममता और सुरक्षा की तस्वीर उभरती है। लेकिन गहरे समुद्र की अंधेरी गहराइयों में एक ऐसी माँ रहती है, जिसकी गर्भावस्था (pregnancy) की कहानी दुनिया की सबसे दुखद कहानियों में से एक है। यह कहानी है ‘ग्रेनेलेडोन बोरेओपैसिफिका’ (Graneledone boreopacifica) नामक एक ऑक्टोपस की।
वो अपने बच्चो को इस दुनिया में लाने के लिए अपनी जान गवा देती है, 1000 से ५००० अंडे तक रख सकते है ये।

एक लंबी और थका देने वाली प्रतीक्षा
इंसानों में गर्भावस्था 9 महीने की होती है, हाथियों में यह लगभग 22 महीने चलती है। लेकिन इस गहरे समुद्र के ऑक्टोपस के लिए, यह सफर 53 महीने यानी साढ़े चार साल तक चलता है। यह पूरी दुनिया में किसी भी जीव के लिए सबसे लंबी दर्ज की गई गर्भावस्था है।
कैलिफोर्निया के तट से दूर, समुद्र की सतह से हजारों फीट नीचे, जहाँ सूरज की रोशनी कभी नहीं पहुँचती और पानी जमा देने वाला ठंडा होता है, वहाँ यह माँ अपने अंडों की रक्षा करती है।

त्याग की पराकाष्ठा
इस ऑक्टोपस माँ की त्रासदी तब शुरू होती है जब वह अपने अंडे देती है। एक बार जब वह अंडे दे देती है, तो उसका पूरा जीवन सिर्फ एक लक्ष्य पर टिक जाता है: अंडों की हिफाजत। इन 53 महीनों के दौरान, वह माँ:
- खाना छोड़ देती है: वैज्ञानिकों ने देखा है कि साढ़े चार साल तक उसने एक निवाला भी नहीं खाया। यहाँ तक कि अगर उसके सामने केकड़े या अन्य शिकार रखे गए, तो उसने उन्हें हटा दिया ताकि वह अपने अंडों पर ध्यान दे सके।
- लगातार सफाई और सुरक्षा: वह अपने टेंटेकल्स (हाथों) से अंडों को सहलाती रहती है ताकि उन पर गंदगी या शैवाल न जमे। वह लगातार उन पर ताज़ा ऑक्सीजन वाला पानी पंप करती रहती है।
- खुद को मिटा देना: जैसे-जैसे समय बीतता है, वह माँ कमजोर होने लगती है। उसकी त्वचा पीली पड़ जाती है, उसकी आँखें धुंधली हो जाती हैं और उसका शरीर धीरे-धीरे सिकुड़ने लगता है। वह भूख से तड़प रही होती है, लेकिन उसका मातृत्व उसे हिलने नहीं देता।

अंतिम मिलन जो कभी नहीं हुआ
इस कहानी का सबसे दुखद हिस्सा इसका अंत है। साढ़े चार साल के कड़े संघर्ष और भूख के बाद, जब अंततः अंडों से नन्हे ऑक्टोपस बाहर निकलने के लिए तैयार होते हैं, तो माँ के पास कोई ताकत नहीं बची होती।
जैसे ही आखिरी बच्चा अंडे से बाहर निकलता है और अपनी स्वतंत्र दुनिया की ओर पहला कदम बढ़ाता है, उसी पल वह वीर माँ अपना दम तोड़ देती है। उसने अपने बच्चों को जन्म तो दिया, लेकिन वह कभी उन्हें तैरते हुए या शिकार करते हुए नहीं देख पाती। उसने अपनी अगली पीढ़ी को जीवन देने के लिए खुद को पूरी तरह से मिटा दिया।

यह बलिदान क्यों जरूरी है?
गहरे समुद्र का तापमान इतना कम होता है कि वहां जीवों का विकास बहुत धीमा होता है। बच्चों को पूरी तरह विकसित होने के लिए इतने लंबे समय की जरूरत होती है। अगर माँ वहां पहरा न दे, तो दूसरे समुद्री जीव उन अंडों को खा जाएंगे। इसलिए, उसकी मृत्यु कोई संयोग नहीं, बल्कि प्रकृति द्वारा निर्धारित एक ‘अंतिम उपहार’ है।
अक्सर हम इंसानी रिश्तों में त्याग की बात करते हैं, लेकिन समुद्र की 3000 फीट की गहराई में रहने वाली यह ऑक्टोपस हमें सिखाती है कि जीवन की निरंतरता की कीमत क्या होती है। यह दुनिया की ‘सबसे दुखद गर्भावस्था’ जरूर है, लेकिन यह प्रेम और कर्तव्य की सबसे ऊँची मिसाल भी है।
जब भी आप समुद्र की लहरों को देखें, तो याद रखिएगा कि उसकी गहराइयों में कोई माँ आज भी अपने बच्चों के लिए अपनी जान की बाजी लगा रही होगी।
Table of Contents
शोर्ट वीडियोज देखने के लिए VR लाइव से जुड़िये
हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए इस लींक पर क्लीक कीजिए VR LIVE
लाइफस्टाइल रिलेटेड पोस्ट देखने के लिए किल्क करिए इस लींक पर Life Style
धर्म के सारे पोस्ट देखने के लिए इस लींक पर क्लीक करिए Dharm

