Happy Pongal: दक्षिण भारत के सबसे बड़े पर्व पोंगल की आप सभी को अग्रिम शुभकामनाएं
Happy Pongal भारत त्यौहारों का देश है, और नए साल की शुरुआत के साथ ही फसलों की कटाई और खुशियों का दौर शुरू हो जाता है। दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में मनाए जाने वाले सबसे बड़े त्यौहारों में से एक ‘पोंगल’ (Pongal) है। साल 2026 में पोंगल का पर्व कब मनाया जाएगा और इसका क्या महत्व है, आइए जानते हैं विस्तार से।
पोंगालो पोंगल! 🍚✨ क्या आप जानते हैं 2026 में पोंगल कब है? 13 से 16 जनवरी तक चलेगा यह महापर्व। जानिए हर दिन का महत्व हमारे नए लेख में।
Happy Pongal 2026: सही तारीखें और शुभ मुहूर्त
पोंगल का त्यौहार तमिल सौर कैलेंडर के अनुसार ‘ताई’ (Thai) महीने की पहली तारीख को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक, यह आमतौर पर 14 या 15 जनवरी को आता है।
साल 2026 में पोंगल का पर्व 13 जनवरी से शुरू होकर 16 जनवरी तक चलेगा। यहाँ देखें 4 दिनों का पूरा शेड्यूल:
- भोगी पोंगल (Bhogi Pongal): 13 जनवरी 2026 (मंगलवार)
- ताई पोंगल (Thai Pongal – मुख्य दिन): 14 जनवरी 2026 (बुधवार)
- मट्टू पोंगल (Mattu Pongal): 15 जनवरी 2026 (गुरुवार)
- कानुम पोंगल (Kaanum Pongal): 16 जनवरी 2026 (शुक्रवार)


किसका है यह त्यौहार और क्यों मनाया जाता है?
मुख्य रूप से यह तमिल हिंदुओं का त्यौहार है। यह केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है, बल्कि पुडुचेरी, श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर और जहां भी तमिल समुदाय बसता है, वहां इसे धूमधाम से मनाया जाता है।
यह एक फसल उत्सव (Harvest Festival) है। जिस तरह उत्तर भारत में मकर संक्रांति और पंजाब में लोहड़ी मनाई जाती है, ठीक उसी तरह दक्षिण भारत में पोंगल मनाया जाता है। यह त्यौहार किसानों द्वारा सूर्य देव (Sun God), प्रकृति और मवेशियों (पशुधन) के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम है, जिनकी मदद से अच्छी फसल संभव हो पाती है।

क्या होता है पोंगल में? (त्यौहार की विधि)
‘पोंगल’ शब्द का अर्थ है “उबलना” या “उफान आना”। इस त्यौहार का मुख्य आकर्षण नए चावल को दूध और गुड़ में पकाना होता है। जब दूध उबलकर बर्तन से बाहर गिरने लगता है, तो इसे समृद्धि और धन का प्रतीक माना जाता है।
आइए जानते हैं 4 दिनों में क्या खास होता है:
पहला दिन: भोगी पोंगल (Bhogi Pongal)
यह दिन इंद्र देव (वर्षा के देवता) को समर्पित है। इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और पुरानी, बेकार चीजों को घर से बाहर निकालकर जलाते हैं। यह बुराई को त्यागकर नई शुरुआत करने का प्रतीक है।
दूसरा दिन: ताई पोंगल (Thai Pongal)
यह सबसे मुख्य दिन होता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है।
- रस्म: लोग अपने आंगन में मिट्टी के बर्तन में नए चावल, दूध और गुड़ की खीर बनाते हैं।
- पोंगालो पोंगल: जैसे ही दूध उबलकर बर्तन से बाहर गिरता है, परिवार के सभी लोग एक स्वर में “पोंगालो पोंगल” (Pongalo Pongal) चिल्लाते हैं।
- हल्दी का पौधा बर्तन के चारों ओर बांधा जाता है और सूर्य को भोग लगाया जाता है।
तीसरा दिन: मट्टू पोंगल (Mattu Pongal)
‘मट्टू’ का अर्थ है बैल या गाय। यह दिन किसानों के मित्रों यानी मवेशियों के लिए होता है।
- गायों और बैलों को नहलाया जाता है, उनके सींगों को रंगा जाता है और उन्हें घंटियों व फूलों से सजाया जाता है।
- तमिलनाडु का प्रसिद्ध पारंपरिक खेल ‘जल्लीकट्टू’ (Jallikattu) (सांड को काबू करने वाला खेल) भी इसी दिन आयोजित किया जाता है।

चौथा दिन: कानुम पोंगल (Kaanum Pongal)
यह त्यौहार का आखिरी दिन होता है। ‘कानुम’ का अर्थ है ‘देखना’ या ‘मिलना’।
- इस दिन परिवार के लोग एक-दूसरे से मिलते हैं।
- छोटे बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं।
- महिलाएं अपने भाइयों की समृद्धि के लिए पूजा करती हैं (जैसे उत्तर भारत में भैया दूज)।
- लोग पिकनिक पर जाते हैं और बची हुई पोंगल डिश को पक्षियों (कौवे) को खिलाते हैं।
क्या खास है इस त्यौहार में?
इस त्यौहार की सबसे खास बात इसका सादगी और प्रकृति प्रेम है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारा भोजन और जीवन प्रकृति पर निर्भर है। रंग-बिरंगी कोलम (Kolam) (रंगोली) बनाना, गन्ने खाना और पारंपरिक धोती-साड़ी पहनना इस पर्व की रौनक को और बढ़ा देता है।
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