Iran Violence: खामेनेई के एक आदेश से ‘कब्रिस्तान’ बनीं ईरान की सड़कें, 2000 मौतों के बाद अब आगे क्या होगा?
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों ने लिया गृहयुद्ध जैसा रूप। अधिकारियों ने पहली बार स्वीकारी 2000 लोगों की मौत। खामेनेई के आदेश के बाद सड़कों पर बिछी लाशें। जानें अमेरिका-इजरायल पर क्यों लगा आरोप। ईरान की स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। जिस तरह के आंकड़े और दृश्य सामने आ रहे हैं, वे किसी गृहयुद्ध से कम नहीं हैं। यह खबर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मानवाधिकारों के लिहाज से बहुत संवेदनशील है।


Iran Violence: 2000 मौतें, सड़कों पर भयावह मंजर और जलते शहर। खामेनेई के सख्त आदेश के बाद हालात बेकाबू। क्या यह किसी बड़ी क्रांति की शुरुआत है या दमन की इंतहा?


खामेनेई के आदेश से ईरान की सड़कों पर बिछी लाशें – अब तक का सबसे खूनी संघर्ष
मध्य पूर्व का शक्तिशाली देश ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। पिछले तीन वर्षों से सुलग रही चिंगारी अब एक भीषण आग में तब्दील हो चुकी है। खराब आर्थिक हालात और सरकारी दमन के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों ने अब खूनी रूप ले लिया है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की सड़कों पर मंजर इतना भयावह है कि इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
आधिकारिक कबूलनामा: 2000 मौतों का सच
रॉयटर्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के हवाले से आ रही खबरों ने दुनिया को चौंका दिया है। आमतौर पर हताहतों की संख्या छिपाने वाले ईरानी अधिकारियों ने पहली बार स्वीकार किया है कि हालिया हिंसा में लगभग 2000 लोगों की जान गई है। यह आंकड़ा किसी छोटे-मोटे प्रदर्शन का नहीं, बल्कि एक बड़े नरसंहार की ओर इशारा करता है।
हैरान करने वाली बात यह है कि इन मौतों में सिर्फ आम प्रदर्शनकारी ही नहीं, बल्कि भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी और पुलिस बल के जवान भी शामिल हैं। यह दर्शाता है कि संघर्ष अब एकतरफा नहीं रहा, बल्कि जनता ने भी सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है।


खामेनेई का आदेश और सड़कों पर भयावह मंजर
सूत्रों का दावा है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सुरक्षा बलों को “सख्त कार्रवाई” के आदेश दिए थे। जानकारों का मानना है कि इसी आदेश के बाद रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर सीधा बल प्रयोग किया, जिससे सड़कों पर लाशें बिछ गईं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरें विचलित करने वाली हैं, जिनमें तेहरान समेत कई शहरों की सड़कें युद्ध के मैदान जैसी नजर आ रही हैं।
आरोप-प्रत्यारोप: ‘आतंकवादी’ या ‘नागरिक’?
ईरानी सरकार ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए मारे गए प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकवादी’ करार दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह सामान्य विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि देश को अस्थिर करने की एक सुनियोजित साजिश है। तेहरान ने सीधे तौर पर अपने पारंपरिक दुश्मनों—अमेरिका और इजरायल—पर उंगली उठाई है। ईरान का आरोप है कि पश्चिमी ताकतें और उनकी खुफिया एजेंसियां (CIA और मोसाद) ईरान में गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा कर रही हैं और उपद्रवियों को हथियार मुहैया करा रही हैं।

जड़ में है आर्थिक बदहाली
भले ही सरकार इसे विदेशी साजिश बताए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। इस आक्रोश की मुख्य वजह ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था है:
- महंगाई: रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं।
- मुद्रा में गिरावट: ईरानी रियाल की कीमत ऐतिहासिक रूप से गिर चुकी है।
- बेरोजगारी: युवाओं के पास डिग्री है, लेकिन नौकरी नहीं। तीन साल पहले शुरू हुए छोटे-छोटे प्रदर्शन अब अस्तित्व की लड़ाई बन गए हैं। जनता का कहना है कि जब खाने को रोटी नहीं है, तो गोलियों से क्या डरना?
अब आगे क्या होगा? (What’s Next for Iran?)
ईरान एक दोराहे पर खड़ा है।
- और अधिक दमन: खामेनेई सरकार और अधिक सख्ती कर सकती है, जिससे मानवाधिकार हनन के मामले बढ़ेंगे और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और कड़े होंगे।
- गृहयुद्ध का खतरा: यदि प्रदर्शनकारी भी हथियार उठाने लगे, जैसा कि सुरक्षाकर्मियों की मौतों से संकेत मिल रहा है, तो ईरान सीरिया जैसी स्थिति में पहुंच सकता है।
फिलहाल, दुनिया भर की नजरें तेहरान पर टिकी हैं। क्या यह इस्लामिक रिपब्लिक के अंत की शुरुआत है या फिर सरकार एक बार फिर ताकत के दम पर आवाजों को कुचल देगी? आने वाला वक्त ईरान के भविष्य के लिए बहुत निर्णायक होने वाला है।
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