Kashi Vishwanath History जानिए औरंगजेब के काशी विश्वनाथ मंदिर पर आक्रमण की वो अनसुनी कहानी, जब शिवलिंग की रक्षा के लिए हुआ था चमत्कार और क्या हुआ था जब मुगल सेना ने मंदिर पर हमला किया।
Kashi Vishwanath History औरंगजेब का वो हमला और शिवलिंग का चमत्कार: क्या है ज्ञानवापी का पूरा सच?
इतिहास काशी, औरंगजेब और अटूट आस्था

भारत का इतिहास केवल राजाओं और युद्धों की गाथा नहीं है, बल्कि यह आस्था और संघर्ष की भी कहानी है। वाराणसी (काशी) के विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर पर मुगल शासक औरंगजेब का आक्रमण इतिहास के उन काले पन्नों में से एक है, जिसे लेकर आज भी कई चर्चाएं होती हैं।

1. आक्रमण की पृष्ठभूमि (1669 ई.) Kashi Vishwanath History
इतिहासकारों के अनुसार, वर्ष 1669 में औरंगजेब ने काशी के मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। इसके पीछे कई राजनीतिक और धार्मिक कारण बताए जाते हैं। कहा जाता है कि जब मुगल सेना मंदिर की ओर बढ़ी, तो वहां के पुजारियों और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया, लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता मंदिर की संपत्ति नहीं, बल्कि आराध्य शिवलिंग की रक्षा करना था।
2. जब शिवलिंग की रक्षा के लिए ‘ज्ञानवापी’ बने रक्षक
लोककथाओं और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जैसे ही औरंगजेब की सेना ने मुख्य मंदिर के गर्भगृह की ओर रुख किया, मंदिर के मुख्य पुजारी ने एक साहसी निर्णय लिया। भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग को मुगल सैनिकों के हाथों अपमानित होने से बचाने के लिए वे शिवलिंग को लेकर पास में ही स्थित ‘ज्ञानवापी कूप’ (ज्ञान के कुएं) में कूद गए।
माना जाता है कि शिवलिंग को कोई नुकसान न हो, इसलिए उसे उस गहरे कुएं में सुरक्षित रख दिया गया था। यही कारण है कि आज भी ज्ञानवापी का वह स्थान हिंदू भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र है।
3. हमले के दौरान आई ‘दैवीय’ बाधाएं?
जनश्रुतियों में यह भी जिक्र आता है कि जब मुगल सेना ने मंदिर को पूरी तरह जमींदोज करने की कोशिश की, तो उन्हें कई अप्रत्याशित दिक्कतों का सामना करना पड़ा:
- पुजारियों का कड़ा प्रतिरोध: औरंगजेब की विशाल सेना को स्थानीय नागा साधुओं और पंडितों के भीषण प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। कहा जाता है कि हजारों की संख्या में लोगों ने मंदिर बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।
- संरचनात्मक कठिनाई: मंदिर के मुख्य हिस्सों को गिराने के बाद भी औरंगजेब की सेना उस स्थान से ‘आभा’ को समाप्त नहीं कर पाई। यही कारण था कि मंदिर के एक हिस्से को मस्जिद की दीवार के रूप में छोड़ दिया गया, जो आज भी विवाद और चर्चा का विषय बना रहता है।
- मानसिक भय: कहा जाता है कि हमले के दौरान और उसके बाद मुगल खेमे में कई तरह की बीमारियां और भय का माहौल व्याप्त हो गया था, जिसे तत्कालीन लोगों ने ‘महाकाल का प्रकोप’ माना था।

4. अहिल्याबाई होल्कर द्वारा पुनर्निर्माण
औरंगजेब के आक्रमण के बाद लगभग 100 वर्षों तक वहां कोई भव्य मंदिर नहीं था। 18वीं शताब्दी (1780) में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करवाया। उन्होंने उस स्थान के पास ही मंदिर बनवाया जहां औरंगजेब ने तोड़फोड़ की थी।
5. ज्ञानवापी का वर्तमान संदर्भ
आज भी ज्ञानवापी परिसर को लेकर कानूनी और ऐतिहासिक बहस जारी है। हिंदू पक्ष का दावा है कि आदि विश्वेश्वर का मूल शिवलिंग आज भी वहीं मौजूद है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे फव्वारा बताता है। हालिया वैज्ञानिक सर्वेक्षणों (ASI Survey) ने भी इस स्थान के नीचे प्राचीन मंदिर के अवशेष होने के संकेत दिए हैं।
औरंगजेब के हमले ने काशी की भौतिक संरचना को तो चोट पहुंचाई, लेकिन वह काशी की ‘आत्मा’ और ‘आस्था’ को नहीं डिगा सका। ज्ञानवापी कूप में शिवलिंग का जाना केवल एक घटना नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति को बचाने के सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है।
ओरंगजेब ने सोमनाथ मंदिर पर भी आक्रमण करे है जानते है पूरा इतिहास
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