Saturday, January 31, 2026
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Male Loneliness मर्द को दर्द नहीं होता? Men’s Mental Health इस पुरानी सोच ने भारतीय पुरुषों को बनाया अकेलेपन का शिकार; जानें क्यों जरूरी है ‘सेफ स्पेस’

Male Loneliness मर्द को दर्द नहीं होता? Men’s Mental Health इस पुरानी सोच ने भारतीय पुरुषों को बनाया अकेलेपन का शिकार; जानें क्यों जरूरी है ‘सेफ स्पेस’

Men’s Mental Health भारत में युवा पुरुष तेजी से ‘मेल लोनलीनेस’ (Male Loneliness) का शिकार हो रहे हैं। सामाजिक दबाव और भावनाओं को दबाने की आदत कैसे उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए ‘साइलेंट किलर’ बन रही है, जानिए इस रिपोर्ट में।

मजबूत दिखने की होड़ में कहीं हम अपनों को खो तो नहीं रहे? पुरुषों में बढ़ता अकेलापन एक गंभीर समस्या है

Male Loneliness
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अकेलेपन का साइलेंट किलर: क्यों खामोश हो रहे हैं भारत के युवा पुरुष?

आधुनिक भारत में जहाँ तकनीक हमें पूरी दुनिया से जोड़ रही है, वहीं एक कड़वा सच यह भी है कि हमारे युवा पुरुष अंदर ही अंदर अकेलेपन की गहरी खाई में गिर रहे हैं। इसे ‘मेल लोनलीनेस’ (Male Loneliness) कहा जा रहा है—एक ऐसी महामारी जिसे न देखा जा सकता है, न सुना जा सकता है, बस महसूस किया जा सकता है।

Male Loneliness
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1. सामाजिक ढांचा: “मजबूत बनो, रोना नहीं”

बचपन से ही लड़कों को सिखाया जाता है कि “मर्द को दर्द नहीं होता” या “लड़के रोते नहीं हैं।” यह परवरिश उन्हें अपनी भावनाएं व्यक्त करने से रोकती है। जब एक पुरुष बड़ा होता है, तो वह दुख, डर या तनाव को साझा करने के बजाय उसे पी जाना बेहतर समझता है। यही दबी हुई भावनाएं समय के साथ गहरे अकेलेपन और अवसाद (Depression) का रूप ले लेती हैं।

2. ‘सेफ स्पेस’ का अभाव Male Loneliness

महिलाओं के पास अक्सर अपनी सहेलियों या परिवार के साथ मन की बात साझा करने के लिए एक स्वाभाविक ‘सर्कल’ होता है। इसके विपरीत, पुरुषों की दोस्ती अक्सर काम, खेल या राजनीति तक सीमित रह जाती है। वे शायद ही कभी अपने दोस्तों से यह कह पाते हैं कि “मैं अंदर से टूट रहा हूँ।” समाज में पुरुषों के लिए ऐसे ‘सेफ स्पेस’ (सुरक्षित स्थान) बहुत कम हैं जहाँ उन्हें जज (Judge) किए बिना सुना जाए।

3. करियर की दौड़ और वित्तीय दबाव

भारत में आज भी पुरुष को परिवार का मुख्य ‘ब्रेडविनर’ (रोटी कमाने वाला) माना जाता है। करियर में सफल होने की चूहा-दौड़ और आर्थिक रूप से खुद को साबित करने का दबाव उन्हें अपनों से दूर कर देता है। काम के घंटों के बाद जब वे घर लौटते हैं, तो थकान और मानसिक बोझ उन्हें किसी से बात करने की इजाजत नहीं देता।

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4. सोशल मीडिया का भ्रम

डिजिटल दुनिया ने हमें ‘कनेक्ट’ तो किया है, लेकिन ‘जुड़ाव’ खत्म कर दिया है। दूसरों की चकाचौंध भरी लाइफस्टाइल देखकर युवा पुरुषों में ‘हीन भावना’ (Inferiority Complex) घर कर जाती है। वे खुद की तुलना दूसरों से करने लगते हैं, जिससे वे समाज से कटने लगते हैं।

5. अकेलापन: एक साइलेंट किलर

शोध बताते हैं कि अकेलापन केवल मानसिक नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी घातक है। यह हृदय रोग, कमजोर इम्युनिटी और अनिद्रा (Insomnia) का कारण बनता है। पुरुषों में आत्महत्या की बढ़ती दर के पीछे भी यह अकेलापन एक मुख्य कारक है।

अकेलापन कोई व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक चुनौती है। हमें एक ऐसा समाज बनाना होगा जहाँ पुरुष ‘परफेक्ट’ दिखने के बजाय ‘इंसान’ बने रहने में गर्व महसूस करें। याद रखिए, आपके मन की बात सुनना उतना ही जरूरी है जितना कि आपका काम करना।

Male Loneliness समाधान: क्या करने की जरूरत है?

  • सोच बदलें: पुरुषों को यह समझना होगा कि अपनी भावनाओं को व्यक्त करना या प्रोफेशनल मदद (Therapy) लेना कमजोरी नहीं, बल्कि बहादुरी है।
  • बातचीत की शुरुआत करें: यदि आपके आसपास कोई पुरुष दोस्त या रिश्तेदार अचानक शांत हो गया है, तो उससे पूछें— “भाई, सब ठीक तो है?” कभी-कभी बस कोई सुनने वाला मिल जाए, तो आधा बोझ हल्का हो जाता है।
  • डिजिटल डिटॉक्स: रील की दुनिया से बाहर निकलकर असली रिश्तों और दोस्तों के साथ समय बिताएं।
  • हॉबीज को समय दें: काम के अलावा कुछ ऐसा करें जो आपको खुशी दे, जैसे कोई खेल खेलना, संगीत या पेंटिंग।

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