Maulana Abdullah Saleem मौलाना अब्दुल्ला सलीम द्वारा सीएम योगी आदित्यनाथ की माँ के खिलाफ दिए गए आपत्तिजनक बयान से हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश है। जानिए क्या है पूरा मामला और क्या हुई कानूनी कार्रवाई।
योगी आदित्यनाथ की माता जी पर आपत्तिजनक टिप्पणी मौलाना अब्दुल्ला सलीम के बयान से बढ़ा तनाव
उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें मौलाना अब्दुल्ला सलीम कथित तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पूज्य माता जी के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते सुनाई दिए। इस बयान के बाद न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में हिंदू संगठनों और भाजपा समर्थकों के बीच भारी रोष देखा जा रहा है।


Maulana Abdullah Saleem क्या अब मां-बहनों को गाली देना राजनीति बन गया है? मौलाना अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग।
क्या है पूरा मामला? Maulana Abdullah Saleem
वायरल वीडियो में मौलाना अब्दुल्ला सलीम एक जनसभा या संबोधन के दौरान जोश में आकर मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए नजर आए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निजी जिंदगी और विशेष रूप से उनकी माता जी को लेकर ऐसी बातें कहीं जिन्हें “अत्यधिक आपत्तिजनक” और “अमर्यादित” माना जा रहा है।
जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर फैला, लोगों ने इसे मुख्यमंत्री की गरिमा और एक वृद्ध महिला के सम्मान पर हमला करार दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पहले ट्विटर) और फेसबुक पर मौलाना की गिरफ्तारी की मांग उठने लगी।
कानूनी कार्रवाई और पुलिस का एक्शन Maulana Abdullah Saleem
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस तुरंत हरकत में आई। हिंदू युवा वाहिनी और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं की शिकायतों के आधार पर मौलाना अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।
- FIR दर्ज: विभिन्न जिलों में मौलाना के खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने और सार्वजनिक शांति भंग करने की धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
- जांच जारी: पुलिस साइबर सेल वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई है।
सार्वजनिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं:
- भाजपा का रुख: भाजपा प्रवक्ताओं ने इसे “घृणित मानसिकता” का परिचायक बताया है। उनका कहना है कि विरोध नीति और राजनीति का होना चाहिए, न कि किसी की मां या परिवार का।
- हिंदू संगठनों का विरोध: कई शहरों में मौलाना के पुतले फूंके गए और उनके खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग की गई है। संगठनों का कहना है कि संतों और संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के परिवार को निशाना बनाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- विपक्ष की चुप्पी: हालांकि कुछ विपक्षी नेताओं ने व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचने की सलाह दी है, लेकिन इस विशिष्ट मामले पर राजनीतिक बयानबाजी काफी संतुलित रही है।
मर्यादा का उल्लंघन: एक चिंता का विषय
हाल के वर्षों में राजनीतिक विरोध के नाम पर नेताओं के परिवार, विशेषकर महिलाओं को निशाना बनाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो खुद एक सन्यासी हैं, उनके निजी जीवन और उनकी दिवंगत माता जी (या वृद्ध माता जी) के प्रति ऐसे शब्दों का प्रयोग समाज में वैमनस्य पैदा करता है।
लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन वह किसी की मानहानि या अपमान करने का लाइसेंस नहीं देती। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित सजा ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक सकती है।
मौलाना अब्दुल्ला सलीम का यह विवादित बयान उनके लिए बड़ी कानूनी मुसीबत बन सकता है। यूपी प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में शांति व्यवस्था बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद या समुदाय से हो। जनता अब पुलिस के अगले कदम और इस मामले में होने वाली गिरफ्तारी का इंतजार कर रही है।
Table of Contents
शोर्ट वीडियोज देखने के लिए VR लाइव से जुड़िये
हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए इस लींक पर क्लीक कीजिए VR LIVE
इन्स्टाग्राम की पोस्ट देखने के लिए हम से जुड़िये VR LIVE

