Saturday, February 28, 2026
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Middle East War ईरान ने बहरीन स्थित अमेरिकी नेवी के 5वें फ्लीट हेडक्वार्टर और अन्य ठिकानों पर मिसाइल हमला किया है

Middle East War ईरान ने बहरीन स्थित अमेरिकी नेवी के 5वें फ्लीट हेडक्वार्टर और अन्य ठिकानों पर मिसाइल हमला किया है। क्या शुरू हो गया है अमेरिका-ईरान युद्ध?

Middle East War मिडिल ईस्ट में महायुद्ध! ईरान ने बहरीन में अमेरिकी नेवी हेडक्वार्टर पर दागीं मिसाइलें, गूंजे खतरे के सायरन।

ईरान का सीधा प्रहार: बहरीन में अमेरिकी नेवी बेस पर मिसाइल हमला – अब क्या होगा?

मध्य पूर्व (Middle East) की स्थिति अब उस मुहाने पर पहुँच गई है जहाँ से वापसी का रास्ता बेहद मुश्किल नज़र आ रहा है। ताज़ा खबरों के मुताबिक, ईरान ने बहरीन समेत कई इलाकों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस हमले में अमेरिकी नौसेना के सबसे महत्वपूर्ण 5वें फ्लीट (Fifth Fleet) के हेडक्वार्टर को निशाना बनाया गया है।

Middle East War
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हमले का मंजर: आसमान में मिसाइलें और सायरन का शोर

बहरीन की राजधानी और तटीय इलाकों में रात भर खतरे के सायरन गूंजते रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आसमान में कई आग के गोले (मिसाइलें) दिखाई दिए जिन्हें इंटरसेप्ट करने की कोशिश की गई। बहरीन सरकार ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि अमेरिकी नेवी बेस पर मिसाइलें दागी गई हैं। यह हमला न केवल सैन्य क्षति पहुँचाने के लिए था, बल्कि अमेरिका को एक सीधा संदेश देने की कोशिश थी।

Middle East War
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बहरीन और 5वें फ्लीट का महत्व

बहरीन में स्थित अमेरिकी नेवी का 5वां फ्लीट (Fifth Fleet) अमेरिका की समुद्री शक्ति का केंद्र है।

  • यह फ्लीट फारस की खाड़ी (Persian Gulf), लाल सागर और हिंद महासागर के एक बड़े हिस्से की सुरक्षा करता है।
  • दुनिया का अधिकांश तेल व्यापार इसी समुद्री रास्ते से होता है।
  • इस बेस पर हमला करने का मतलब है कि ईरान ने अमेरिका की ‘दुखती रग’ पर हाथ रख दिया है।

Middle East War हमला क्यों हुआ? (Chronology of Conflict)

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की जड़ें पुरानी हैं, लेकिन हालिया घटनाओं ने आग में घी डालने का काम किया है:

  • इजरायल का समर्थन: ईरान का मानना है कि इजरायल द्वारा गाजा और लेबनान में किए जा रहे हमलों के पीछे अमेरिका का हाथ है।
  • प्रतिशोध की आग: ईरान लंबे समय से अपने कमांडरों की हत्या और अपने परमाणु ठिकानों पर होने वाले हमलों का बदला लेने की बात कह रहा था।
  • चेतावनी को नज़रअंदाज करना: अमेरिका ने बार-बार ईरान को प्रोक्सी संगठनों (जैसे हमास और हिजबुल्लाह) के जरिए हमला न करने की चेतावनी दी थी, लेकिन ईरान ने अब सीधे हमले का रास्ता चुना है।

अमेरिका की संभावित प्रतिक्रिया: क्या होगा अगला कदम?

अमेरिका के राष्ट्रपति और पेंटागन (Pentagon) इस हमले के बाद आपातकालीन बैठकें कर रहे हैं। अमेरिका की प्रतिक्रिया के दो रूप हो सकते हैं:

  • सीधा सैन्य हमला: अमेरिका ईरान के भीतर मौजूद मिसाइल लॉन्च पैड्स और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के ठिकानों को तबाह कर सकता है।
  • आर्थिक घेराबंदी: ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाए।

दुनिया के लिए खतरे की घंटी

यह युद्ध केवल दो या तीन देशों तक सीमित नहीं रहेगा।

  • तेल की कीमतें: अगर फारस की खाड़ी में जंग छिड़ती है, तो कच्चे तेल की सप्लाई रुक जाएगी। भारत जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम ₹200 प्रति लीटर के पार जा सकते हैं।
  • रूस और चीन की एंट्री: ईरान के रूस और चीन के साथ गहरे संबंध हैं। यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो ये दोनों महाशक्तियां भी इसमें कूद सकती हैं।

क्या शांति की कोई गुंजाइश है?

वर्तमान हालात को देखकर ऐसा लगता है कि कूटनीति (Diplomacy) अब हार चुकी है और बंदूकों ने बात करना शुरू कर दिया है। ईरान का यह कदम आत्मघाती भी हो सकता है और अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती भी। आने वाले 24 घंटे पूरी दुनिया की किस्मत तय करेंगे।

किन 7 ठिकानों/देशों पर हुआ हमला?

हालांकि अभी सटीक सूची और नुकसान का आकलन जारी है, लेकिन प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने निम्नलिखित क्षेत्रों को निशाना बनाया है:

  1. इजरायल: तेल अवीव और हाइफा जैसे प्रमुख शहरों पर बैलिस्टिक मिसाइलें।
  2. बहरीन: अमेरिकी नेवी के 5वें फ्लीट (Fifth Fleet) का हेडक्वार्टर।
  3. इराक: इरबिल और अन्य क्षेत्रों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने।
  4. सीरिया: इजरायल और अमेरिका समर्थित समूहों के ठिकाने।
  5. यूएई (UAE): रणनीतिक ठिकानों और बंदरगाहों के पास धमाके।
  6. सऊदी अरब: तेल रिफाइनरियों और सैन्य हवाई अड्डों पर ड्रोन हमले।
  7. यमन/लाल सागर: हुती विद्रोहियों के साथ मिलकर समुद्री जहाजों और गठबंधन सेना पर हमला।

‘आयरन डोम’ और ‘थाड’ बनाम ईरानी मिसाइलें

जैसे ही ईरान ने हमले शुरू किए, पूरे क्षेत्र का आसमान मिसाइलों और इंटरसेप्टर धमाकों से भर गया। इजरायल का आयरन डोम और अमेरिका का थाड (THAAD) डिफेंस सिस्टम सक्रिय हो गया। बहरीन और इराक में सायरन की आवाजों ने लोगों को बंकरों में जाने पर मजबूर कर दिया।



Middle East Conflict क्या तीसरे विश्व युद्ध की आहट है? ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़े संघर्ष की पूरी कहानी।

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