Navratri 2026 Celebration: एक देश, नौ रातें और भक्ति के अनेक रंग! जानें भारत के अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाई जाती है नवरात्रि
Navratri 2026 Celebration: भारत के हर राज्य में नवरात्रि का एक अलग अंदाज़ है! गुजरात के गरबा से लेकर बंगाल की दुर्गा पूजा और मैसूर के शाही दशहरे तक, जानें नवरात्रि मनाने के विविध और दिलचस्प तरीके।
विविधता में एकता का प्रतीक – भारत की विभिन्न नवरात्रि परंपराएं
भारत एक ऐसा देश है जहां हर कोस पर पानी और हर चार कोस पर वाणी बदल जाती है। ठीक उसी तरह, यहाँ त्योहारों को मनाने के रंग भी बदल जाते हैं। हिंदू धर्म के सबसे बड़े पर्वों में से एक ‘नवरात्रि’ इसका सबसे सटीक उदाहरण है। चैत्र हो या शारदीय नवरात्रि, पूरा देश नौ दिनों तक शक्ति की भक्ति में डूबा रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस उत्तर भारत में लोग नौ दिनों का उपवास रखते हैं, वहीं पूर्व भारत में इसे एक भव्य उत्सव के रूप में मनाया जाता है? आइए, 2026 की नवरात्रि से पहले भारत के इस सांस्कृतिक सफर पर चलते हैं।

एक देश, नौ रातें और भक्ति के अनगिनत रंग! 🚩 गुजरात की गलियों से लेकर बंगाल के पंडालों तक, जानें भारत के अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाई जाती है नवरात्रि।
1. गुजरात: गरबा और डांडिया की धूम

गुजरात में नवरात्रि का मतलब है—रंग-बिरंगी चनिया-चोली, केडिया और संगीत की थाप इसके साथ साथ फूलो के गरबे की मानता रखी जाती है। यहाँ माँ अंबा की आराधना ‘गरबा’ नृत्य के माध्यम से की जाती है। मिट्टी के एक छिद्रित घड़े (जिसे गरबो कहा जाता है) में दीया जलाकर उसके चारों ओर नृत्य करना ब्रह्मांड की ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यहाँ की रातें कभी नहीं सोतीं।
2. पश्चिम बंगाल: भव्य दुर्गा पूजा

बंगालियों के लिए नवरात्रि ‘दुर्गा पुजो’ है। यहाँ षष्ठी से लेकर दशमी तक उत्सव का चरम होता है। विशाल और कलात्मक पंडाल, ढाक की आवाज और ‘धुनाची नाच’ यहाँ की विशेषता है। यहाँ माँ दुर्गा को ‘बेटी’ के रूप में पूजा जाता है जो अपने मायके आती हैं। सिंदूर खेला की रस्म यहाँ के उत्सव को भावुक और जीवंत बना देती है।
3. हिमाचल और पंजाब: कंजक पूजन और उपवास

उत्तर भारत के इन राज्यों में नवरात्रि शुद्धता और संयम का पर्व है। लोग नौ दिनों तक उपवास रखते हैं और ‘अखंड ज्योति’ जलाते हैं। अष्टमी या नवमी के दिन ‘कंजक’ (कन्या पूजन) किया जाता है, जहाँ छोटी बच्चियों को देवी का रूप मानकर उनके पैर धोए जाते हैं और उन्हें हलवा-पूरी का प्रसाद खिलाया जाता है। कुल्लू का दशहरा पूरी दुनिया में मशहूर है।
4. कर्नाटक (मैसूर): शाही दशहरा (Nada Habba)

मैसूर में नवरात्रि को ‘नद हब्बा’ कहा जाता है। यहाँ का मुख्य आकर्षण ‘मैसूर पैलेस’ है, जिसे हज़ारों बल्बों से रोशन किया जाता है। दशमी के दिन ‘जम्बू सवारी’ (हाथियों का जुलूस) निकाला जाता है। यह परंपरा राजाओं के समय से चली आ रही है और बेहद भव्य होती है।
5. तमिलनाडु: गोलू (Golu/Kolu) की परंपरा

दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में नवरात्रि मनाने का तरीका बिल्कुल अनोखा है। यहाँ घरों में सीढ़ियों पर मिट्टी की गुड़िया और मूर्तियों को सजाया जाता है, जिसे ‘बोंमई गोलू’ कहते हैं। इसमें पौराणिक कथाओं और सामाजिक जीवन के दृश्यों को दर्शाया जाता है। शाम को महिलाएं एक-दूसरे के घर जाकर हल्दी-कुमकुम और तांबूलम का आदान-प्रदान करती हैं।
6. केरल: विद्यारंभम और सरस्वती पूजा

केरल में नवरात्रि के अंतिम तीन दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यहाँ देवी सरस्वती की पूजा पर विशेष जोर दिया जाता है। छोटे बच्चों को अक्षर ज्ञान (विद्यारंभम) की शुरुआत इसी दिन कराई जाती है। पुस्तकों और औजारों की पूजा करना यहाँ की मुख्य परंपरा है।
7. तेलंगाना: बथुकम्मा (Bathukamma)


तेलंगाना में नवरात्रि के दौरान ‘बथुकम्मा’ उत्सव मनाया जाता है, जो फूलों का त्योहार है। महिलाएं सुंदर मौसमी फूलों से सात परतों वाला गोपुरम बनाती हैं और उसके चारों ओर लोक गीत गाते हुए नृत्य करती हैं। यह प्रकृति और स्त्री शक्ति की पूजा का अनूठा संगम है।
चाहे दक्षिण का ‘गोलू’ हो या पश्चिम का ‘गरबा’, माध्यम अलग हो सकते हैं, लेकिन गंतव्य एक ही है—शक्ति की उपासना और बुराई पर अच्छाई की जीत का संकल्प। भारत की यही विविधता हमें एक सूत्र में पिरोती है। 2026 की नवरात्रि में आप इनमें से कौन सा रंग देखना चाहेंगे?
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