Parliament Vande Mataram Debate LIVE: बंगाल चुनाव की आहट से गरमायी संसद, पीएम मोदी की चर्चा पर प्रियंका गांधी का सीधा हमला
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर संसद में हुई बहस का पूरा विवरण जानें। पीएम मोदी की विशेष चर्चा, प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया, बंगाल चुनाव से जुड़ी राजनीतिक गर्मी और आज के लाइव अपडेट्स—सब कुछ एक जगह।
वंदे मातरम् पर संसद में गरमायी बहस: राजनीति, इतिहास और 150 साल की विरासत
संसद का शीतकालीन सत्र इस बार खासा चर्चित हो गया है, और इसकी वजह है—वंदे मातरम् के 150 साल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में इस ऐतिहासिक अवसर पर विशेष चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि कैसे बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 7 नवंबर 1875 को ‘बंगदर्शन’ पत्रिका में प्रकाशित यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बन गया था।
पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि वह उर्जा है जिसने लाखों भारतीयों को अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ खड़े होने की शक्ति दी। उन्होंने इसके साहित्यिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी महत्व का विस्तार से उल्लेख किया। उनका कहना था कि आज जब देश विकास के नए युग में है, तब हमें अपने सांस्कृतिक प्रतीकों को और सशक्त रूप से सामने लाना चाहिए।

प्रियंका गांधी का पलटवार
पीएम मोदी के भाषण के तुरंत बाद विपक्ष ने सत्तापक्ष पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रीय गीतों पर चर्चा होने में कुछ गलत नहीं, लेकिन इसे चुनावी मुद्दा बनाना सही नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल चुनाव से पहले केंद्र सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर भावनाएँ भड़का रही है।
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि देश की जनता बेरोजगारी, महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर जवाब चाहती है, लेकिन सरकार ध्यान भटकाने वाली बहसें छेड़ रही है।

बंगाल चुनाव का असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि वंदे मातरम् की चर्चा केवल संसद तक सीमित नहीं है; इसके पीछे आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का भी गहरा असर दिखाई देता है।
बंगाल हमेशा से सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से जागरूक राज्य रहा है—और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय वहीं के थे। ऐसे में वंदे मातरम् से जुड़ा कोई भी मुद्दा सीधे बंगाल की राजनीति को प्रभावित करता है।
सत्तापक्ष इसे राष्ट्रगौरव से जोड़ रहा है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी रणनीति बता रहा है। यही वजह है कि संसद की बहस में इतिहास और राजनीति दोनों की गूंज सुनाई दे रही है।
वंदे मातरम्—150 साल की विरासत
संसद की चर्चा के दौरान कई सांसदों ने यह भी कहा कि वंदे मातरम् भारत की आत्मा का स्वर है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत स्कूलों, सभाओं, सत्याग्रहों और आंदोलनों में जोश भरता था। 150 साल बाद भी इसकी प्रासंगिकता उतनी ही मजबूत है। यह हमारी सांस्कृतिक पहचान, एकता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है।
सदन में हुई यह बहस इतिहास, राजनीति और भावनाओं का मिश्रण बन गई है। जहाँ एक ओर राष्ट्रगौरव का जश्न है, वहीं दूसरी ओर चुनावी आरोपों का दौर भी। लेकिन इतना तय है—वंदे मातरम् आज भी उतना ही शक्तिशाली है, जितना स्वतंत्रता संग्राम के समय था। और देश इससे गहरा जुड़ाव महसूस करता है।
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PM MODI Vande Mataram अंग्रेजी षडयंत्र के बीच बंकिम बाबू की कलम से जन्मा ‘वंदेमातरम्’
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