अंतर्मुखी (Introvert) या बहिर्मुखी (Extrovert) होना कोई गलती (Mistake) नहीं है | Personality Traits
| Personality Traits यह आपके व्यक्तित्व का एक स्वाभाविक हिस्सा है। यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी की आंखों का रंग भूरा होता है और किसी का काला। मनोविज्ञान के अनुसार, यह बस इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपनी ‘ऊर्जा’ (Energy) कहाँ से पाते हैं। क्या अंतर्मुखी होना एक गलती है? जानें ‘Introvert vs Extrovert’ की चुनौतियों और खूबियों के बारे में। अपनी पर्सनैलिटी को समझें और इसे अपनी सफलता का जरिया बनाएं।
क्या ये कोई कमी है?
बिल्कुल नहीं। समाज अक्सर ‘बहिर्मुखी’ (Extrovert) लोगों को ज्यादा पसंद करता है क्योंकि वे जल्दी घुल-मिल जाते हैं, लेकिन दुनिया को दोनों तरह के लोगों की जरूरत है।
Personality Traits क्या यह कोई गलती है?
मनोविज्ञान कहता है कि हमारा दिमाग कैसे काम करता है, यह काफी हद तक जन्मजात होता है। अंतर्मुखी व्यक्ति का दिमाग ‘डोपामाइन’ (Dopamine) के प्रति अधिक संवेदनशील होता है, इसलिए उन्हें बहुत ज्यादा शोर-शराबा तनाव दे सकता है। वहीं बहिर्मुखी लोगों को सक्रिय रहने के लिए बाहरी स्टिमुलेशन की जरूरत होती है। इसलिए, अपने स्वभाव के लिए खुद को दोष देना वैसा ही है जैसे अपनी लंबाई या आंखों के रंग के लिए खुद को दोषी ठहराना।
1. अंतर्मुखी (Introvert) होना गलती क्यों नहीं है? Personality Traits
अंतर्मुखी लोग गलत नहीं होते, वे बस ‘अकेलेपन’ में रिचार्ज होते हैं।
- खूबी: वे बहुत अच्छे ऑब्जर्वर (Observer) और गहरे विचारक होते हैं।
- गलतफहमी: लोग समझते हैं कि वे ‘शर्मीले’ या ‘घमंडी’ हैं, जबकि वे बस बिना वजह बोलना पसंद नहीं करते।
- सफलता: अल्बर्ट आइंस्टीन, बिल गेट्स और महात्मा गांधी जैसे महान लोग अंतर्मुखी थे।
- समस्याएँ (Problems): इन्हें ‘स्मॉल टॉक’ (बेमतलब की बातें) करना थका देता है। किसी अंजान ग्रुप में बात शुरू करना इनके लिए पहाड़ तोड़ने जैसा होता है। लोग इन्हें अक्सर ‘शर्मीला’, ‘अहंकारी’ या ‘अजीब’ समझ लेते हैं।
- ताकत (Strength): ये बहुत गहरे विचारक और अच्छे सुनने वाले (Listeners) होते हैं। वे बोलने से पहले सोचते हैं, जिससे उनकी बातों में वजन होता है।
2. बहिर्मुखी (Extrovert) होना गलती क्यों नहीं है? Personality Traits
बहिर्मुखी लोग गलत नहीं होते, वे ‘लोगों’ के बीच रहकर ऊर्जा पाते हैं।
- खूबी: वे टीम वर्क में बेहतरीन होते हैं और बातों को स्पष्ट रखने में माहिर होते हैं।
- गलतफहमी: लोग समझते हैं कि वे बहुत ज्यादा बोलते हैं या दिखावा करते हैं, जबकि वे बस सामाजिक मेलजोल का आनंद लेते हैं।
- समस्याएँ (Problems): इन्हें अकेले रहने से घबराहट या बोरियत महसूस हो सकती है। कई बार ये बिना सोचे-समझे बोल देते हैं, जिससे बाद में पछतावा हो सकता है। लोग इन्हें ‘दिखावा करने वाला’ या ‘अटेंशन सीकर’ समझ सकते हैं।
- ताकत (Strength): ये बेहतरीन नेटवर्कर होते हैं। किसी भी नए माहौल में ये बहुत जल्दी ढल जाते हैं और टीम को साथ लेकर चलने की अद्भुत क्षमता रखते हैं।

असली समस्या कहाँ आती है?
गलती तब होती है जब आप अपने स्वभाव के खिलाफ जाने की कोशिश करते हैं:
- दबाव में जीना: अगर आप एक इंट्रोवर्ट हैं और खुद को जबरदस्ती ‘पार्टी की जान’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, तो आप मानसिक रूप से थक जाएंगे।
- तुलना करना: यह सोचना कि “काश मैं उसकी तरह बातूनी होता” या “काश मैं उसकी तरह शांत होता” आपकी सेल्फ-कॉन्फिडेंस को कम करता है।
- विकास को रोकना: अगर आप इंट्रोवर्ट होने के नाम पर जरूरी जगहों (जैसे ऑफिस या इंटरव्यू) पर बोलना बंद कर दें, या एक्सट्रोवर्ट होने के नाम पर दूसरों को बोलने का मौका न दें, तो वह समस्या है।
आप जैसे भी हैं, यूनिक हैं
- अगर आप Introvert हैं, तो अपनी गहराई और सोच को अपनी ताकत बनाएं।
- अगर आप Extrovert हैं, तो अपनी नेटवर्किंग और उत्साह को अपनी ताकत बनाएं।
सबसे सफल लोग वे होते हैं जो ‘Ambiverts’ (उभयमुखी) बनने की कोशिश करते हैं—यानी जरूरत पड़ने पर बोलना जानते हैं और जरूरत पड़ने पर शांत रहकर सोचना भी।
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