PM Modi in Gujarat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी 2026 को गुजरात के सोमनाथ मंदिर का दौरा करेंगे। वे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत आयोजित भव्य ‘शौर्य यात्रा’ का नेतृत्व करेंगे, जिसमें 108 घोड़े शामिल होंगे। जानिए उनके तीन दिवसीय गुजरात दौरे और सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व के बारे में।
आस्था के प्रतीक सोमनाथ महादेव के दरबार में पीएम मोदी!
सोमनाथ (गुजरात): आस्था, इतिहास और स्वाभिमान का भव्य उत्सव
PM Modi in Gujarat प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर गुजरात की धरा पर पधार रहे हैं। 10 जनवरी 2026 से शुरू हो रहे उनके तीन दिवसीय गुजरात दौरे का सबसे प्रमुख आकर्षण 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर में उनकी उपस्थिति होगी। प्रधानमंत्री न केवल प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के दर्शन करेंगे, बल्कि एक ऐतिहासिक और भव्य ‘शौर्य यात्रा’ का नेतृत्व भी करेंगे।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की शुरुआत गिर सोमनाथ जिले के वेरावल स्थित विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में चार दिवसीय ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ की शुरुआत गुरुवार, 8 जनवरी 2026 को हो चुकी है। यह पर्व भारतीय संस्कृति की अदम्य इच्छाशक्ति और आस्था की विजय का प्रतीक है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों को इस उत्सव के लिए दुल्हन की तरह सजाया गया है। भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया है और पूरा वातावरण ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से गूंज रहा है।
PM Modi in Gujarat 11 जनवरी: शौर्य यात्रा और पीएम मोदी
अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर पहुंचेंगे। पूजा-अर्चना के बाद, वे ‘शौर्य यात्रा’ का नेतृत्व करेंगे। यह यात्रा अपने आप में बेहद अनूठी और भव्य होगी।

इस ‘शौर्य यात्रा’ की सबसे बड़ी विशेषता इसमें शामिल होने वाले 108 घोड़े हैं। यह 1 किलोमीटर लंबा रोड शो होगा, जो न केवल राजसी होगा बल्कि भारतीय परंपरा में ‘शौर्य’ (वीरता) और ‘धर्म’ के रक्षण का संदेश भी देगा। 108 की संख्या हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है, और घोड़ों को शक्ति और वेग का प्रतीक माना जाता है। इस यात्रा के जरिए सोमनाथ के उस गौरवशाली इतिहास को याद किया जाएगा, जिसने सदियों तक विदेशी आक्रांताओं का डटकर मुकाबला किया।
PM Modi in Gujarat आस्था बनाम आतंक: सोमनाथ का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी का सोमनाथ से गहरा और पुराना नाता है। वे श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। अपने पिछले दौरों और भाषणों में, पीएम मोदी ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मानव आस्था की उस शक्ति का प्रतीक है जिसे आतंक या हिंसा से नहीं मिटाया जा सकता।
इतिहास गवाह है कि इस मंदिर को कई बार लूटा गया और तोड़ा गया, लेकिन हर बार यह मंदिर और अधिक भव्यता के साथ पुनर्निर्मित हुआ। पीएम मोदी का यह दौरा उस संकल्प को दोहराने का अवसर है कि “सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं।” 11 जनवरी का दिन उन तमाम हुतात्माओं और भक्तों को श्रद्धांजलि देने का भी दिन होगा जिन्होंने इस मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
विकास और विरासत का संगम
प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में सोमनाथ मंदिर परिसर का कायाकल्प किया गया है। समुद्र दर्शन पथ हो या पार्वती माता मंदिर का शिलान्यास, केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर सोमनाथ को एक विश्वस्तरीय तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया है। ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ इसी विकास और विरासत के संगम को प्रदर्शित करता है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए गिर सोमनाथ जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। एसपीजी (SPG) और गुजरात पुलिस ने मंदिर परिसर और यात्रा मार्ग को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया है। वेरावल और आसपास के इलाकों में यातायात को नियंत्रित करने के लिए विशेष रूट डायवर्ट किए गए हैं, ताकि आम श्रद्धालुओं को भी कम से कम असुविधा हो।
11 जनवरी को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 108 घोड़ों के साथ ‘शौर्य यात्रा’ में निकलेंगे, तो वह दृश्य केवल एक राजनीतिक या धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि भारत के उस स्वाभिमान का उद्घोष होगा जो कहता है कि निर्माण की शक्ति, विनाश की शक्ति से हमेशा बड़ी होती है। गुजरात और देश भर के श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए उत्सुक हैं।
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