Wednesday, March 11, 2026
HomeDharmaSheetala Ashtami 2026 : कब है बसोड़ा? जानें मां शीतला को प्रसन्न...

Sheetala Ashtami 2026 : कब है बसोड़ा? जानें मां शीतला को प्रसन्न करने वाले भोग और पूजा की प्राचीन परंपराएं

Sheetala Ashtami 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और बासी भोजन के भोग का महत्व जानें। शीतला माता की पूजा से कैसे दूर होते हैं रोग और क्या है बसोड़ा पर्व की खास परंपराएं?

Sheetala Ashtami 2026 आ रही है शीतला अष्टमी! माँ शीतला के प्राचीन मंदिर कहा कहा है?

Sheetala Ashtami 2026: आरोग्य और शीतलता का पर्व ‘बसोड़ा’

हिंदू पंचांग के अनुसार, होली के आठवें दिन शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर भारत, राजस्थान और गुजरात में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इसे ‘बसोड़ा’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन माता को ‘बासी’ भोजन अर्पित करने की परंपरा है।

Sheetala Ashtami 2026
Sheetala Ashtami 2026

शीतला अष्टमी या बसोड़ा का त्यौहार मुख्य रूप से भारत के राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। विशेष रूप से राजस्थान में इस पर्व का बड़ा सांस्कृतिक महत्व है, जहाँ चाकसू जैसे स्थानों पर शीतला माता के विशाल मेले लगते हैं और मारवाड़ व मेवाड़ा क्षेत्रों में इसे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। इसके अतिरिक्त, गुजरात और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी लोग आरोग्य की देवी माँ शीतला को प्रसन्न करने के लिए बासी भोजन (बसोड़ा) का भोग लगाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

उत्तर भारत में माँ शीतला के कई प्राचीन और सिद्ध मंदिर हैं। यहाँ माँ शीतला के सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध मंदिरों की सूची

गुरुग्राम (हरियाणा): गुड़गांव का शीतला माता मंदिर देश भर में सबसे प्रसिद्ध है। इसे ‘शक्तिपीठ’ के समान माना जाता है और यहाँ साल भर, खासकर नवरात्रि और चैत्र मास में लाखों भक्त आते हैं।

चाकसू (राजस्थान): जयपुर के पास चाकसू में स्थित यह मंदिर राजस्थान का सबसे बड़ा शीतला माता मंदिर है। यहाँ शीतला अष्टमी (बसोड़ा) के दिन विशाल मेला लगता है, जिसे ‘सील की डूंगरी’ के नाम से जाना जाता है।

कौशांबी (उत्तर प्रदेश): कड़ा धाम में स्थित कड़ा मानिकपुर का शीतला मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। गंगा किनारे स्थित इस मंदिर की बहुत गहरी मान्यता है।

पश्चिम बंगाल (कोलकाता): कोलकाता के बागबाजार और अन्य क्षेत्रों में भी शीतला माता के बहुत पुराने मंदिर हैं। बंगाल में उन्हें रोग-निवारिणी देवी के रूप में बहुत श्रद्धा से पूजा जाता है।

जालंधर (पंजाब): यहाँ भी माँ शीतला का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है जिसे देखने और दर्शन करने दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

Sheetala Ashtami 2026
Sheetala Ashtami 2026

Sheetala Ashtami 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

साल 2026 में शीतला अष्टमी की तिथि को लेकर भक्तों में उत्साह है।

  • शीतला अष्टमी तिथि: 11 मार्च, 2026 (बुधवार)
  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 10 मार्च, 2026 को रात के समय।
  • अष्टमी तिथि समाप्त: 11 मार्च, 2026 की शाम तक।
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: सूर्योदय से लेकर दोपहर तक का समय मां शीतला की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

बसोड़ा पर्व का महत्व: वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलू

मां शीतला को स्वच्छता और स्वास्थ्य की देवी माना जाता है। उनके एक हाथ में झाड़ू (स्वच्छता का प्रतीक) और दूसरे हाथ में कलश (शीतलता का प्रतीक) होता है।

  1. आरोग्य की प्राप्ति: माना जाता है कि शीतला माता की पूजा करने से चेचक (Smallpox), खसरा और आंखों की बीमारियां दूर होती हैं।
  2. ऋतु परिवर्तन का संदेश: यह पर्व सर्दियों की विदाई और गर्मियों के आगमन का संकेत है। इस दिन के बाद से ताजा और गर्म भोजन करने की सलाह दी जाती है और बासी भोजन का त्याग कर दिया जाता है।
  3. शीतलता का आशीर्वाद: मां शीतला अपने भक्तों के जीवन में ठंडक और शांति प्रदान करती हैं।

मां शीतला के विशेष भोग (बसोड़ा का प्रसाद)

शीतला अष्टमी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। सारा भोजन सप्तमी की रात को ही बना लिया जाता है।

  • मीठे चावल (Oliya): दही और चीनी के साथ पकाए गए ठंडे चावल माता को अत्यंत प्रिय हैं।
  • पूड़ी और सब्जी: रात को बनाई गई पूड़ी और आलू की सब्जी।
  • राबड़ी और दही: राजस्थान और हरियाणा में बाजरे की राबड़ी और ताजे दही का भोग लगाया जाता है।
  • गुलगुले और पुए: आटे और गुड़ से बने गुलगुले इस दिन विशेष रूप से बनाए जाते हैं।
  • भीगे हुए चने: कच्चे चने भिगोकर माता को अर्पित किए जाते हैं।
Sheetala Ashtami 2026
Sheetala Ashtami 2026

पूजा विधि और खास परंपराएं

शीतला अष्टमी की पूजा अन्य देवी-देवताओं की पूजा से थोड़ी भिन्न होती है:

  1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर ठंडे पानी से स्नान करें।
  2. दीपक नहीं जलाते: कई क्षेत्रों में मां शीतला की पूजा में अगरबत्ती या दीपक नहीं जलाया जाता (अग्नि का प्रयोग वर्जित है)। केवल जल और ठंडे नैवेद्य से पूजा होती है।
  3. जल अर्पण: माता की मूर्ति पर जल चढ़ाएं और वही जल थोड़ा बचाकर घर लाएं। घर के कोनों में इस जल का छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
  4. बासी भोजन ग्रहण करना: पूजा के बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर वही बासी भोजन (प्रसाद) ग्रहण करते हैं।

विशेष मान्यता: इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। मान्यता है कि जिस घर में स्वच्छता और भक्ति होती है, वहां मां शीतला का वास होता है।

सावधानी और नियम Sheetala Ashtami 2026

  • इस दिन घर में ताजा भोजन न बनाएं।
  • गरम पानी से स्नान न करें।
  • घर में सुई-धागा या कैंची जैसे धारदार औजारों का प्रयोग करने से बचें।

व्हाइट तारा मंत्र (White Tara Mantra): चिंता और मानसिक तनाव से मुक्ति का अचूक आध्यात्मिक मार्ग

शोर्ट वीडियोज देखने के लिए VR लाइव से जुड़िये

हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए इस लींक पर क्लीक कीजिए VR LIVE

इन्स्टाग्राम की पोस्ट देखने के लिए हम से जुड़िये VR LIVE

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments