Solar Eclipse 2026 साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण लग चुका है। जानें ‘रिंग ऑफ फायर’ यानी वलयाकार सूर्य ग्रहण का समय, सूतक काल और आपकी राशि पर इसका प्रभाव। क्या यह भारत में दिखाई देगा? पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
Solar Eclipse 2026 आसमान में छिड़ा सूरज और चाँद का खेल!

खगोलीय घटना: जब आसमान में बना ‘आग का गोला’
ब्रह्मांड की हलचलों में सूर्य ग्रहण हमेशा से ही वैज्ञानिकों और ज्योतिषियों के लिए कौतूहल का विषय रहा है। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज लग चुका है। इस बार का ग्रहण बेहद खास है क्योंकि यह एक ‘वलयाकार सूर्य ग्रहण’ (Annular Solar Eclipse) है, जिसे दुनिया भर में ‘रिंग ऑफ फायर’ के नाम से जाना जाता है।
इस घटना के दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से नहीं ढक पाता, बल्कि सूर्य के बीचों-बीच आकर उसे एक काली बिंदी जैसा बना देता है, जिससे सूर्य के किनारे एक चमकती हुई अंगूठी या ‘छल्ले’ की तरह दिखाई देते हैं।
Solar Eclipse 2026 क्या होता है ‘रिंग ऑफ फायर’?
विज्ञान के अनुसार, जब चंद्रमा पृथ्वी से अपनी अधिकतम दूरी पर होता है और सूर्य व पृथ्वी के बीच आ जाता है, तो उसका आकार सूर्य से छोटा दिखाई देता है। इस स्थिति में चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढकता है और बाहरी किनारे चमकते रहते हैं। इसी सुनहरे छल्ले को ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। इसे देखना जितना रोमांचक है, इसके नियम उतने ही सावधान करने वाले हैं।
समय और समाप्ति की अवधि
ज्योतिषीय गणना और खगोलीय कैलेंडर के अनुसार, यह ग्रहण कई घंटों तक चलने वाला है।
- ग्रहण का आरंभ: भारतीय समयानुसार (IST), ग्रहण सुबह के समय शुरू हो चुका है।
- रिंग ऑफ फायर का चरम: ग्रहण अपने मध्य काल में सबसे अधिक प्रभावी होगा जब सूर्य पूरी तरह से एक अंगूठी जैसा दिखेगा।
- ग्रहण की समाप्ति: ‘रिंग ऑफ फायर’ का साया धीरे-धीरे कम होगा और दोपहर के बाद यह पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
(नोट: ग्रहण की दृश्यता भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करती है। यदि यह आपके क्षेत्र में दृश्य नहीं है, तो सूतक के नियम लागू नहीं होंगे।)
Solar Eclipse 2026 समय और समाप्ति की अवधि
ज्योतिषीय गणना और खगोलीय कैलेंडर के अनुसार, यह ग्रहण कई घंटों तक चलने वाला है।
- ग्रहण का आरंभ: भारतीय समयानुसार (IST), ग्रहण सुबह के समय शुरू हो चुका है।
- रिंग ऑफ फायर का चरम: ग्रहण अपने मध्य काल में सबसे अधिक प्रभावी होगा जब सूर्य पूरी तरह से एक अंगूठी जैसा दिखेगा।
- ग्रहण की समाप्ति: ‘रिंग ऑफ फायर’ का साया धीरे-धीरे कम होगा और दोपहर के बाद यह पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
(नोट: ग्रहण की दृश्यता भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करती है। यदि यह आपके क्षेत्र में दृश्य नहीं है, तो सूतक के नियम लागू नहीं होंगे।)
राशि चक्र पर प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ‘आत्मा’ और ‘राजा’ का कारक माना गया है। सूर्य पर ग्रहण लगने का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है:
- मेष, सिंह और धनु: इन राशियों के लिए यह समय थोड़ा संघर्षपूर्ण हो सकता है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
- वृषभ, कन्या और मकर: आर्थिक लाभ के योग बन सकते हैं, लेकिन वाणी पर संयम रखें।
- मिथुन, तुला और कुंभ: करियर में नए अवसर मिल सकते हैं, सावधानी से निर्णय लें।
- कर्क, वृश्चिक और मीन: मानसिक तनाव रह सकता है, योग और ध्यान का सहारा लें।
ग्रहण के बाद क्या करें?
जैसे ही ‘रिंग ऑफ फायर’ का साया समाप्त हो, शास्त्रों के अनुसार शुद्धिकरण आवश्यक है:
- पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
- स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें।
- जरूरतमंदों को दान (अनाज, गुड़, तिल) देना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- अपने इष्ट देव की पूजा-अर्चना करें।
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