Tuesday, February 24, 2026
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Why Dogs are Divine: भैरव की सवारी और युधिष्ठिर के साथी—हिंदू मान्यताओं में कुत्तों का स्थान देवताओं के करीब

Why Dogs are Divine: हिंदू धर्म में कुत्ते को केवल पालतू जानवर नहीं, बल्कि भगवान का दर्जा दिया गया है। छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मंदिर है ‘कुकुरदेव मंदिर’, जहाँ कुत्ते की पूजा की जाती है। जानिए कुत्ते का धार्मिक महत्व, महाभारत से जुड़ा किस्सा और भैरव बाबा से उनका संबंध। हिंदू धर्म में कुत्ते को केवल एक वफादार जानवर नहीं, बल्कि भैरव का वाहन, वेदों का प्रतीक और यमराज का दूत माना गया है। महाभारत में युधिष्ठिर की अंतिम यात्रा से लेकर भगवान दत्तात्रेय तक, जानिए क्यों हिंदू संस्कृति में कुत्तों का स्थान इतना खास है।

Why Dogs are Divine सिर्फ वफादार साथी नहीं, ‘धर्म’ का रूप है कुत्ता जानिए हिंदू संस्कृति में इसका आध्यात्मिक महत्व

कुत्ते सिर्फ ‘Pet’ नहीं, ‘धर्म’ के प्रतीक हैं: जानिए उन 10 देवताओं को जिनके लिए श्वान थे सबसे प्रिय

भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में ‘वासुदेव सर्वम्’ (सब कुछ ईश्वर है) की भावना निहित है। यही कारण है कि यहाँ गाय, हाथी, नंदी और यहाँ तक कि कुत्ते (Dogs) को भी पूजनीय माना गया है। अक्सर लोग कुत्ते को केवल भगवान काल भैरव से जोड़कर देखते हैं, लेकिन हमारे शास्त्रों में ऐसे 10 प्रमुख देवता और पौराणिक पात्र हैं जिनका कुत्तों से गहरा और पवित्र रिश्ता रहा है।

यहाँ जानिए उन 10 ईश्वरीय स्वरूपों के बारे में जिनका कुत्तों के प्रति प्रेम यह सिखाता है कि “जीव सेवा ही शिव सेवा है।”

1. भगवान काल भैरव (Kaal Bhairav): भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव का सबसे प्रसिद्ध वाहन कुत्ता (श्वान) है। मंदिरों में काल भैरव की मूर्ति के साथ हमेशा कुत्ता दिखाई देता है। मान्यता है कि काले कुत्ते को रोटी खिलाने से भगवान भैरव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की रक्षा करते हैं।

Why Dogs are Divine
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2. भगवान दत्तात्रेय (Lord Dattatreya): त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के संयुक्त अवतार भगवान दत्तात्रेय की किसी भी तस्वीर को देखें, उनके पीछे हमेशा 4 कुत्ते दिखाई देते हैं। ये साधारण कुत्ते नहीं हैं, बल्कि ये चारों वेदों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद) का प्रतीक माने जाते हैं। यह दर्शाता है कि वेदों का ज्ञान सबसे वफादार मित्र की तरह हमारा मार्गदर्शन करता है।

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3. धर्मराज युधिष्ठिर (Yudhisthira): महाभारत की कथा के अनुसार, जब पांडव हिमालय के रास्ते स्वर्ग (सशरीर) जा रहे थे, तो एक कुत्ता उनके साथ हो लिया। द्रौपदी और बाकी भाई रास्ते में गिरते गए, लेकिन कुत्ता अंत तक युधिष्ठिर के साथ चला। जब स्वर्ग के द्वार पर इंद्र ने कुत्ते को प्रवेश देने से मना किया, तो युधिष्ठिर ने कहा, “यह मेरा वफादार साथी है, अगर यह अंदर नहीं जाएगा, तो मैं भी स्वर्ग ठुकरा दूंगा।” बाद में पता चला कि वह कुत्ता स्वयं धर्मराज थे जो युधिष्ठिर की परीक्षा ले रहे थे।

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4. यमराज (Lord Yama): मृत्यु के देवता यमराज के पास दो खूंखार लेकिन वफादार कुत्ते हैं—श्यामा और शबल। ऋग्वेद के अनुसार, ये दोनों चार आंखों वाले कुत्ते हैं जो यमलोक के द्वार की रक्षा करते हैं और आत्माओं का मार्गदर्शन करते हैं।

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5. इंद्रदेव और सरमा (Indra and Sarama): ऋग्वेद में ‘सरमा’ नाम की एक दिव्य कुतिया का उल्लेख है, जिसे ‘देव-शुनी’ (देवताओं की कुतिया) कहा जाता है। वह इंद्रदेव की मदद करती थी। जब ‘पाणिस’ नामक असुरों ने इंद्र की गायें चुरा ली थीं, तो सरमा ने ही अपनी सूझबूझ से उन गायों को खोज निकाला था। माना जाता है कि धरती के सभी कुत्ते सरमा की ही संतान हैं (सारमेय)।

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6. खंडोबा (Lord Khandoba): महाराष्ट्र और कर्नाटक में पूजे जाने वाले भगवान खंडोबा (जो शिव के अवतार माने जाते हैं) का कुत्तों से विशेष लगाव है। उनके मंदिरों में कुत्तों को बहुत सम्मान दिया जाता है और उन्हें भगवान का रूप मानकर पूजा जाता है।

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7. भगवान शिव (आदि शंकराचार्य की कथा): एक प्रसिद्ध कथा है कि जब आदि शंकराचार्य काशी में जा रहे थे, तो भगवान शिव ने उनकी परीक्षा लेने के लिए एक चांडाल का रूप धरा, जिसके साथ 4 कुत्ते थे। जब शंकराचार्य ने उन्हें रास्ते से हटने को कहा, तो उस चांडाल (शिव) ने अद्वैत वेदांत का ज्ञान दिया। तब शंकराचार्य समझ गए कि वे 4 कुत्ते 4 वेद हैं और वह चांडाल स्वयं शिव हैं।

8. रेवंत (Lord Revanta): भगवान सूर्य के पुत्र और घोड़ों के रक्षक देवता ‘रेवंत’ को अक्सर घुड़सवारी करते हुए दिखाया जाता है, और उनके साथ हमेशा शिकारी कुत्ते चलते हैं। यह राजाओं और योद्धाओं के प्रिय देवता माने जाते थे।

9. शनि देव (Shani Dev): हालाँकि शनि देव का वाहन कौआ या गिद्ध है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में शनि के प्रकोप को शांत करने के लिए काले कुत्ते की सेवा सबसे बड़ा उपाय माना गया है। माना जाता है कि शनि देव उन लोगों पर कभी कुपित नहीं होते जो कुत्तों को भोजन कराते हैं और उन्हें नहीं सताते।

10. क्षेत्रपाल (Kshetrapal): दक्षिण भारत और कई ग्रामीण इलाकों में ‘क्षेत्रपाल’ देवता की पूजा होती है, जो जमीन और क्षेत्र के रक्षक माने जाते हैं। इनकी मूर्तियों के साथ अक्सर कुत्ता होता है, जो सुरक्षा और जागरूकता का प्रतीक है।

Sanatan Dharma: स्वर्ग के दरवाजे तक साथ निभाने वाला जीव! जानिए क्यों हिंदुओं के लिए पूजनीय है कुत्ता हिंदू धर्म की ये कथाएं हमें सिखाती हैं कि परमात्मा हर जीव में है। कुत्ता हमें निस्वार्थ प्रेम, वफादारी और सुरक्षा का पाठ पढ़ाता है। इसलिए अगली बार जब आप किसी बेजुबान को देखें, तो याद रखें कि उसका नाता सीधे परमात्मा से है।



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