Magh Mela 2026: क्या है कल्पवास? जानें इसके नियम, रहस्य और क्यों इसे माना जाता है ‘मोक्ष का मार्ग’
संगम की रेती पर जब पौष पूर्णिमा की सुबह सूर्य की पहली किरण पड़ती है, तो लाखों श्रद्धालु ‘कल्पवास’ का संकल्प लेकर एक महीने की कठिन तपस्या शुरू करते हैं। कल्पवास का अर्थ है—एक कल्प (समय का एक हिस्सा) तक संगम तट पर निवास करना। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसे ऋषि-मुनियों ने आत्म-शुद्धि का सबसे बड़ा साधन बताया है।
Magh Mela 2026 कल्पवास क्या है और कितने दिन का होता है?
कल्पवास माघ मास में संगम तट पर रहकर की जाने वाली एक विशेष आध्यात्मिक तपस्या है। यह सामान्य तौर पर पौष पूर्णिमा से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक चलता है। इसकी अवधि लगभग 30 दिन की होती है। इन 30 दिनों में कल्पवासी मोह-माया से दूर एक तंबू (कुटिया) में रहकर साधु जैसा जीवन व्यतीत करते हैं।
क्या आप जानते हैं कल्पवासी जमीन पर क्यों सोते हैं? इसके पीछे छिपे हैं गहरे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण। आइए जानते हैं कल्पवास के दौरान क्या करें और क्या न करें।
कल्पवास के दौरान रेतीली जमीन पर सोने की परंपरा के पीछे अध्यात्म और विज्ञान का एक गहरा तालमेल छिपा है। आध्यात्मिक दृष्टि से, भूमि पर शयन करना ‘इंद्रिय संयम’ और ‘अहंकार के त्याग’ का प्रतीक है; यह कल्पवासी को याद दिलाता है कि मनुष्य का शरीर मिट्टी से बना है और अंततः मिट्टी में ही मिल जाना है, जिससे मन में सादगी और वैराग्य का भाव जागृत होता है। वहीं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे ‘अर्थिंग थेरेपी’ (Grounding) माना जाता है। संगम तट की प्राकृतिक रेत पर सोने से शरीर का सीधा संपर्क पृथ्वी की विद्युत ऊर्जा (Electrons) से होता है, जो शरीर के भीतर की सूजन को कम करने, तनाव को दूर करने और नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है।
कल्पवास के अनुशासन को बनाए रखने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है। क्या करें की श्रेणी में, अपना अधिकतम समय प्रभु के नाम जप, ध्यान और श्रीमद्भागवत गीता जैसे ग्रंथों के पाठ में व्यतीत करना चाहिए। सात्विक जीवन जीते हुए संगम में त्रिकाल स्नान और अपनी कुटिया के पास तुलसी व जौ बोना पुण्यदायी माना जाता है। इसके विपरीत, क्या न करें के तहत कल्पवासी को तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, नशा), परनिंदा, क्रोध और किसी भी प्रकार के विलासितापूर्ण साधनों जैसे मोबाइल का अत्यधिक उपयोग या गद्देदार बिस्तरों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। यह 30 दिनों का कठिन अनुशासन मन को शुद्ध कर जीवन को एक नई दिशा प्रदान करता है।
Magh Mela 2026 कल्पवास का रहस्य और उद्देश्य
पुराणों के अनुसार, कल्पवास का उद्देश्य इंद्रियों पर संयम, मन की शुद्धि और ईश्वर प्राप्ति है। माना जाता है कि जो व्यक्ति संगम तट पर नियमपूर्वक कल्पवास करता है, उसे अपने पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है और वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है। यह जीवन को अनुशासित और सरल बनाने की एक ‘रूहानी ट्रेनिंग’ है।
कल्पवास के मुख्य नियम: एक कठिन साधना
कल्पवास हर किसी के बस की बात नहीं है, क्योंकि इसके नियम अत्यंत कठोर होते हैं:
- त्रिकाल स्नान: कल्पवासी को दिन में तीन बार (सुबह, दोपहर, शाम) संगम में स्नान करना होता है।
- एक समय भोजन: पूरे दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन (फलाहार या स्वयं बनाया हुआ भोजन) ग्रहण किया जाता है।
- भूमि शयन: कल्पवासी गद्दे या पलंग पर नहीं सोते, वे रेती (बालू) पर चटाई बिछाकर सोते हैं।
- अखंड ज्योति: कुटिया में अखंड दीप जलाया जाता है और तुलसी का पौधा स्थापित किया जाता है।


क्या करें और क्या न करें?
क्या करें:
- जप और ध्यान: अपना अधिकतम समय ईश्वर के नाम जप, ध्यान और सत्संग में बिताएं।
- धार्मिक पाठ: रामायण, श्रीमद्भागवत गीता या अन्य धार्मिक ग्रंथों का नित्य पाठ करें।
- दान-सेवा: जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को अपनी क्षमतानुसार दान दें।
- प्रकृति से जुड़ाव: कुटिया के पास तुलसी लगाएं और जौ (जवा) बोएं।
- अर्थिंग थेरेपी: रेत पर सोने का पालन करें; वैज्ञानिक रूप से यह शरीर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर ‘अर्थिंग थेरेपी’ की तरह काम करता है।
क्या न करें:
- क्रोध और निंदा: किसी की बुराई (परनिंदा), कटु वचन या झगड़ा करने से पुण्य नष्ट हो जाते हैं।
- आधुनिक सुख-सुविधाएं: भोग-विलास, कॉस्मेटिक्स, परफ्यूम या मोबाइल का अनावश्यक उपयोग न करें।
- क्षेत्र त्याग: संकल्प की अवधि के दौरान मेला क्षेत्र छोड़कर बाहर जाना वर्जित है।
- तामसिक भोजन: प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा या किसी भी प्रकार के नशे से पूरी तरह दूर रहें।
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
पद्म पुराण में कहा गया है कि माघ मास में प्रयाग में कल्पवास करने का फल हजारों सालों की तपस्या के बराबर है। यह व्यक्ति को धैर्य, सहनशीलता और सादगी सिखाता है। कल्पवास के दौरान मिलने वाला मानसिक संतोष आधुनिक युग के तनाव और चिंताओं के लिए सबसे बड़ी औषधि है।
माघ मेला 2026 का आयोजन प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में होगा।
यह मेला त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम) के तट पर आयोजित किया जाएगा। इस साल यह मेला 3 जनवरी 2026 (पौष पूर्णिमा) से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 (महाशिवरात्रि) तक चलेगा।
माघ मेला 2026 की प्रमुख स्नान तिथियां इस प्रकार हैं:
- पौष पूर्णिमा (मेले की शुरुआत): 3 जनवरी 2026
- मकर संक्रांति: 14 जनवरी 2026
- मौनी अमावस्या (सबसे बड़ा स्नान): 18 जनवरी 2026
- बसंत पंचमी: 23 जनवरी 2026
- माघी पूर्णिमा: 1 फरवरी 2026
- महाशिवरात्रि (मेले का समापन): 15 फरवरी 2026
इस दौरान लाखों श्रद्धालु यहाँ ‘कल्पवास’ (एक महीने तक संगम किनारे रहना) करते हैं और पुण्य कमाते हैं।
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