Law Of Karma: सावधान! कहीं आपकी ये छोटी आदतें तो नहीं बिगाड़ रही आपका भाग्य? जानिए कर्म सुधारने के उपाय
कर्म और हमारा जीवन: एक अटूट संबंध

भारतीय दर्शन में कहा गया है—“जैसा बोओगे, वैसा काटोगे।” कर्म केवल वह नहीं है जो हम शारीरिक रूप से करते हैं, बल्कि हमारे विचार और हमारी वाणी भी कर्म का ही हिस्सा हैं। अक्सर हम बड़े पापों से तो डरते हैं, लेकिन जीवन की उन छोटी-छोटी आदतों को नजरअंदाज कर देते हैं जो धीरे-धीरे हमारे ‘कर्म फल’ को बिगाड़ देती हैं।
यदि आपके जीवन में बिना किसी ठोस कारण के बाधाएं आ रही हैं, या मेहनत के बाद भी फल नहीं मिल रहा, तो समय है अपनी इन आदतों पर गौर करने का:

1. परनिंदा और चुगली (Backbiting)
दूसरों की पीठ पीछे बुराई करना सबसे सूक्ष्म लेकिन सबसे हानिकारक नकारात्मक कर्म है। जब हम किसी की बुराई करते हैं, तो हम अनजाने में उस व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा को अपने भीतर सोख लेते हैं। यह आदत न केवल हमारे मानसिक सुकून को छीनती है, बल्कि हमारे सामाजिक सम्मान को भी कम करती है।
2. अन्न का अपमान (Wasting Food)
शास्त्रों में अन्न को ‘ब्रह्म’ माना गया है। थाली में खाना छोड़ना या खाने की बुराई करना सीधे तौर पर आपके भाग्य और समृद्धि को प्रभावित करता है। जो व्यक्ति अन्न का सम्मान नहीं करता, उसके जीवन में धीरे-धीरे बरकत कम होने लगती है।
3. कटु वचन और वाणी का दुरुपयोग
शब्दों में घाव भरने और घाव देने, दोनों की शक्ति होती है। किसी को बिना कारण अपमानित करना, चीखकर बात करना या अपशब्द कहना आपके वाणी-दोष को बढ़ाता है। यह एक ऐसा कर्म है जिसका फल बहुत जल्द मानसिक अशांति के रूप में मिलता है।


4. स्वार्थ और कृतघ्नता (Ingratitude)
अगर कोई आपकी मदद करता है और आप उसके प्रति आभार व्यक्त नहीं करते, तो यह ‘कृतघ्नता’ की श्रेणी में आता है। उपकार को भूल जाना और केवल अपने स्वार्थ के लिए दूसरों का इस्तेमाल करना आपके पुण्य कर्मों को तेजी से नष्ट करता है।
5. समय की बर्बादी और आलस्य
समय को ‘महाकाल’ का स्वरूप माना गया है। समय का दुरुपयोग करना भी एक बुरा कर्म है। आलस्य के कारण अपने कर्तव्यों का पालन न करना आपके आने वाले भविष्य के मार्ग को अवरुद्ध कर देता है।
6. जीव-जंतुओं और प्रकृति के प्रति क्रूरता
प्रकृति के साथ खिलवाड़ या बेजुबान जानवरों को कष्ट देना सबसे भारी कर्मों में गिना जाता है। अनजाने में किसी को पीड़ा पहुँचाना भी आपके संचित कर्मों में ऋण (Debt) की तरह जुड़ जाता है।
7. मन में ईर्ष्या का भाव रखना
किसी दूसरे की तरक्की देखकर दुखी होना या मन ही मन उसका बुरा चाहना एक ‘मानसिक पाप’ है। याद रखें, ब्रह्मांड को आपके कर्मों से ज्यादा आपकी ‘नीयत’ का पता होता है।

बुरे कर्म सिर्फ बड़े अपराधों से नहीं, बल्कि रोज़ाना की छोटी-छोटी गलत आदतों से भी बनते हैं। अपनी आदतों को बदलें, भाग्य अपने आप बदल जाएगा।
Law Of Karma कर्म सुधारने के सरल उपाय
- आत्म-अवलोकन: दिन के अंत में 5 मिनट बैठें और सोचें कि आज आपने अनजाने में किसी का दिल तो नहीं दुखाया।
- मौन का अभ्यास: जितना जरूरी हो उतना ही बोलें। इससे वाणी-दोष कम होता है।
- दान और सेवा: निस्वार्थ भाव से की गई सेवा पुराने नकारात्मक कर्मों के प्रभाव को कम करने में मदद करती है।
- क्षमा भाव: दूसरों को क्षमा करना सीखें और अपनी गलतियों के लिए ईश्वर से क्षमा मांगें।
कर्म कोई सजा नहीं है, बल्कि एक प्रतिध्वनि (Echo) है। आप जो ब्रह्मांड को देंगे, वही लौटकर आपके पास आएगा। अपनी आदतों को सुधारना ही अपने भाग्य को बदलने की पहली सीढ़ी है।
Table of Contents
Motivational Books 7 ऐसी किताबें जो आपको मोटिवेशन से भर दें और आलस को हमेशा के लिए दूर कर दें
One God: धर्म के नाम पर नफरत क्यों? जानें क्या है धर्म का असली मतलब और किसने बनाई जात-पात की दीवारें
शोर्ट वीडियोज देखने के लिए VR लाइव से जुड़िये
हमारे फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए इस लींक पर क्लीक कीजिए VR LIVE

