India and Poland : विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और पोलैंड के उप प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोर्स्की के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक। रक्षा, तकनीक और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर बनी सहमति। जानें इस मुलाकात के मुख्य बिंदु।
India and Poland : विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और रादोस्लाव सिकोर्स्की ने रक्षा और आर्थिक सहयोग पर की चर्चा
भारत और पोलैंड: दोस्ती और सहयोग का नया अध्याय
भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘यूरोप कनेक्ट’ नीति के तहत मध्य यूरोप का महत्वपूर्ण देश पोलैंड, एक प्रमुख साझेदार के रूप में उभर रहा है। हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और पोलैंड के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोर्स्की के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस मुलाकात ने दोनों देशों के बीच दशकों पुराने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊर्जा प्रदान की है।


सहयोग के मुख्य बिंदु
डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस वार्ता की जानकारी साझा करते हुए बताया कि चर्चा मुख्य रूप से उन क्षेत्रों पर केंद्रित थी जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- आर्थिक और तकनीकी सहयोग: दोनों नेताओं ने व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और नई तकनीकों के आदान-प्रदान पर सहमति जताई। पोलैंड की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत का विशाल बाजार एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।
- रक्षा साझेदारी: वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए, रक्षा क्षेत्र में सहयोग वार्ता का केंद्र बिंदु रहा। भारत और पोलैंड रक्षा निर्माण और सैन्य तकनीक में साझा प्रयासों को बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।
- खनन और ऊर्जा: पोलैंड खनन (Mining) के क्षेत्र में काफी उन्नत है। डॉ. जयशंकर ने खनन और संसाधन प्रबंधन में सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया।
वैश्विक घटनाक्रमों पर मंथन
बैठक के दौरान केवल द्विपक्षीय मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच पोलैंड की भौगोलिक स्थिति इसे अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। डॉ. जयशंकर ने वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए साझा दृष्टिकोण पर जोर दिया।

भारत-यूरोपीय संघ (EU) संबंधों में पोलैंड की भूमिका India and Poland
विदेश मंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को मजबूत करने में पोलैंड द्वारा दिए जा रहे निरंतर समर्थन की विशेष रूप से सराहना की। पोलैंड, यूरोपीय संघ के भीतर भारत के एक मजबूत समर्थक के रूप में उभरा है, जो मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) और अन्य रणनीतिक वार्ता में सहायक रहा है।
डॉ. एस. जयशंकर की यह वार्ता दर्शाती है कि भारत अब पारंपरिक सहयोगियों से आगे बढ़कर यूरोप के उभरते हुए आर्थिक केंद्रों के साथ गहरे संबंध बना रहा है। पोलैंड के साथ यह मजबूती न केवल रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में भारत को लाभ पहुँचाएगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देशों की आवाज को बल देगी।
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