Republic Day 2026: कर्तव्य पथ पर ‘वंदे मातरम’ की गूंज और ‘सूर्यास्त्र’ का दम; जानें क्यों खास है इस बार की गणतंत्र दिवस परेड

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Republic Day 2026
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Republic Day 2026: कर्तव्य पथ पर ‘वंदे मातरम’ की गूंज और ‘सूर्यास्त्र’ का दम; जानें क्यों खास है इस बार की गणतंत्र दिवस परेड

Republic Day 2026: भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस बार परेड में ‘वंदे मातरम’ के 150 साल, स्वदेशी ‘सूर्यास्त्र’ रॉकेट सिस्टम और यूरोपीय संघ के दो मुख्य अतिथियों समेत कई ऐतिहासिक ‘पहली बार’ होने वाली चीजें शामिल हैं।

गणतंत्र दिवस 2026 की परेड क्यों है सबसे अलग?

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नई दिल्ली: भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस बड़े उत्साह के साथ मना रहा है। दिल्ली का कर्तव्य पथ एक बार फिर भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और आत्मनिर्भरता के संकल्प का गवाह बना। लेकिन 2026 की यह परेड पिछले कई वर्षों की तुलना में कई मायनों में ऐतिहासिक और अलग है।

1. ‘वंदे मातरम’ के 150 साल का उत्सव

इस वर्ष की परेड की मुख्य थीम राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रखी गई है। परेड की शुरुआत से लेकर झांकियों तक में इस गीत की झलक दिखाई दी। कर्तव्य पथ पर 1923 की उन दुर्लभ पेंटिंग्स को भी प्रदर्शित किया गया, जो वंदे मातरम के छंदों पर आधारित हैं। यह न केवल एक गीत का सम्मान है, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना का उत्सव भी है।

2. ‘सूर्यास्त्र’ और ‘भैरव बटालियन’ का डेब्यू

रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को दिखाते हुए, इस बार स्वदेशी ‘सूर्यास्त्र’ (Suryastra) यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का पहली बार प्रदर्शन किया गया। यह सिस्टम 300 किमी तक सटीक मार करने में सक्षम है। इसके साथ ही, हाल ही में गठित ‘भैरव लाइट कमांडो बटालियन’ ने भी पहली बार परेड में मार्च किया, जो भारतीय सेना की आधुनिक और त्वरित युद्ध क्षमता का प्रतीक है।

3. पहली बार दो विदेशी मुख्य अतिथि

राजनयिक इतिहास में यह दुर्लभ अवसर है जब एक साथ दो बड़े वैश्विक नेता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मौजूदगी भारत-EU के मजबूत होते रिश्तों और भारत के वैश्विक बढ़ते कद को दर्शाती है।

4. ‘बैटल एरे’ फॉर्मेशन और 61 कैवेलरी का नया अवतार

सेना ने इस बार अपनी पारंपरिक प्रदर्शन शैली में बदलाव किया है। कर्तव्य पथ पर पहली बार ‘फेज़्ड बैटल एरे’ फॉर्मेशन देखा गया, जिसमें युद्ध के मैदान की वास्तविक स्थिति के अनुसार टैंक, टोही वाहन और सैनिक आगे बढ़े। साथ ही, अपनी शाही वर्दी के लिए प्रसिद्ध 61 कैवेलरी रेजिमेंट इस बार पहली बार औपचारिक ड्रेस के बजाय ‘कॉम्बैट बैटल गियर’ (युद्धक वेश) में नजर आई।

5. ‘मूक योद्धाओं’ की विशेष टुकड़ी

इस बार की परेड में पशु दस्ता भी आकर्षण का केंद्र रहा। लद्दाख के ऊंचे इलाकों में सेना की मदद करने वाले बैक्ट्रियन ऊंट (दो कूबड़ वाले), जांस्कर पोनी (घोड़े) और शिकारी पक्षी (रैप्टर्स) पहली बार परेड का हिस्सा बने। इन्हें ‘साइलेंट वॉरियर्स’ के रूप में सम्मानित किया गया।

जन-भागीदारी और VIP कल्चर का अंत

सरकार ने इस बार परेड में आम नागरिकों यानी ‘जन-भागीदारी’ पर विशेष जोर दिया है। लगभग 10,000 विशेष अतिथियों में किसान, कारीगर और सीमावर्ती गांवों के लोग शामिल हुए। बैठने के स्थानों का नाम भी VVIP के बजाय भारत की पवित्र नदियों (गंगा, यमुना, कावेरी आदि) पर रखा गया है, जो बदलती लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकेत है।



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