पद्म पुरस्कारों का इतिहास (History of Padma Awards): किसने की थी शुरुआत और कैसे ‘पद्म’ बना भारत का गौरव? जानें पूरी कहानी
History of Padma Awards क्या आप जानते हैं कि पद्मश्री और पद्म विभूषण की शुरुआत कब और किसने की थी? जानें इन पुरस्कारों का इतिहास, वर्गीकरण और इसके पहले विजेताओं के बारे में।
पद्म पुरस्कार: भारत के गौरव की कहानी! 🏅 क्या आपने कभी सोचा है कि पद्मश्री और पद्म विभूषण की शुरुआत कैसे हुई? साल 1954 में शुरू हुआ यह सफर आज भारत के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक है। समाज सेवा से लेकर कला और विज्ञान तक, ये पुरस्कार उन हीरों को मिलते हैं जिन्होंने देश का मान बढ़ाया। आइए जानते हैं इनका इतिहास!
पद्म पुरस्कारों का उदय: एक राष्ट्र के सम्मान की गौरवगाथा
भारत में हर साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर ‘पद्म पुरस्कारों’ की घोषणा की जाती है। यह न केवल एक सम्मान है, बल्कि एक देश द्वारा अपने नागरिकों के असाधारण योगदान की स्वीकृति है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन पुरस्कारों की शुरुआत कब हुई और इनके पीछे का विचार क्या था?
किसने और कब की शुरुआत? History of Padma Awards
पद्म पुरस्कारों की स्थापना 2 जनवरी 1954 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के एक आदेश के माध्यम से की गई थी। भारत रत्न और पद्म पुरस्कारों की शुरुआत एक ही दिन हुई थी। उस समय भारत एक नया और स्वतंत्र राष्ट्र था, और सरकार का मानना था कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में निस्वार्थ सेवा करने वाले नागरिकों को सम्मानित करने के लिए एक औपचारिक तंत्र होना चाहिए।

शुरुआत में थे ‘वर्ग’ (Categories)
History of Padma Awards दिलचस्प बात यह है कि 1954 में जब ये पुरस्कार शुरू हुए, तब इनका नाम आज जैसा नहीं था। उस समय इन्हें ‘पद्म विभूषण’ के तीन वर्गों में बांटा गया था:
- पहला वर्ग (Pahela Varg)
- दूसरा वर्ग (Dusra Varg)
- तीसरा वर्ग (Tisra Varg)
हालांकि, 8 जनवरी 1955 को एक राष्ट्रपति अधिसूचना के माध्यम से इनके नामों में संशोधन किया गया और इन्हें वर्तमान स्वरूप दिया गया:
- पद्म विभूषण: असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए।
- पद्म भूषण: उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए।
- पद्मश्री: किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए।

क्या है ‘पद्म’ का अर्थ?

‘पद्म’ शब्द संस्कृत से आया है, जिसका अर्थ है ‘कमल’ (Lotus)। कमल को भारतीय संस्कृति में पवित्रता, ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार का प्रतीक माना जाता है। जिस प्रकार कमल कीचड़ में रहकर भी गंदगी से अछूता रहता है और खिलता है, उसी प्रकार ये पुरस्कार उन लोगों को दिए जाते हैं जिन्होंने अपनी परिस्थितियों से ऊपर उठकर समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य किया है।
पुरस्कारों के डिजाइन की विशेषता
पद्म पुरस्कारों का पदक कांसे (Bronze) का बना होता है। इसके केंद्र में एक कमल का फूल होता है जिसके ऊपर ‘पद्म’ और नीचे ‘श्री/भूषण/विभूषण’ लिखा होता है। इन पुरस्कारों को राष्ट्रपति भवन में एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है।
इतिहास के कुछ उतार-चढ़ाव
पद्म पुरस्कारों का इतिहास हमेशा निरंतर नहीं रहा है। भारतीय इतिहास में दो बार ऐसा समय आया जब इन पुरस्कारों को कुछ वर्षों के लिए रोक दिया गया था:
- 1977 से 1980 के बीच: जब मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली सरकार ने इन्हें ‘खिताब’ मानकर बंद कर दिया था।
- 1992 से 1995 के बीच: कुछ कानूनी चुनौतियों और जनहित याचिकाओं के कारण इन्हें अस्थायी रूप से रोका गया था।
कौन चुनता है विजेता? History of Padma Awards
पद्म पुरस्कारों के लिए सिफारिशें हर साल पद्म पुरस्कार समिति द्वारा की जाती हैं, जिसका गठन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है। इस समिति की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव करते हैं। 2014 के बाद से, सरकार ने इसे ‘पीपल्स पद्म’ बनाने के लिए ऑनलाइन नामांकन की प्रक्रिया शुरू की, जिससे अब कोई भी आम नागरिक किसी गुमनाम नायक का नाम प्रस्तावित कर सकता है।
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