Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी पर भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए इन 8 पवित्र वस्तुओं का भोग लगाएं। जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और सफलता प्राप्ति के अचूक उपाय।
Vijaya Ekadashi 2026: भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये 8 अर्पण, जीवन में लाएंगे सुख-समृद्धि
सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और जब बात ‘विजया एकादशी’ की हो, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले समुद्र किनारे विजया एकादशी का व्रत किया था। वर्ष 2026 में यह शुभ तिथि जातकों के लिए सफलता के नए द्वार खोलने वाली मानी जा रही है। यदि आप भी अपने करियर, व्यवसाय या व्यक्तिगत जीवन में बाधाओं का सामना कर रहे हैं, तो भगवान विष्णु को ये 8 पवित्र वस्तुएं अर्पित करना अत्यंत फलदायी हो सकता है।
विजया एकादशी का महत्व

यह एकादशी कठिन परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने का प्रतीक है। मान्यता है कि जो व्यक्ति विधि-विधान से इस दिन व्रत रखता है और श्री हरि की पूजा करता है, उसे अपने शत्रुओं और मानसिक बाधाओं पर जीत हासिल होती है।
भगवान विष्णु को अर्पित की जाने वाली 8 पवित्र वस्तुएं:
- घी का अखंड दीपक (Ghee Lamp): एकादशी की पूरी रात भगवान के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित रखें। यह ज्ञान और सफलता के प्रकाश का मार्ग प्रशस्त करता है।
- तुलसी दल (Tulsi Leaves): भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है। विजया एकादशी पर उन्हें तुलसी पत्र अर्पित करने से वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्त के घर में सुख-शांति का वास होता है।
- पीले फूल (Yellow Flowers): पीला रंग भगवान विष्णु को अति प्रिय है। विशेष रूप से गेंदे या पीले कनेर के फूल अर्पित करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
- केसर युक्त दूध (Saffron Milk): भगवान का अभिषेक केसर मिश्रित दूध से करने से आर्थिक तंगी दूर होती है और व्यापार में उन्नति के योग बनते हैं।
- पीला चंदन (Yellow Sandalwood): श्री हरि के माथे पर पीले चंदन का तिलक लगाएं और स्वयं भी धारण करें। यह मन को एकाग्र करता है और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि करता है।
- पंचामृत (Panchamrit): दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण यानी पंचामृत का भोग लगाने से शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
- केला और पीले फल (Bananas and Yellow Fruits): विजया एकादशी पर पीले फलों का दान और अर्पण दरिद्रता का नाश करता है।
- मखाने की खीर (Makhana Kheer): घी में भुने मखानों की खीर (बिना अन्न के) भगवान को भोग के रूप में अर्पित करें। यह समृद्धि और वैभव का प्रतीक माना जाता है।

विजया एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Vijaya Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगी। वहीं, तिथि का समापन 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 25 मिनट पर होगा। ऐसे में इस बार विजया एकादशी व्रत 13 फरवरी (Kab Hai Vijaya Ekadashi 2026) को किया जाएगा। 2026 में विजया एकादशी की तिथि और पारण के समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। (नोट: स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि की पुष्टि अवश्य करें)। सामान्यतः यह व्रत दशमी की रात्रि से शुरू होकर द्वादशी के सूर्योदय के बाद पारण के साथ संपन्न होता है।
एकादशी हर साल कितनी आती है?
एकादशी हर महीने में दो बार आती है—
- एक शुक्ल पक्ष में
- एक कृष्ण पक्ष में
इस तरह साल में कुल मिलाकर लगभग 24 एकादशी होती हैं।
अगर अधिक मास (मलमास) पड़ जाए तो यह संख्या 26 भी हो सकती है।
दो एकादशी के बीच कितना अंतर होता है?
एक एकादशी से अगली एकादशी के बीच लगभग 15 दिनों का अंतर होता है।
लोग एकादशी का व्रत क्यों रखते हैं?
2 कारण से लोग एकादशी का व्रत करते है धार्मिक और वैज्ञानिक, पौराणिक महत्व है ।
- धार्मिक कारण: ये दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और अंत में ‘मोक्ष’ (मुक्ति) मिलती है।
- वैज्ञानिक/स्वास्थ्य करण (वैज्ञानिक कारण): महीने में दो बार उपवास करने से शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन (सफाई) होता है और पचन तंत्र (पाचन) को आराम मिलता है। इससे मानसिक शांति और एकता (फोकस) बढ़ती है।
- पौराणिक महत्व: पुराणों के अनुसर, एकादशी तिथि ‘हरि-वासर’ है, यानी भगवान का दिन, इसलिए लोग उनके निकट रहने के लिए और आत्म-नियंत्रण और सकारात्मक ऊर्जा के लिए उपवास करते हैं।
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है।
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