Apara Ekadashi 2026: विष्णु जी को लगाएं इन 5 चीजों का भोग, हर बाधा होगी दूर; जानें प्रेत योनि से मुक्ति की कथा
अपरा एकादशी 2026 पर भगवान विष्णु को इन 5 विशेष चीजों का भोग लगाने से विवाह और संतान संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। पढ़ें अपरा एकादशी की पौराणिक व्रत कथा और महत्व।
Apara Ekadashi 2026 ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘अपरा एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है—’अपरा’ यानी जिसका पुण्य अपार हो। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने और उन्हें प्रिय वस्तुएं अर्पित करने से व्यक्ति को ब्रह्महत्या, परनिंदा और प्रेत योनि जैसे घोर पापों से मुक्ति मिल जाती है।


वर्ष 2026 में अपरा एकादशी का व्रत 12 मई को रखा जाएगा। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व, भगवान विष्णु के प्रिय भोग और वह पौराणिक कथा जिसके कारण एक राजा के प्रेत को मुक्ति मिली थी। 12 मई 2026 को है अपरा एकादशी। विष्णु जी की कृपा पाने के लिए जरूर लगाएं ये विशेष भोग
व्रत के नियम और सावधानी
- एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित है।
- दशमी की रात्रि से ही ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- इस दिन किसी की निंदा न करें और न ही क्रोध करें।
- द्वादशी के दिन शुभ मुहूर्त (पारण समय) में ही व्रत खोलें और ब्राह्मण को दान-दक्षिणा दें।
अपरा एकादशी का महत्व और लाभ
पद्म पुराण के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत करने से वे फल प्राप्त होते हैं जो कार्तिक मास में स्नान करने या गंगा तट पर पितरों को पिंडदान करने से मिलते हैं।
- पापों का नाश: यह व्रत जाने-अनजाने में किए गए झूठ बोलने, झूठी गवाही देने या धोखेबाजी जैसे पापों का प्रभाव खत्म करता है।
- विवाह में सफलता: जो कन्याएं या युवक विवाह में विलंब का सामना कर रहे हैं, उन्हें इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना चाहिए।
- संतान सुख: संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों को इस दिन पीले वस्त्र पहनकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए।
- मानसिक शांति: प्रेत बाधा या नकारात्मक ऊर्जा से परेशान लोगों के लिए इस व्रत की कथा पढ़ना और सुनना अचूक उपाय माना जाता है।


अपरा एकादशी की रोचक पौराणिक कथा: राजा महीध्वज और प्रेत मुक्ति
प्राचीन काल में महीध्वज नाम के एक धर्मात्मा राजा थे। उनका छोटा भाई वज्रध्वज बहुत ही क्रूर और अधर्मी था। वह अपने बड़े भाई से द्वेष रखता था। एक दिन अवसर पाकर वज्रध्वज ने अपने बड़े भाई महीध्वज की हत्या कर दी और उनके शव को जंगल में एक पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दिया।
अकाल मृत्यु होने के कारण राजा महीध्वज की आत्मा प्रेत योनि में चली गई। वह उसी पीपल के पेड़ पर रहकर राहगीरों को परेशान करने लगे। राजा की पुण्य आत्मा होने के बावजूद, अकाल मृत्यु और अधर्म के कारण उन्हें यह कष्ट भोगना पड़ रहा था।
एक दिन धौम्य ऋषि उस रास्ते से गुजर रहे थे। उन्होंने अपनी तपोबल की दृष्टि से उस प्रेत को देखा और उसके अतीत को जान लिया। ऋषि को राजा की स्थिति पर दया आ गई। उन्होंने उस प्रेत (राजा) को पेड़ से नीचे उतारा और उसे परलोक विद्या का उपदेश दिया।
राजा को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए ऋषि धौम्य ने स्वयं अपरा एकादशी का व्रत रखा और उस व्रत का सारा पुण्य राजा को दान कर दिया। एकादशी के पुण्य प्रभाव से राजा महीध्वज प्रेत योनि के कष्टों से मुक्त हो गए। वे दिव्य देह धारण कर स्वर्ग लोक चले गए। प्रस्थान करते समय उन्होंने ऋषि को हाथ जोड़कर धन्यवाद दिया कि “हे ऋषिवर! आपकी कृपा और अपरा एकादशी के पुण्य से ही मुझे इस नर्क तुल्य योनि से मुक्ति मिली है।”

Apara Ekadashi 2026 पर भगवान विष्णु के 5 विशेष भोग
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन श्रद्धापूर्वक लगाए गए भोग से श्रीहरि अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। विशेष रूप से विवाह और संतान सुख की बाधाओं को दूर करने के लिए ये 5 चीजें अर्पित करें: Apara Ekadashi 2026
- पीले फल और मिठाई: भगवान विष्णु को ‘पीतांबरधारी’ कहा जाता है, उन्हें पीला रंग अति प्रिय है। अपरा एकादशी पर उन्हें पीले केले, आम या केसरिया लड्डू का भोग लगाएं। इससे गुरु ग्रह मजबूत होता है और विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं।
- तुलसी दल (अनिवार्य): विष्णु जी का कोई भी भोग तुलसी के बिना अधूरा माना जाता है। मान्यता है कि तुलसी अर्पित करने से संतान पक्ष की समस्याएं समाप्त होती हैं और परिवार में सुख-शांति आती है।
- पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण से बना पंचामृत श्रीहरि को अभिषेक के बाद भोग के रूप में अर्पित करें। यह शारीरिक रोगों से मुक्ति दिलाता है।
- मखाने की खीर: केसर मिश्रित मखाने की खीर का भोग लगाने से लक्ष्मी जी और विष्णु जी दोनों की कृपा प्राप्त होती है, जिससे आर्थिक तंगी दूर होती है।
- पीला चंदन और अक्षत: हालांकि यह सीधे तौर पर खाद्य भोग नहीं है, लेकिन उनके माथे पर पीले चंदन का तिलक लगाकर उन्हें पीले चावल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
अपरा एकादशी का दिन भक्ति और प्रायश्चित का संगम है। राजा महीध्वज की कथा हमें सिखाती है कि धर्म का मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन ईश्वर की कृपा और एकादशी जैसे पुण्य पर्व किसी भी घोर संकट से उबार सकते हैं। वर्ष 2026 की इस एकादशी पर श्रीहरि का स्मरण करें और अपार सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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